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वाराणसी। 
प्रवासी भारतीय दिवस कंन्वेंशन-2019 में मंगलवार की शाम अभिनेत्री से राजनेत्री बनीं हेमा मालिनी ने काशी में पहली बार गंगा के अवतरण की प्रस्तुति दी। उनके इस मनमोहक स्वरूप को देखकर दर्शक भी आश्चर्यचकित रह गए। कार्यक्रम में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी मंत्रमुग्ध हो गईं। उन्होंने अद्भुत, अकल्पनीय और अविश्वसनीय.. जैसे उपमाओं से हेमा मालिनी की प्रस्तुति को सराहा। हेमा मालिनी ने तकनीकी के जरिए बनाए गए भव्य पर्दे और मंच पर गंगा के अवतरण से लेकर सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलयुग में गंगा की वर्तमान स्थिति से लोगों का साक्षात्कार कराया। 
मंच पर हेमा की जोरदार एंट्री
क्षीरसागर में भगवान विष्णु भक्त भगीरथ की पुकार सुनकर विह्वल हो जाते हैं और गंगा को धरती पर जाने का आदेश देते हैं। तभी मां गंगा के रुप में हेमामालिनी का आगमन होता है। वेगवती गंगा अपने संपूर्ण तेज और आवेग के साथ धरती की ओर बढ़ती हैं। उनके वेग से संपूर्ण ब्रह्मांड में प्रलय की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। भगवान शिव सृष्टि की रक्षा के लिए गंगा को अपनी जटाओं में बांध लेते हैं। 
ब्रह्मा की विनती पर भगवान शिव गंगा को जटाओं से मुक्त करते हैं। इसके बाद वह भगीरथ के पुरखों को तारते हुए आगे बढ़ती हैं। समय के चक्र के साथ सतयुग, त्रेता और द्वापर के बाद कलयुग में गंगा की दयनीय दशा का मंचन बेहद मार्मिक रहा। ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है कि गंगा धरती को छोड़कर जाने लगती हैं, लेकिन भक्तों की पुकार सुनकर वह फिर रुक जाती हैं। वह कलयुग को श्राप देते हुए कहती हैं कि मैं फिर से निर्मल होकर कलकल बहूंगी।
सुषमा स्वराज बोलीं- आपकी प्रशंसा के लिए मेरे पास शब्द नहीं
हेमा मालिनी के 90 मिनट के नृत्य नाटक को देखने के बाद सुषमा स्वराज ने हेमा मालिनी से कहा कि आपके परफॉर्मेंस की प्रशंसा के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। मैं जीवन में पहली बार आपके इस परफॉर्मेंस के लिए फेमस टीवी शो से इन तीन शब्दों को लेकर इसका इस्तेमाल कर रही हूं- अदभुत, अविश्वसनीय और अकल्पनीय।