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कोलकाता. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर कोलकाता में हैं. पीएम मोदी ने रविवार सुबह रामकृष्ण मिशन के मुख्यालय बेलूर मठ में ध्यान लगाया. प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को कोलकाता पहुंचे थे और रात उन्होंने मठ में ही बिताई थी. पीएम मोदी की मठ में ठहरने की मुख्य वजह रविवार को स्वामी विवेकानंद जयंती बताई जा रही है. गौरतलब है कि पीएम मोदी शनिवार शाम कोलकाता पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने पोर्ट ट्रस्ट की 150वीं सालगिरह के कार्यक्रम में हिस्सा लिया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा मैं पश्चिम बंगाल सरकार का आभारी हूं, जिन्होंने प्रोटोकॉल तोड़कर बेलूर मठ में रात बिताने का मौका दिया. उन्होंने कहा कि मेरा अतीत बेलूर मठ से जुड़ा है. बेलूर मठ में मुझे सिखाया गया था जनसेवा ही प्रभु सेवा है. पीएम मोदी ने कहा कि बेलूर मठ की धरती पर आना मेरे लिए तीर्थयात्रा करने जैसा है. उन्होंने कहा कि पिछली बार जब यहां आया था तो गुरुजी, स्वामी आत्मआस्थानंद जी के आशीर्वचन लेकर गया था. आज वो शारीरिक रूप से हमारे बीच विद्यमान नहीं हैं. लेकिन उनका काम, उनका दिखाया मार्ग, रामकृष्ण मिशन के रूप में सदा हमारा मार्ग प्रशस्त करता रहेगा. भारत सरकार ने रातों रात कोई कानून नहीं बनाया : पीएम मोदी बेलूर मठ में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा इस देश के युवाओं से भारत को ही नहीं दुनिया को भी बड़ी अपेक्षाएं हैं. नागरिकता कानून पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा, भारत सरकार ने रातों रात कोई कानून नहीं बनाया है. देश में इसको लेकर काफी चर्चा हुई, लेकिन इसको लेकर युवाओं में भ्रम फैलाया गया. इस कानून के मुताबिक किसी भी देश का कोई भी व्यक्ति जो भारत से आस्था रखता है वह भारत की नागरिक हो सकता है. पीएम मोदी ने कहा कि नागरिकता एक्ट किसी भी नागरिकता छीनता नहीं बल्कि नागरिकता देता है. उन्होंने कहा नागरिकता कानून को लेकर कुछ युवा गलतफहमी का शिकार हैं. युवाओं के मन में कुछ लोग भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं. पीएम मोदी ने कहा, हमने नागरिकता कानून का सरल किया. पीए मोदी ने कहा, मैं फिर कहूंगा, सिटिजनशिप एक्ट, नागरिकता लेने का नहीं, नागरिकता देने का कानून है और सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट, उस कानून में सिर्फ एक संशोधन है. उन्होंने कहा, इतनी स्पष्टता के बावजूद, कुछ लोग सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट को लेकर भ्रम फैला रहे हैं. मुझे खुशी है कि आज का युवा ही ऐसे लोगों का भ्रम भी दूर कर रहा है. उन्होंने कहा और तो और, पाकिस्तान में जिस तरह दूसरे धर्म के लोगों पर अत्याचार होता है, उसे लेकर भी दुनिया भर में आवाज हमारा युवा ही उठा रहा है. बेलूर मठ की स्थापना स्वामी विवेकानंद ने 1 मई 1897 में की थी बता दें कि हावड़ा जिले के बेलूर में स्थित इस मठ की स्थापना स्वामी विवेकानंद ने 1 मई 1897 में की थी. इस मठ को बनाने का उद्देश्य उन साधुओं-संन्यासियों को संगठित करना था जो रामकृष्ण परमहंस की शिक्षाओं में गहरी आस्था रखते थे. इन साधुओं और संन्यासियों का काम था कि वह रामकृष्ण परमहंस के उपदेशों को जनसाधारण तक पहुंचाए और गरीब, दुखी और कमजोर लोगों की नि:स्वार्थ भाग से सेवा कर सकें. इस मठ में स्वामी विवेकानंद और उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस की स्मृति संजो कर रखी गई है. प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर जताई थी खुशी गौरतलब है कि बेलूर मठ के स्वामी जी मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा, 'मैं काफी उत्साहित हूं कि आज और कल का दिन मैं बंगाल में बिताऊंगा. मुझे रामकृष्ण मिशन में समय व्यतीत करते हुए खुशी हो रही है वो भी तब जब हम स्वामी विवेकानंद की जयंती मना रहे हैं. बेलूर मठ हमेशा से ही मेरे लिए काफी खास रहा है.'इसके बाद उन्होंने एक और ट्वीट कर रामकृष्ण मिशन के पूर्व अध्यक्ष स्वामी आत्मास्थानंद जी महाराज को याद किया. उन्होंने कहा-एक शून्यता होगी. जिस व्यक्ति ने मुझे 'जन सेवा ही प्रभु सेवा' की सीख दी, वे स्वामी आत्मास्थानंद जी महाराज वहां नहीं होंगे. रामकृष्ण मिशन में उनकी उपस्थिति न होना अकल्पनीय है. आज पूरा देश मना रहा है स्वामी विवेकानंद की जयंती स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 में हुआ था. स्वामी विवेकानन्द वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे. उनका वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था. उन्होंने अमेरिका स्थित शिकागो में सन् 1893 में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था.