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कानपुर। 
देश में निर्मित सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस का जब दूसरा ट्रायल किया गया  तो दिल्ली से कानपुर की दूरी को उसने 15 मिनट पहले तय कर दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को देखने के लिए सेंट्रल स्टेशन पर भीड़ जुटी। ट्रायल में कहीं पर किसी तरह की दिक्कत नहीं भी आई। अब इस ट्रेन का शेड्यूल तय होने के साथ इसके शुभारंभ भी सबकी नजरें लग गई हैं।
नई दिल्ली से वाराणसी के बीच चलने वाली भारत में ही निर्मित पहली सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदेभारत एक्सप्रेस को इसी माह शुरू किया जाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका शुभारंभ कानपुर में ही कर सकते हैं। इसे देखते हुए वंदेभारत एक्सप्रेस का दूसरा ट्रायल किया गया। वंदे भारत एक्सप्रेस ने सुबह छह बजे नई दिल्ली स्टेशन से चलना शुरू किया तो कानपुर तक की दूरी 130 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से इसे दौड़ाया गया। इस रफ्तार के साथ दौड़ती वंदे भारत एक्सप्रेस तय समय से 15 मिनट पहले ही स्टेशन पहुंच गई।
जैसे ही यह ट्रेन सेंट्रल स्टेशन पहुंची इसे देखने के लिए प्लेटफॉर्म पर यात्रियों की भीड़ जुट गई। दिल्ली से कानपुर के बीच हुए ट्रायल से ट्रेन के चालक, गार्ड और स्टेशन के अधिकारी भी उत्साहित नजर आए. स्टेशन सुपरीटेंडेंट से लेकर अन्य अफसर भी पूरी नजर बनाए रखे। ट्रेन के चालक ने बताया कि, ट्रायल रन के दौरान किसी तरह की दिक्कत नहीं आई।
गौरतलब हो कि लगभग 94 करोड़ की लागत से इंट्रीगल कोच फैक्ट्री चेन्नई के इंजीनियरों द्वारा तैयार की गई इस ट्रेन का पूर्व में आगरा ने नई दिल्ली के बीच पहला ट्रॉयल 180 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से किया गया था। मुख्य संरक्षा आयुक्त ने भी ट्रेन की इस रफ्तार को उचित बताते हुए हरी झंडी दे दी है। देश की इस पहली सेमी हाईस्पीड ट्रेन को पहले ट्रेन-18 नाम दिया गया था लेकिन इंजीनियरों के कार्य को वंदनीय बताते हुए इसे नया नाम वंदे भारत एक्सप्रेस दिया गया। इंजनरहित यह सेमीहाईस्पीड ट्रेन नई दिल्ली से वाराणसी के बीच रफ्तार भरेगी. यह सफर ट्रेन आठ घंटे में तय करेगी। बीच में कानपुर व प्रयागराज दो जगह ठहराव दिया जाएगा। इस ट्रेन में कुल 16 कोच हैं, जिनमें 52-52 सीटों वाले दो एग्जक्यूटिव श्रेणी के कोच हैं।
जबकि 78 सीटों वाले शेष 14 कोच वातानुकूलित चेयर कार कोच हैं। शताब्दी एक्सप्रेस की तुलना में वन्दे भारत एक्सप्रेस में यात्री सुविधाएं ज्यादा होंगी। ट्रेन में वाई-फाई, जीपीएस आधारित लोकेशन सुविधा, मॉडयूलर बॉयो ट्वाइलेट के साथ ही कुछ हद तक रिवाल्विंग सीटें हैं। आधुनिक एनाउंसमेंट सिस्टम व एलईडी लाइटें हैं। इस बीच संभावना जताई जा रही है कि यह ट्रेन इसी फरवरी में ही नियमित रूप से रफ्तार भरने लगेगी। ट्रेन सप्ताह के पांच दिन मंगलवार, बुधवार, शुक्रवार, शनिवार व रविवार को चलेगी साथ ही इसका किराया शताब्दी से 40 से 50 प्रतिशत अधिक रहने की संभावना है।