img14

नई दिल्ली
केन्द्र सरकार गरीब सवर्णो को 10 फीसदी आरक्षण देने के आद अब गरीब ओबीसी के लोगों के कल्याण की सोच रही है। सभी मंत्रालयों के  ओबीसी कर्मचारियों की संख्या उनकी जातियों के अनुसार उपलब्ध कराने को कहा गया है ताकि चुनाव के पहले सरकार ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट तैयार करवा सके। डिपार्टमेंट आॅफ पर्सनल एंड टेनिंग की तरफ से 12 जनवरी को एक पत्र भेजा गया जिसमें कल शुक्रवार तक ओबीसी कर्मचारियों की सूची उपलब्ध कराने को कहा गया ह।। यहां यह उल्लेखनीय है कि संसद का बजट सत्र 31 जनवरी तक प्रस्तावित है जों संभवतः 13 फरवरी तक चलेगा। समझा जाता है कि सरकार इस रिपोर्ट के आधार पर ओबीसी के प्रतिनिधित्व में परिवर्तन कर सकती है और जातियों का नये सिरे वर्गीकरण करवा सकती है जिससे छोटी और कमजोर जातियों को भी उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।
बताया जाता है कि सरकार ने ओबीसी के मामले में जो नई रणनीति बनायी है वह गरीब सवर्णो को आरक्षण दिये जाने के उपरांत आये सोच से बनायी गयी। सबसे रोचक बात इस रणनीति की यह है कि भाजपा खुद को ओबीसी का सबसे बड़ा हितेषी साबित करने की जुगत में है और साथ ही कांग्रेस जो उसका मुख्य प्रतिद्वंदी दल है उसे ओबीसी की नजरों में गिराने का है कि वह इसके खिलाफ रही है।