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6 हिन्दू नेताओ ने सरकार से मांगी सुरक्षा

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 18 अक्टूबर को हिंदू समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश तिवारी की हत्या ने तीखे तेवरों के लिए चर्चित अन्य कई हिंदू नेताओं को विचलित कर दिया है। अब वे अपनी सुरक्षा को लेकर खासे चिंतित नजर आ रहे हैं। ऐसे नेता, भाजपा के बड़े नेताओं से संपर्क कर सुरक्षा की सिफारिश कराने के साथ सीधे गृह मंत्री अमित शाह से लेकर राज्य सरकारों को पत्र लिख रहे हैं। भाजपा के सूत्रों ने आईएएनएस से कहा कि अपने बयानों से सुर्खियों में रहने वाले आधे दर्जन नेता सुरक्षा मांग चुके हैं। वहीं कुछ ऐसे भी लोग हैं, जिन्हें न धमकी मिली है और न उन्होंने खुद सुरक्षा मांगी है, बल्कि उनके समर्थक इसके लिए गुहार लगा रहे हैं। सुरक्षा मांगने वाले हिंदू नेताओं में सबसे चर्चित नाम साध्वी प्राची का है। भाजपा अध्यक्ष व गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पत्र लिखकर वह सुरक्षा की गुहार लगा चुकी हैं। उन्होंने कहा है कि पिछले कुछ दिनों से हरिद्वार स्थित उनके आश्रम के आसपास कुछ संदिग्ध लोग टहलते मिले हैं, अनहोनी की आशंका है। साध्वी प्राची ने सीमा पार के आतंकी संगठनों के निशाने पर खुद के होने की बात कही
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अब आज़म पर बकरी चोरी का केस

रामपुर। सपा सांसद आज़म खाँ की मुश्किलें कम होने का नाम ही नही ले रही। अब तक जो आरोप लगते रहे वो अपनी जगह दुरुस्त हो सकते है पर अब जो ताज़ा आरोप लगा वो बकरी चोरी का है जो तीन साल पुराना मामला है। मिली जानकारी के अनुसार आजम खां के खिलाफ गुरुवार को पुलिस ने एक और मुकदमा दर्ज किया है,इस बार शिकायतकर्ता के घर में बंधी बकरी, भैंस और बछड़ा खुलवाने का मुकदमा दर्ज किया गया है। बताया जा रहा है कि साल 2016 की एक घटना में यतीमखाना सरायगेट की रहने वाली नसीमा खातून ने आजम खान के खिलाफ शिकायत करते हुए आरोप लगाया कि तीन साल पहले आजम खान के कहने पर कुछ लोगों ने उनके घर में घुस कर तोड़-फोड़ की थी और उपद्रव मचाया था, साथ ही उनके पशुओं को भी जबरन खोल कर ले गए थे।
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अब स्टेशनों पर कुल्हड़ में चाय-लासी

नई दिल्ली। प्लास्टिक से निजात दिलाने और पर्यावरण को अनुकूल बनाने की दिशा में भारतीय रेलवे ने 400 स्टेशनों पर चाय और लस्सी को मिट्टी के कुल्हड़ों में देने का निर्णय किया है। यहाँ यह बात उलेखनीय है कि दो दिन पहले भी रेलवे ने पीने के पानी की बोतलों को स्क्रैप करने के लिए मोबाइल रिचार्ज की सुविधा देने की बात की थी। इसके लिए खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) से बातचीत की गई है। इस कदम से जहां एक तरफ स्थानीय और पर्यावरण अनुकूल उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा, प्लास्टिक के उपयोग पर अंकुश लगेगा वहीं दूसरी तरफ कुम्हारों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। केवीआईसी के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना ने पीटीआई -भाषा से कहा कि रेलवे की इस पहल से उत्साहित आयोग कुम्हारों के बीच 30,000 इलेक्ट्रिक चाक का वितरण करने का फैसला किया है। साथ ही मिट्टी के बने सामानों को पुनर्चक्रमण और नष्ट करने के लिये मशीन (ग्राइंडिंग मशीन) भी उपलब्ध कराएगा। मालूम हो कल प्रधानमंत्री मोदी ने मथुरा में कहा था कि प्लास्टिक के इस्तेमाल को 2 अक्टूबर शून्य पर ला खड़ा कर दिया जाए।
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वॉर: ऋतिक ने रखी थी टाइगर श्रॉफ के लिए ये शर्त

ऋतिक रोशन की अपकमिंग फिल्म 'वॉर' 2 अक्टूबर को रिलीज हो रही है। इस एक्शन थ्रिलर फिल्म में पहली बार उनके साथ टाइगर श्रॉफ भी नजर आएंगे। एक इंटरव्यू में ऋतिक ने टाइगर के साथ अपनी बॉन्डिंग के बारे में बताया। उनकी मानें तो उन्होंने यह फिल्म टाइगर के बगैर करने से इनकार कर दिया था। बकौल ऋतिक, "मैं बहुत खुश हूं। एक समय वह मुझसे प्रेरित हुआ करता था और अब मैं उससे प्रेरित हो रहा हूं। यानी कि एक सर्कल पूरा हो गया।" 'सुपर 30' के बाद हो गए थे आलसी ऋतिक ने आगे कहा, "'सुपर 30' के बाद मैं आलसी हो गया था। मैं बस खाना खा रहा था, वर्कआउट रुक चुका था और बहुत खुश था। फिर मैंने सोचा वापसी कैसे करूं। मैं ऐसी स्क्रिप्ट की तलाश में जुट गया, जो मुझे मेरी लास्ट फिल्म की तरह एम्पावर कर सके। इसलिए मैंने अपना बेस्ट दिया। मुझे दर्द हो रहा था, मेरे जॉइंट्स में चोट थी और स्टिफनेस भी थी।फाइनली मुझे एक स्क्रिप्ट मिली और मैंने सिड (डायरेक्टर सिद्धार्थ आनंद) और आदि (प्रोड्यूसर आदित्य चोपड़ा) से एक ही बात कही। मैंने उनसे कहा कि मैं 'वॉर' तभी करूंगा, जब उसमें टाइगर श्रॉफ होंगे।" 'टाइगर की कोई बराबरी नहीं कर सकता' बकौल ऋतिक, "मुझे पता है कि टाइगर ही इकलौता एक्टर है, जो मेरे सामने खड़ा हो सकता है। मुझे अपना बेस्ट देना होगा उसकी बराबरी करने में। मुझे नहीं लगता कि मैं तब उसके बराबर था। यह अच्छी बात भी है। दोनों ओर से हम एक-दूसरे को बेहतर करने के लिए प्रेरित करेंगे। वह अभूतपूर्व है। वह यहां 50 साल तक रहने वाला है और कोई उसकी बराबरी नहीं कर सकता।" 7 देशों में शूट हुई 'वॉर' 'वॉर' की शूटिंग 7 देशों और 15 शहरों में हुई है। दुनियाभर के चार सबसे अच्छे एक्शन डायरेक्टर्स ने इसके सीन कोरियोग्राफ किए, ताकि अलग तरह का एक्शन दिख सके। फिल्म में ऋतिक और टाइगर के अलावा वाणी कपूर, आशुतोष राणा, दीपानिता शर्मा और अनुप्रिया गोयंका की भी अहम भूमिका है।
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मुंबई के गणपति पंडाल में किन्नरों के लिए रोज 24 नाटक

मुंबई के अंधेरी इलाके में जेबी नगर के ऋद्धि-सिद्धि गणेश मंडल ने एक नई पहल की है। समानता का अधिकार और मानवता ही सबसे बड़ा धर्म की थीम पर किन्नरों के सम्मानजनक जीवन के लिए रोज 25 बार नाटक प्ले किया जा रहा है। नुक्कड़ की तरह डिजाइन इस 10 से 15 मिनट के नाटक को लगभग 25 हजार लोग रोज देख रहे हैं। ये प्ले गौरी सावंत के जीवन पर आधारित है जो खुद के ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट हैं। मंडल के आयोजक दिनेश चंद्रारकर के मुताबिक हर साल हमारे पंडाल की कोई ऐसी थीम होती है जो किसी ना किसी सोशल इशू पर आधारित होती है। इस बार हमने किन्नरों के बेहतर जीवन और सम्मान को थीम बनाया है। पंडाल में हमने इसके लिए देश के जाने-पहचाने किन्नरों के होर्डिंग्स भी लगाए हैं। हमारी थीम का उद्देश्य किन्नरों को समाज में समान जीवन और सम्मान दिलाने का है। जो प्ले है वो एक बरसात की रात का है जहां एक कपल को बारिश के कारण एक घर में शरण लेनी पड़ती है, जो एक किन्नर का घर है। वहां होने वाली बातचीत और दृश्य से हमने किन्नरों से जुड़ी भ्रांतियों को तोड़ने की कोशिश की है।
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श्राद्ध-तर्पण एक महाअधियात्मिक योग

पुराणों के अनुसार, मृत्यु के बाद भी जीव की पवित्र आत्माएं किसी न किसी रूप में श्राद्ध पक्ष में अपनी परिजनों को आशीर्वाद देने के लिए धरती पर आती हैं। पितरों के परिजन उनका तर्पण कर उन्हें तृप्त करते हैं। विद्वानो अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन माह की अमावस्या तक 16 दिन की विशेष अवधि में श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। श्राद्ध को पितृपक्ष नाम से भी जाना जाता है। इस बार 13 सितंबर से श्राद्ध पक्ष शुरू हो रहे हैं, जो कि 28 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होंगे। तिथि क्षय होने से दो दिन किया जा सकता है द्वितिया का श्राद्ध इस बार पितृपक्ष में तिथि क्षय और तिथि वृद्धि भी हो रही है। इस बार पितृपक्ष में पंचांग में तिथियों की गणना के अनुसार पूर्णिमा का श्राद्ध 13 सितंबर को और प्रतिपदा का श्राद्ध 14 तारीख को किया जाना चाहिए। वहीं द्वितिया तिथि का श्राद्ध दो दिन यानी 15 और 16 तारीख को किया जा सकता है। इसके साथ हीएकादशी और द्वादशी का श्राद्ध एक ही दिन यानी 25 सितंबर को होगा। इसी गणना के अनुसार 26 सितंबर को त्रयोदशी का श्राद्ध करना चाहिए। इसके बाद चतुर्दशी और अमावस्या का श्राद्ध क्रमश: 27 और 28 सितंबर को किया जा सकता है। श्राद्ध किसे कहते हैं? श्राद्ध का अर्थ है, अपने पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट करना। शास्त्रों के अनुसार जिस किसी के परिजन अपने शरीर को छोड़कर चले गए हैं, उनकी तृप्ति और उन्नति के लिए श्रद्धा के साथ जो शुभ संकल्प और तर्पण किया जाता है, उसे श्राद्ध कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि मृत्यु के देवता यमराज श्राद्ध पक्ष में जीव को मुक्त कर देते हैं, ताकि वे स्वजनों के यहां जाकर तर्पण ग्रहण कर सकें। कौन कहलाते हैं पितर जिस किसी के परिजन चाहे वह विवाहित हों या अविवाहित, बच्चा हो या बुजुर्ग, स्त्री हो या पुरुष उनकी मृत्यु हो चुकी है उन्हें पितर कहा जाता है। पितृपक्ष में मृत्युलोक से पितर पृथ्वी पर आते हैं और आशीर्वाद देते हैं। पितृपक्ष में पितरों की आत्मा की शांति के लिए उनको तर्पण किया जाता है। पितरों के प्रसन्न होने पर घर पर सुख शांति आती है। पितृपक्ष में कैसे करें श्राद्ध श्राद्ध वाले दिन अल सुबह उठकर स्नान-ध्यान करने के बाद पितृ स्थान को सबसे पहले शुद्ध कर लें। इसके बाद पंडित जी को बुलाकर पूजा और तर्पण करें। इसके बाद पितरों के लिए बनाए गए भोजन के चार ग्रास निकालें और उसमें से एक हिस्सा गाय, एक कुत्ते, एक कौए और एक अतिथि के लिए रख दें। गाय, कुत्ते और कौए को भोजन देने के बाद ब्राह्मण को भोजन कराएं। भोजन कराने के बाद ब्राह्मण को वस्त्र और दक्षिणा दें। जब याद न हो श्राद्ध की तिथि पितृपक्ष में पूर्वजों का स्मरण और उनकी पूजा करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है। जिस तिथि पर हमारे परिजनों की मृत्यु होती है उसे श्राद्ध की तिथि कहते हैं। बहुत से लोगों को अपने परिजनों की मृत्यु की तिथि याद नहीं रहती ऐसी स्थिति में शास्त्रों में इसका भी निवारण बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार यदि किसी को अपने पितरों के देहावसान की तिथि मालूम नहीं है तो ऐसी स्थिति में आश्विन अमावस्या को तर्पण किया जा सकता है। किस दिन किसका श्राद्ध 1. पंचमी श्राद्ध - जिनकी मृत्यु पंचमी तिथि को हुई हो या जिनकी मृत्यु अविवाहित स्थिति में हुई है उनके लिए पंचमी तिथि का श्राद्ध किया जाता है। 2. नवमी श्राद्ध - इसे मातृनवमी के नाम से भी जाना जाता है। इस तिथि पर श्राद्ध करने से कुल की सभी दिवंगत महिलाओं का श्राद्ध हो जाता है। 3. चतुर्दशी श्राद्ध - इस तिथि उन परिजनों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी अकाल मृत्यु हुई हो जैसे कि दुर्घटना से, हत्या, आत्महत्या, शस्त्र के द्वारा आदि। 4. सर्वपितृ अमावस्या - जिन लोगों के मृत्यु के दिन की सही-सही जानकारी न हो, उनका श्राद्ध आमावस्या को किया जाता है।
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गणेश विसर्जन: महाभारत काल से जुड़ी है ये प्रथा

गणेश चतुर्थी के दिन बप्पा की स्थापना कर उनकी पूजा एक, तीन, पांच या दस दिन तक की जाती है। श्रद्धानुसार लोग अपने अनुसार बप्पा का पूजा के दिन निर्धारित करते हैं, उसके बाद उनका विसर्जन जरूर करते हैं। विर्सजन भी भगवान का उतने ही धूमधाम से किया जाता है जितना की स्थापना के समय उनका स्वागत होता है। मान्यता है कि बिना विसर्जन बप्पा की पूजा पूरी नहीं मानी जाती। इसलिए विसर्जन करना जरूरी होता है लेकिन विसर्जन के पीछे एक महत्वपूर्ण वजह भी है। ऐसे शुरू हुई उत्सव की प्रथा गणेशोत्सव की शुरुआत आजादी से पूर्व ही शुरू हो चुकी थी। अंग्रेजो के खिलाफ देशवासियों को एकजुट करने के लिए श्री बाल गंगाधर तिलक ने गणेशोत्सव का पहली बार आयोजन किया था। धीरे-धीरे ये प्रथा बनी और हर साल पूरे देश में इस उत्सव का आयोनज होना शुरू हो गया। पूजा के बाद विसर्जन करने को लेकर कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर गणपति जी का विसर्जन करना जरूरी क्यों होता है। आइए जानें क्या है इसके पीछे की कहानी। भगवान हैं जल तत्व के अधिपति भगवान गणेश जल तत्व के अधिपति माने गए हैं। मुख्य कारण तो उनके वसर्जन का यही है कि अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान गणपति की पूजा-अर्चना के बाद उन्हें वापस जल में विसर्जित कर दिया जाता है। यानी वह जिसके अधिपति है, वहीं उन्हें पहुंचा दिया जाता है, लेकिन पुराणों में उनके विसर्जन के पीछे कुछ और बातें भी हैं। बढ़ गया था तापमान, इसलिए जल में डाला गया बप्पा को धार्मिक पुराणों में उनके विसर्जन के पीछे मान्यता बिलकुल इतर है। पुराणों के अनुसार श्री वेद व्यास जी गणेश चतुर्थी से महाभारत कथा प्रारंभ की और गणपति जी अक्षरश: लिखते जा रहे थे। व्यास जी आंख बंद कर कथा लगातार दस दिन तक सुनाते रहे और गणपति जी लिखते ही रहे। दस दिन बाद जब व्यास जी ने कथा खत्म कर आंखें खोलीं तो पाया कि गणपति जी के लगातार काम करने से उनके शरीर का तापमान बहुत बढ गया था। व्यास जी ने गणेश जी के शरीर को ठंडक देने के लिए एक सरोवर में ले जा कर खूब डुबकी लगवाई, जिससे उनका तापमान समान्य हो गया। इतना ही नहीं उनके तापमान को कम करने के लिए व्यास जी ने उनके शरीर पर सुगंधित सौंधी माटी का लेप भी किया था और जब वह सूख गई तो उनका शरीर अकड़ने लगा इस कारण भी उन्हें सरोवर में ले जाया गया ताकि माटी शरीर से अलग हो कर उन्हें ठंडक दे सकें। इसके बाद व्यास जी ने 10 दिनों तक गणपति जी को उनके पसंद का भोजन कराया था। इसी मान्यता के अनुसार प्रभु की पूजा के बाद उनका विसर्जन किया जाता है।
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इन उपायों से दूर हो सकती है आर्थिक सुस्ती

रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वी.के. यादव ने कहा है कि स्टेशनों पर बोतलों को नष्ट करने वाली 400 मशीनें लगाई जाएंगी। इसका इस्तेमाल करने वाले यात्रियों को मशीन में अपना मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा और इसके बाद उनका मोबाइल फोन रिचार्ज हो जाएगा। हालांकि, रिचार्ज के विवरण फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 128 स्टेशनों पर बोतल नष्ट करने वाली 160 मशीनें लगाई गई हैं। उन्होंने कहा कि रेलवे कर्मचारियों को स्टेशनों पर इस्तेमाल हो चुकी प्लास्टिक बोतलों को जमा करने और उन्हें रिसाइकल के लिए भेजने का निर्देश दिया है। इससे पहले, मंत्रालय ने सभी विक्रेताओं और कर्मचारियों को प्लास्टिक का इस्तेमाल घटाने के लिए फिर इस्तेमाल होने वाले बैग के प्रयोग का निर्देश दिया था। कुछ अर्थशास्त्री ग्रामीण मांग बढ़ाने और वित्तीय प्रोत्साहन देने का सुझाव दे रहे जबकि कुछ का कहना है कि भारत में वास्तविक ब्याज दर लंबे समय तक ऊंची होने से उपभोग और निवेश की मांग प्रभावित हुई है। आर्थिक सुस्ती गहराने के मूल में हालांकि, सभी का इशारा मांग की कमी होने की तरफ ही रहा है लेकिन मांग पैदा करने और अर्थव्यवस्था में गतिविधियां बढ़ाने के बारे में उनके सुझाव अलग अलग रहे हैं। उल्लेखनीय है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर छह साल के निम्न स्तर, पांच प्रतिशत पर पहुंच गई। रिजर्व बैंक ने अपनी ताजा मौद्रिक समीक्षा में इस वित्त वर्ष की आर्थिक वृद्धि का अनुमान सात प्रतिशत से घटाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया। कुछ वैश्विक एजेंसियों ने इसके 6.5 प्रतिशत या उससे भी कम रहने का अनुमान जताया है। नेशनल इंस्टीट्यूट आफ पब्लिक फाइनेंस एण्ड पालिसी के प्रोफेसर एन आर भानुमूर्ति कहते हैं, ‘इस समय सरकार को सड़क, रेलवे, बिजली, ग्रामीण एवं शहरी आवास क्षेत्र की तमाम बड़ी परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाना होगा ताकि आर्थिक गतिविधियों में तेजी आये।’ उन्होंने कहा, ‘आर्थिक सुस्ती तो काफी पहले शुरू हो गई थी हालांकि, सरकार इसे अब महसूस कर रही है। इसकी वजह चक्रीय और संरचनात्मक दोनों तरह की हैं।’ भानुमूर्ति ने कहा, ‘आपको वित्तीय प्रोत्साहन देने होंगे, मौद्रिक उपाय का फिलहाल असर नहीं होगा। सरकार के वित्तीय प्रोत्साहनों का स्वरूप 2008- 09 की तरह नहीं होना चाहिये। सीधे उपभोक्ता खपत बढ़ाने वाले उपाय यदि होंगे तो मुद्रास्फीति बढ़ सकती है इसलिये इससे बचना होगा। पूर्ववर्ती योजना आयोग में प्रधान आर्थिक सलाहकार रहे प्रणव सेन इस मामले में सीधे मांग की कमी को आर्थिक सुस्ती की वजह बताते हैं। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र में मांग कमजोर बनी हुई है। शहरी गरीब लोगों की आमदनी कम है। इससे जनसंख्या के एक बड़े तबके की मांग कमजोर बनी हुई है। उनका स्पष्ट मानना है कि अर्थव्यवस्था में आपूर्ति की कोई तंगी नहीं है बल्कि मांग की कमी बनी हुई है। उनका सुझाव है कि किसानों को सालाना 6,000 रुपये देने की पीएम किसान योजना पर तेजी से अमल होना चाहिये। ग्रामीण स्तरीय परियोजनाओं जैसे कि ग्रामीण सड़क योजना, लघु सिंचाई योजना, सस्ती आवास योजना पर काम तेज होना चाहिये। इनमें स्थानीय ठेकेदारों और स्थानीय कामगारों को काम दिया जाना चाहिये। वहीं सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट रिसर्च (सीजीडीआर) के निदेशक डा. कन्हैया सिंह ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मुख्यत: आपूर्ति प्रेरित है। देश में मानसून अच्छा रहता है तो बाजार में गर्मी आती है। इस तरह उद्योग धंधे मानसून की चाल पर निर्भर करते हैं। उन्होंने आर्थिक सुस्ती के स्वरूप पर एक अलग नजरिया पेश करते हुए कहा कि अप्रैल- जून 2019 की पहली तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि कम रही है लेकिन बिजली क्षेत्र की वृद्धि 8.62 प्रतिशत पर अच्छी रही है। विनिर्माण क्षेत्र अच्छा नहीं कर रहा है लेकिन अन्य क्षेत्र अपेक्षाकृत ठीक प्रदर्शन कर रहे हैं इसको समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा बिजली क्षेत्र का प्रदर्शन अच्छा है तो इसकी खपत हुई उत्पादन भी हुआ लेकिन बिक्री नहीं हुई। यह पिछले साल के ऊंचे स्तर का भी असर हो सकता है। भानुमूर्ति कहते हैं कि विदेशी जोखिम को कम करने के लिये घरेलू क्षेत्र पर ध्यान देना होगा। घरेलू बचत को बढ़ावा दिया जाना चाहिये। अवसंरचना बॉंड, कर मुक्त सुविधा वाले बॉंड जारी किये जा सकते हैं। प्रणव सेन का कहना है कि समस्या मांग की है जबकि सरकार के उपाय आपूर्ति बढ़ाने की तरफ अधिक हैं। बैंकों में नकदी उपलब्ध है लेकिन मांग नहीं है। कन्हैया सिंह कहते हैं कि भारत जैसे देश में मुद्रास्फीति को लक्षित दायरे में बांधना ठीक नहीं है। पिछले डेढ़ दो साल में मुद्रास्फीति कम रहने के बावजूद रिजर्व बैंक की रेपो दर को ऊंचा रखा गया। इसमें कमी नहीं की गई परिणामस्वरूप वास्तविक ब्याज दर ऊंची बनी रही। इसका निवेश पर असर पड़ता है। सिंह का मामना है कि 2019-20 की जीडीपी वृद्धि सात प्रतिशत के आसपास रहेगी। प्रणव सेन ने कहा वृद्धि 5.5 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी लेकिन भानुमूर्ति का मानना है कि यह 6 से 6.5 प्रतिशत के दायरे में रह सकती है।
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ड्रेप ड्रेस में नजर आया दिव्यांका त्रिपाठी का फ्यूजन लुक, ट्रेंडी अवतार देख फैंस हुए दीवाने

टीवी एक्ट्रेस दिव्यांका त्रिपाठी अपनी एक्टिंग से सबको दीवाना बना देती हैं। वे छोटे पर्दे की जानी-मानी एक्ट्रेसेज में शुमार हैं। एक्टिंग ही नहीं, फैशन में भी दिव्यांका का कोई जवाब नहीं है। वे स्टाइल के मामले में अपने फैंस को कभी निराश नहीं करती हैं। दिव्यांका पर हर तरह के आउटफिट्स जंचते हैं। वे सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। उनके इंस्टाग्राम पर 11 मिलियन फॉलोअर्स हैं। हाल ही में दिव्यांका ने अपनी एक फोटो सोशल मीडिया पर शेयर की है। इसमें वे ड्रेप ड्रेस में नजर आ रही हैं। ये साड़ी कम गाउन है, जिसमें वे बेहद स्टाइलिश लग रही हैं। दरअसल नेवी ब्लू गाउन में फ्लोरल प्रिंट साड़ी पल्लू अटेच्ड है। ये उन्हें फ्यूजन लुक दे रहा है। इसमें नीचे की तरफ मैचिंग बॉर्डर दिया गया है। दिव्यांका ने अपने लुक को ईयररिंग्स और मैचिंग बैंगल्स से एक्सेसराइज किया है। इस दौरान दिव्यांका का मेकअप परफेक्ट लग रहा है। उन्होंने अपने बालों को सेंटर पार्टिंग के साथ स्ट्रेट लुक में खुला रखा हुआ है। उनका ये लुक फैंस को भी बहुत पसंद आ रहा है। अगर आप भी इस तरह के लुक पाना चाहती हैं तो आपको ऑनलाइन कई ऑप्शंस मिल जाएंगे। वहीं अगर आप चाहे तो इस आउटफिट को कस्टमाइज भी करवा सकती हैं। हालांकि इसके लिए एक्सपर्ट की जरूरत होगी। ये लुक आपको भीड़ से बिल्कुल डिफरेंट दिखाएगा। दिव्यांका की अगर बात करें तो वे सीरियल ये हैं मोहब्बतें में दिख रही हैं, इसमें वे इशिता भल्ला का किरदार निभा रही हैं। इसके अलावा दिव्यांका एक वेब सीरीज में भी नजर आ रही हैं। बता दें कि दिव्यांका को 2006 में आए सीरियल बनू मैं तेरी दुल्हन से पहचान मिली थी। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज वे टीवी की टॉप एक्ट्रेसेज में से एक हैं। दिव्यांका ने साल 2016 में अपने को-स्टार विवेक दहिया से शादी रचाई थी।
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बिग बॉस सीजन 13 में होंगे ये 13 बड़े बदलाव, हॉरर थीम से लेकर इंटरनेशनल क्रिकेटर तक बनेगा कंटेस्टेंट

मोस्ट कॉन्ट्रोवर्शियल शो बिग बॉस सीजन 13 के साथ वापसी कर रहा है। सलमान खान एक बार फिर इस शो से ऑडियंस का भरपूर एंटरटेनमेंट करने वाले हैं। बिग बॉस-13 में जहां दर्शकों को फिर से मसालेदार ड्रामा देखने को मिलेगा तो वहीं सलमान खान भी कंटेस्टेंट की जमकर क्लास लगाते नजर आएंगे। बिग बॉस की अभी तक ऑफिशियल डेट तो अनाउंस नहीं हुई है लेकिन 29 सितंबर को शो का प्रीमियर होने की उम्मीद जताई जा रही है। वैसे इस सीजन 13 में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। जिसकी वजह ये शो काफी चर्चाओं में बना हुआ है। आइए एक नजर डालते हैं बिग बॉस-13 के उन 13 बड़े बदलावों पर.... बिग बॉस में इस बार हॉरर थीम देखने को मिलेगी। दरअसल छोटे परदे पर हॉरर शोज को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। ऑडियंस के इसी टेस्ट को ध्यान में रखते हुए बिग बॉस में भी इस बार हॉरर थीम का तड़का लगाया जा रहा है। बिग बॉस सीजन 13 का सबसे बड़ा बदलाव कंटेस्टेंट्स को लेकर हुआ है। इसबार शो में सिर्फ सेलिब्रिटी ही हिस्सा लेंगे। बिग बॉस के इस सीजन में कोई कॉमनर हिस्सा नहीं लेगा। दरअसल पिछले सीजन्स में कॉमनर का बर्ताव सेलेब्स पर काफी हावी हो गया था। इसी बात को ध्यान में रखकर मेकर्स ने फैसला किया है कि इसबार सिर्फ सेलिब्रिटीज की शो का पार्ट बनेंगे। सलमान खान के साथ बिग बॉस-13 में एक को-होस्ट भी नजर आने वाली है। बिग बॉस की हिस्ट्री में ऐसा पहली बार होगा जब सलमान के साथ फीमेल होस्ट दिखेगी। हालांकि वो कौन होगी इसका अभी तक खुलासा नहीं हुआ है। बिग बॉस सीजन 13 के लिए शो की लोकेशन भी बदली गई है। अब तक शो का हर सीजन लोनावला में शूट होता रहा है लेकिन इसबार मुंबई के फिल्मसिटी में बिग बॉस का सेट लगाया गया है। इस सीजन में टीवी की बहुओं की भी कतार लगने वाली है। दरअसल छोटे परदे पर ऑडियंस में टीवी की बहुएं काफी फेमस हैं जिनकी अपनी अलग फैन फॉलोविंग है। ऐसे में ज्यादा से ज्यादा बहुओं के आने से बिग बॉस को टीआरपी में भी फायदा होगा। यही वजह है कि कंटेस्टेंट के लिए टीवी एक्ट्रेस अंकिता लोखंडे, पवित्रा पुनिया, मेघना मलिक, देबीना भट्टाचार्य जैसी कई एक्ट्रेस के नाम सामने आ रहे हैं। 12 सीजन की तुलना में इस बार सलमान खान का बिहेवियर पहले से काफी सख्त होने वाला है। शो में वो इसबार मस्ती मजाक तो करेंगे ही लेकिन गलती करने पर कंटेस्टेंट्स को कड़ी सजा मिलेगी। सलमान खान ने सीजन 13 के लिए अपनी फीस भी दोगुनी कर दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सलमान खान को बिग बॉस 13 में एक वीकेंड (शनिवार-रविवार) को 30 करोड़ रुपए मिलेंगे। शो 13 हफ्ते तक चलता है तो सलमान 26 एपिसोड में नजर आएंगे। ऐसे में सलमान इसबार 400 करोड़ रुपए फीस चार्ज करेंगे। बता दें, बिग बॉस 12 में सलमान एक एपिसोड में 12 करोड़ से 14 करोड़ रुपए चार्ज करते थे। बिग बॉस सीजन 13 में बीच-बीच में मेकर्स बड़े बदलाव भी करेंगे। इसबार मिड सीजन में भी कंटेस्टेंट्स का फिनाले सिलेक्शन होगा। साथ ही कई और ट्विस्ट भी डाले जाएंगे। बिग बॉस-13 में राखी सावंत भी नजर आ सकती हैं। रिपोर्ट्स आ रही हैं कि राखी या तो सिंगल या फिर दीपक कलाल के साथ गेस्ट अपीयरेंस देंगी। बिग बॉस के घर में पहली बार फीमेल वॉइस भी सुनने को मिलेगी। अब तक घर में सिर्फ बिग बॉस की मेल आवाज ही सुनने को मिली है लेकिन इसबार फीमेल बिग बॉस की भी शो में एंट्री होगी। बिग बॉस का टेम्प्रेचर इसबार पहले ही तुलना में काफी हाई होगा। बिग बॉस के घर के आर्किटेक्ट ओमंग कुमार अपनी पत्नी के साथ मिलकर नई प्लानिंग कर रहे हैं। ओमंग की पत्नी लंबे टाइम से शो की डिजाइनर रही हैं वो इसबार घर को और लविश बनाने की तैयारी में हैं। सीजन-13 की वाइल्ड कार्ड एंट्री को लेकर भी जबरदस्त प्लानिंग है। बताया जा रहा है वाइल्ड कार्ड में कम फेमस सेलिब्रिटी शो में धमाकेदार एंट्री लेंगे। बिग बॉस सीजन 13 में इस बार एक इंटरनेशनल कंटेस्टेंट भी होगा। कयास है कि ये इंटरनेशनल कंटेस्टेंट एक क्रिकेटर हो सकता है।
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