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मुंबई के अंधेरी इलाके में जेबी नगर के ऋद्धि-सिद्धि गणेश मंडल ने एक नई पहल की है। समानता का अधिकार और मानवता ही सबसे बड़ा धर्म की थीम पर किन्नरों के सम्मानजनक जीवन के लिए रोज 25 बार नाटक प्ले किया जा रहा है। नुक्कड़ की तरह डिजाइन इस 10 से 15 मिनट के नाटक को लगभग 25 हजार लोग रोज देख रहे हैं। ये प्ले गौरी सावंत के जीवन पर आधारित है जो खुद के ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट हैं। मंडल के आयोजक दिनेश चंद्रारकर के मुताबिक हर साल हमारे पंडाल की कोई ऐसी थीम होती है जो किसी ना किसी सोशल इशू पर आधारित होती है। इस बार हमने किन्नरों के बेहतर जीवन और सम्मान को थीम बनाया है। पंडाल में हमने इसके लिए देश के जाने-पहचाने किन्नरों के होर्डिंग्स भी लगाए हैं। हमारी थीम का उद्देश्य किन्नरों को समाज में समान जीवन और सम्मान दिलाने का है। जो प्ले है वो एक बरसात की रात का है जहां एक कपल को बारिश के कारण एक घर में शरण लेनी पड़ती है, जो एक किन्नर का घर है। वहां होने वाली बातचीत और दृश्य से हमने किन्नरों से जुड़ी भ्रांतियों को तोड़ने की कोशिश की है।