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लखनऊ 
समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच गठबंधन का ऐलान तो हो गया, लेकिन मायावती के लिए भी चुनौतियां कम नहीं हैं। उन्हें किसी नए सियासी शिगूफे का डर है। ईवीएम और राम जन्म मंदिर पर किसी नई पहल को लेकर उन्होंने अपनी आशंका जाहिर भी की। मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक-एक बात नाप-तौल कर कही। यह बात तो साफ है कि तीसरे मोर्चे में पीएम पद की दावेदारी के लिए मायावती को यूपी में ठीकठाक सीटें जीतनी हैं। 

साथ ही कांग्रेस के साथ दूरी और नजदीकी दोनों का संतुलन भी रखना है। यही वजह थी कि एक तरफ उन्होंने कांग्रेस पर तीखे हमले किए तो दूसरी तरफ यह भी कहा कि वह नहीं चाहतीं कि कांग्रेस अध्यक्ष अपनी सीटों के लिए यहां उलझें। लिहाजा उन्होंने अमेठी और रायबरेली की सीटें छोड़ दीं। 

दरअसल, यह इस गठबंधन की मजबूरी है। यह गठजोड़ बीजेपी के विरोध की जमीन पर है और किसी भी गैर बीजेपी सरकार की कल्पना कांग्रेस के बिना नहीं की जा सकती। लिहाजा कांग्रेस के साथ इस गठबंधन की लड़ाई कुछ कुछ इसी तरह नजर आती है कि गुड़ खाएं और गुलगुलों से परहेज।