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नई दिल्ली
बीएसपी और एसपी ने चुनावी गठबंधन करने के साथ ही अब रणनीति को धार देना भी शुरू कर दिया है। दोनों दलों ने लोकसभा चुनाव में यूपी की 38-38 सीटों पर लड़ने का फैसला लिया है। सूत्रों के मुताबिक बीएसपी और एसपी ने अब सीटों के बंटवारे से आगे बढ़ते हुए क्षेत्र भी बांट लिए हैं। बीएसपी पश्चिम उत्तर प्रदेश में फोकस कर सकती है, जबकि समाजवादी पार्टी पूर्वांचल में जोर-आजमाइश करेगी।

यही नहीं सूबे की 17 सुरक्षित सीटों में से ज्यादातर पर बीएसपी मुकाबले में उतर सकती है। पश्चिम यूपी में बीएसपी का मजबूत जनाधार माना जाता है, जबकि समाजवादी पार्टी वेस्ट यूपी की तुलना में पूर्वांचल में मजबूत मानी जाती है। सूत्रों की मानें तो बीएसपी सुप्रीमो मायावती 15 बरस बाद लोकसभा चुनाव लड़ सकती हैं। आखिरी बार उन्होंने 2004 में लोकसभा का चुनाव लड़ा था। 

मायावती, अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। अखिलेश यादव कन्नौज से और मुलायम सिंह यादव आजमगढ़ की बजाय इस बार अपनी परंपरागत सीट मैनपुरी से लड़ सकते हैं। मायावती की सीट पर अभी फैसला नहीं हुआ है। 

इन सीटों पर लड़ेगी बीएसपी और यहां SP भरेगी दम
पश्चिम उत्तर प्रदेश की बुलंदशहर, बिजनौर, मेरठ, सहारनपुर, नगीना और अलीगढ़ जैसी सीटों पर बीएसपी चुनाव में उतर सकती है। दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के खाते में इटावा, लखनऊ, मुरादाबाद, गोरखपुर, इलाहाबाद, कानपुर और आजमगढ़ की सीटें जा सकती हैं। बागपत और मथुरा की सीटों को आरएलडी के मुखिया अजित सिंह और उनके बेटे जयंत चौधरी के लिए छोड़ा गया है। यदि आरएलडी ने इस प्रस्ताव को ठुकराया और कांग्रेस के साथ गई तो इन सीटों पर भी एसपी-बीएसपी उम्मीदवार उतार सकते हैं। 

अखिलेश बोले, कम सीटों पर भी समझौते को था तैयार 
इस गठबंधन के लिए समाजवादी पार्टी कितनी तैयार थी, इसका अंदाजा अखिलेश यादव के इस बयान से भी लगाया जा सकता है कि यदि कम सीटें मिलतीं, तब भी हम गठबंधन करते। हम आभारी हैं कि मायावती ने दोनों दलों के बीच बराबर सीटों के बंटवारे पर सहमति जताई। 

यूं बनाया है एसपी और बीएसपी ने समीकरण 
बीएसपी ने ऐसी सीटों पर अपनी दावेदारी की है, जहां दलित और मुस्लिम गठजोड़ अपना कमाल दिखा सकता है। समाजवादी पार्टी उन सीटों पर उतर सकती है, जहां मुस्लिम और यादव आबादी अधिक है।