राष्ट्र

चांद के बेहद करीब पहुंचा चंद्रयान-2, सोमवार को अलग होगा लैंडर विक्रम

नई दिल्ली। भारत का स्पेस मिशन (चंद्रयान-2) लगातार अपने लक्ष्य ओर बढ़ रहा है और हर रोज अपने अभियान को पूरा करने की दिशा में सफलतापूर्वक कदम बढ़ा रहा है। रविवार को शाम 06 बजकर 21 मिनट पर चंद्रयान-2 चंद्रमा की पांचवी कक्षा में प्रवेश कर गया है। कक्षा बदलने में इसे 52 सेकंड का वक्त लगा। इस कक्षा की चांद से न्यूनतम दूरी मात्र 109 किलोमीटर है। इसरो ने जानकारी दी है कि सफलतापर्वक सामान्य परिस्थितियों में यह महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया गया है। अब सोमवार को ऑर्बिटर से लैंडर विक्रम को अलग किया जाएगा। ISRO के मुताबिक लैंडर विक्रम के चांद पर उतरने से पहले अभी वह चंद्रमा की दो और कक्षाओं में प्रवेश करेगा। इसके बाद 7 सितंबर को विक्रम की चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करवाई जाएगी। बता दें कि चंद्रयान-2 लगातार चंद्राम की अद्भुत तस्वीरें भेज रहा है। 2 सितंबर को लैंडर विक्रम कॉम्पजिट बॉडी से अलग होगा। अभी के अनुमान के मुताबिक 7 सितंबर को दिन में 1:55 पर यह चांद की सतह पर उतरेगा। बहुत तेज होगा लैंडर विक्रम का सेपरेशन इसरो के चेयरमैन सिवन के मुताबिक 2 सितंबर को होने वाला लैंडर सेपरेशन काफी तेज होगा। यह उतनी ही गति से होगा जितनी गति से कोई सैटलाइट लॉन्च वीइकल से अलग होता है। इंटिग्रेटेड स्पेसक्राफ्ट को अलग-अलग करने के लिए जरूरी कक्षा असोमवार को स्थिर करने के बाद इसरो कमांड देगा जो ऑनबोर्ड सिस्टम अपने आप एग्जक्यूट करेगा। कैसे अलग होगा लैंडर ISRO के एक वैज्ञानिक ने बताया कि ऑसबिटर के ऊपर लगे फ्यूल के एक्सटेंशन में लैंडर और रोवर रखे गए हैं जो कि क्लैंप और बोल्ट से अटैच हैं। उन्होंने बताया कि एक स्प्रिंग के दो तरफ लैंडर और रोवर जुड़े हुए हैं। जिस बोल्ट से स्प्रिंग लगा हुआ है उसे कमांड के जरिए काट दिया जाएगा और लैंडर अलग हो जाएगा। सॉफ्ट लैंडिंग 7 सितंबर को लैंडर चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा और इसके 4 घंटे बाद रोवर प्रज्ञान बाहर आएगा जो कि चंद्रमा की सतह पर लगभग 500 मीटर की दूरी तय करेगा। लैंडर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा। सॉफ्ट लैंडिंग के बाद अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत का नाम भी इस उपलब्धि में शामिल हो जाएगा। चंद्रयान-2 को 22 जुलाई को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया गया था।
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पाकिस्तान ने कल कुलभूषण जाधव को काउंसलर एक्सेस देने की पेशकश की

नई दिल्ली। भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान कल यानी 2 सितंबर से कुलभूषण जाधव को काउंसलर एक्सेस मुहैया कराएगा। पाकिस्तान के फॉरेन अफेयर्स मिनिस्ट्री ने ट्वीट कर ये जानकारी दी है। इससे पहले जुलाई में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने बिना शर्त जाधव को काउंसलर एक्सेस देने का फैसला सुनाया था। भारत ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसने पाकिस्तान से कुलभूषण जाधव तक 'तत्काल, प्रभावी और अबाधित राजनयिक पहुंच देने को कहा है और राजनयिक माध्यमों से पड़ोसी देश से संपर्क में है। उल्लेखनीय है कि 49 वर्षीय जाधव को पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने घुसपैठ और आतंकवाद के झूठे आरोप में अप्रैल, 2017 को फांसी की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ भारत अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में गया ताकि उनकी फांसी पर रोक लगाई जा सके। पहले पाक ने रखी थीं कुछ शर्तें पाकिस्तान विदेश कार्यालय ने विगत एक अगस्त को कहा था कि कुलभूषण जाधव को काउंसलर एक्सेस अगले दिन दे दिया जाएगा। लेकिन दो अगस्त को दोपहर तीन बजे होने वाली बैठक भारत और पाकिस्तान के बीच मतभेदों के चलते हो ही नहीं सकी थी। तब पाकिस्तान ने भारत के सामने कुछ शर्ते रख दी थीं जिसमें पाकिस्तानी अधिकारियों की मौजूदगी में जाधव को काउंसलर एक्सेस देने की बात कही गई थी, जो भारत को मंजूर नहीं थी। क्या है काउंसलर एक्सेस? VCCR के आर्टिकल 36 (1) (बी) में कहा गया है कि अगर किसी देश (A) के नागरिक को किसी दूसरे देश (B) में गिरफ्तार किया जाता है, तो देश B को बिना देरी किए वीसीसीआर के अधिकारों के तहत उस देश A को जानकारी देनी होगी। इसमें देश A के अधिकारियों को जानकारी देना और उनसे मदद लेना शामिल है। देश B को देश A के दूतावास या उच्चायोग को ये जानकारी देना जरूरी है कि उन्होंने उस देश के नागरिक को गिरफ्तार/हिरासत में लिया है। आर्टिकल 36(1)(सी) में कहा गया है कि देश A के अधिकारियों को उस देश में सफर करने का अधिकार है जिस देश में गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया है। गिरफ्तार व्यक्ति को कानूनी सहायता देने का भी प्रावधान है।
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मालदीव बैठक में भी पाक के मुह पर तमाचा

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद बौखलाया पाकिस्तान हर जगह अब कश्मीर के मसले को उठा रहा है। मालदीव में दक्षिण एशियाई देशों की संसदों के अध्यक्षों के शिखर सम्मेलन के दौरान भी पाकिस्तान ने इस मसले को उठाया, जिसका भारत की तरफ से भी जवाब दिया गया और दोनों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। राज्य सभा के उप सभापति हरिवंश ने पाकिस्तान नेशनल असेंबली के उपाध्यक्ष द्वारा मालदीव संसद में कश्मीर मुद्दा उठाने पर कहा, 'हम इस मंच पर भारत के आंतरिक मामले को उठाने पर कड़ी आपत्ति जताते हैं। क्षेत्रीय शांति के लिए पाकिस्तान को जरूरत है कि वो सीमा पार आतंकवाद को समाप्त करे। आतंकवाद मानवता पर सबसे बड़ा खतरा है।' मालदीव 'अचीविंग द सस्टेनेबल गोल्स' (SDGs) पर चौथे दक्षिण एशियाई वक्ताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। भारत के प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्य सभा के उपाध्यक्ष हरिवंश नारायण सिंह बैठक में भाग लेने के लिए माले में हैं। मालदीव की संसद में शिखर सम्मेलन पर चर्चा चल रही थी तभी पाकिस्तान के प्रतिनिधि कासिम सूरी ने सदन के समक्ष कश्मीर का मुद्दा उठाया। कासिम सूरी ने कहा कि हम कश्मीरियों के उत्पीड़न को नजरअंदाज नहीं कर सकते। भारत ने पाकिस्तान के इस कदम पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। हरीवंश ने कहा, 'हम इस मंच पर भारत के आंतरिक मामले को उठाने पर कड़ी आपत्ति जताते हैं। हम मंच के राजनीतिकरण को भी अस्वीकार करते हैं। भारत ने इस बात पर भी जोर दिया कि शिखर सम्मेलन सतत विकास लक्ष्यों पर चर्चा करने के लिए है, इसलिए पाकिस्तान के प्रतिनिधि द्वारा की गई टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटा दिया जाना चाहिए।
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ग्वालियर एयरपोर्ट पर बाल-बाल बचे बीजेपी सांसद और भोजपुरी स्टार रवि किशन

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के गोरखपुर से सांसद और भोजपुरी के सुपर स्टार रवि किशन रविवार की शाम करीब पौने चार बजे उस वक्त बाल-बाल बचे जब मध्य प्रदेश के ग्वालियर एयरपोर्ट से उनका विमान दिल्ली के लिए उड़ान भरा था। विमान उड़ान भरते वक्त अचानक इंजन में गड़बड़ी आ गई और विमान हवा में लहराने लगे जिसके बाद विमान को एयरपोर्ट पर आपात लैंड कराया गया। इसी विमान में सवार थे रवि किशन। फोन पर बात करते हुए रवि किशन ने कहा कि भगवान की कृपा से हम बच गए नहीं तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था। उन्होंने कहा कि विमान के इंजन में खराबी आ गई थी। अभी भी विमान ग्वालियर एयरपोर्ट पर ही खड़ा है। उन्होंने आगे कहा कि वे ग्वालियर में एक कार्यक्रम के सिलसिल में विमान से गए थे। रवि किशन गोरखपुर से बीजेपी टिकट पर पहली बार लोकसभा पहुंचे हैं।
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बिना सब्सिडी वाला एलपीजी सिलेंडर हुआ महंगा

नई दिल्ली। विमान ईंधन के मूल्य में रविवार को एक प्रतिशत की कमी की गई, जिससे उसका दाम चार माह के निचले स्तर पर आ गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कीमत में नरमी के चलते देश में विमान ईंधन की दाम में यह कमी की गई है। पेट्रोलियम कंपनियों की अधिसूचना के मुताबिक बिना सब्सिडी वाली रसोई गैस (एलपीजी) प्रति सिलेंडर 15.5 रुपये महंगी हो गई। दिल्ली में विमान टर्बाइन ईंधन (एटीएफ) 596.62 प्रति किलोलीटर या 0.9 प्रतिशत सस्ता होकर 62,698.86 प्रति किलोलीटर हो गया। लगातार तीसरे महीने विमान ईंधन के दाम में यह कटौती हुई है। बिना सब्सिडी वाला सिलेंडर 15.5 रुपए महंगा होकर 590 रुपये का हो गया है। किरोसिन की कीमत में लगातार 26वें महीने प्रति लीटर 25 पैसे की वृद्धि जारी रही।
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अर्थव्यवस्था पर मनमोहन सिंह के बयान का निर्मला सीतारमण ने इस तरह दिया जवाब

नई दिल्ली। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तरफ से रविवार की सुबह अर्थव्यवस्था को लेकर दिए बयान पर सीधे किसी तरह की प्रतिक्रिया देने से साफ इनकार कर दिया। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, पत्रकारों ने बात करते हुए वित्तमंत्री ने कहा- “क्या मनमोहन सिंह ने कहा कि बदले की राजनीति को छोड़े और अर्थव्यवस्था को मानव-रचित संकट से बाहर निकलने के लिए सही सोच-समझ वाले लोगों से संपर्क करें? क्या उन्होंने ऐसा कहा है? ठीक है, आपको धन्यवाद, मैं उनके इस बयान को लेती हूं। यही मेरा जवाब है।” जब निर्मला सीतारमण से यह पूछा गया कि क्या हम आर्थिक मंदी को देख रहे हैं, क्या सरकार इसे मान रही है? इसके जवाब में निर्मला ने कहा- “मैं इंडस्ट्रीज के साथ बैठक कर रही हूं, उनकी राय ले रही है। उनका सुझाव ले रही हूं कि आखिर वो क्या चाहते हैं और क्या सरकार से उम्मीद कर रहे हैं। मैं उन्हें उसका जवाब दे रही हूं। मैं पहले ही ऐसा दो बार कर चुकी हूं। मैं और ऐसा कई बार करूंगी।” गौरतलब है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर घटकर पांच प्रतिशत पर आने के बीच पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आर्थिक हालात बेहद चिंताजनक हैं और यह नरमी मोदी सरकार के तमाम कुप्रबंधनों का परिणाम है। पूर्व प्रधानमंत्री ने एक बयान में कहा कि पहली तिमाही में 5 फीसदी की जीडीपी वृद्धि दर दर्शाती है कि हम लंबे समय तक बने रहने वाली आर्थिक नरमी के दौर में हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी से बढ़ने की क्षमता है। सिंह ने कहा, ''भारत इसी दिशा में चलना जारी नहीं रख सकता। इसलिए मैं सरकार से अपील करता हूं कि वह प्रतिशोध की राजनीत को त्याग कर मानव निर्मित संकट से अर्थव्यवस्था को निकालने के लिए सुधी जनों की आवाज सुनें।'' सिंह ने कहा कि यह खासतौर पर परेशान करने वाला है कि विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि 0.6 फीसदी है। पूर्व प्रधानंमत्री ने कहा,''इससे यह स्पष्ट है कि हमारी अर्थव्यवस्था नोटबंदी और जल्दबाजी में जीएसटी लागू करने की गलती से अब भी उबर नहीं पायी है।'' उन्होंने कहा,''निवेशकों का भरोसा डगमगाया हुआ है। ये आर्थिक वसूली के आधार नहीं हैं।
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मोदी सरकार के कुप्रबंधन की वजह से है आर्थिक सुस्ती, हालात गंभीर रूप से चिंताजनक : मनमोहन सिंह

नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री और कांग्रेस नेता डॉ. मनमोहन सिंह ने देश में आर्थिक सुस्ती के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी से बढ़ने की क्षमता है लेकिन मोदी सरकार के कुप्रबंधन से हम आर्थिक सुस्ती के दौर से गुजर रहे हैं। मनमोहन सिंह ने कहा, 'मैं सरकार से अपील करता हूं कि वह प्रतिशोध की राजनीत को त्याग कर मानव निर्मित संकट से अर्थव्यवस्था को निकालने के लिए सुधी जनों की आवाज सुने'। डॉ. सिह ने कहा, 'मोदी सरकार की नीतियों के परिणामस्वरूप व्यापक पैमाने पर रोजगार विहीन विकास हो रहा है। आर्थिक हालात गंभीर रूप से चिंताजनक हैं। पिछली तिमाही में 5 फीसदी की जीडीपी वृद्धि दर दर्शाती है कि हम लंबे समय तक बने रहने वाली आर्थिक नरमी के दौर में हैं।' आर्थिक हालात पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा, ' अर्थव्यवस्था कीहालत काफी चिंताजनक है। पिछली तिमाही में विकास दर 5% यह बताता है कि इकॉनमी में मंदी चल रही है। नोटबंदी जैसे ब्लंडर और जल्दबाजी में लागू किए गए जीएसटी की वजह से हमारी इकॉनमी को जो नुकसान हुआ है, उससे हम अभी उबर नहीं पाए हैं।' मनमोहन सिंह ने सरकार पर जमकर हमला करते हुए कहा, 'पिछली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट के के जो आंकड़े आए हैं वो चिंताजनक हैं। यह सब सरकार के कुप्रबंधन की वजह से हुआ है। टैक्स का आतंकवाद अभी भी जारी है। मोदी सरकार की नितियों की वजह से नौकरियां मिलने की बजाय जा रही हैं। ऑटो सेक्टर में लाखों नौकरियां गई हैं। ग्रामीण भारत में हालात और भी खराब हैं। हमारे किसानों को सही कीमतें नहीं मिल रही हैं। ग्रामीण आय भी घट रही है। संवैधानिक संस्थानों पर आक्रमण हो रहा है और उनकी स्वायत्तता खत्म की जा रही है। इसके अलावा बजट में सरकार की घोषणाओं और फिर कदम पीछे खींचने से अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों में अविश्वास पैदा हुआ है।'
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आरिफ मोहम्मद खान बने केरल के राज्यपाल, कोशियारी महाराष्ट्र के कलराज राजस्थान पहुचे

नई दिल्ली राजीव गांधी सरकार में मंत्री रहे आरिफ मोहम्मद खान को केरल का नया गवर्नर नियुक्त किया गया है। आरिफ को प्रगतिशील मुस्लिम चेहरे के तौर पर जाना जाता है। तीन तलाक जैसे अहम मसलों पर उन्होंने मुखरता से अपनी राय रखी थी और इसे मुस्लिम महिलाओं के लिए अच्छा फैसला बताया था। आरिफ मोहम्मद खान लंबे समय से सक्रिय राजनीति से दूर थे। 1984 में शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को संसद द्वारा कानून बनाकर पलटे जाने के विरोध में उन्होंने केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। तेलंगाना, महाराष्ट्र, हिमाचल, राजस्थान में भी नए राज्यपाल राष्ट्रपति भवन की ओर से रविवार को जारी आदेश के मुताबिक आरिफ मोहम्मद खान के अलावा तेलंगाना में तमिलसाई सुंदरराजन को गवर्नर के तौर पर भेजा गया है। इसके अलावा उत्तराखंड के सीनियर बीजेपी नेता रहे भगत सिंह कोश्यारी को महाराष्ट्र और बंडारू दत्तात्रेय को हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया है। अब तक हिमाचल के गवर्नर रहे कलराज मिश्र को राजस्थान भेजा गया है। आरिफ मोहम्मद खान बोले, सौभाग्य है भारत में पैदा होना गवर्नर की जिम्मेदारी मिलने पर आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे उस राज्य में सेवा का मौका मिलेगा, जिसे भगवान का अपना देश कहा जाता है। उन्होंने कहा कि यह मेरा भाग्य है कि मैं ऐसे देश में पैदा हुआ, जिसका कल्चर विविधतापूर्ण है। देश के उस हिस्से को जानने का यह मेरे लिए बेहतरीन अवसर है। आपको बता दें कि आरिफ ने वंदे मातरम का उर्दू में अनुवाद भी किया है। यूपी के बुलंदशहर में जन्मे आरिफ केंद्रीय मंत्री रहते नागरिक उड्डयन से लेकर ऊर्जा तक कई मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली थी। खान केरल के गवर्नर पूर्व चीफ जस्टिस पी. सदाशिवम का स्थान लेंगे। उनका भी कार्यकाल समाप्त हो रहा है। वहीं, तमिलनाडु की पूर्व बीजेपी अध्यक्ष 58 वर्षीय सुंदरराजन पार्टी की राष्ट्रीय सचिव भी रही हैं। कोश्यारी महाराष्ट्र के मौजूदा गवर्नर विद्या सागर राव की जगह लेंगे जिनका पांच साल का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। दत्तात्रेय ने पीएम, गृह मंत्री को शुक्रिया कहा दत्तात्रेय ने हिमाचल का गवर्नर नियुक्त किए जाने पर प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को धन्यवाद दिया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हिमाचल के गवर्नर के तौर पर जो जिम्मेदारी दी गई है, वह संविधान के हिसाब से अपने दायित्व को निभाएंगे।
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अयोध्या केस: सुप्रीम कोर्ट में 10 दमदार दलीलें, जिन पर टिकीं हिंदू पक्ष की उम्मीदें

नई दिल्ली। 70 साल से अयोध्या केस में चल रही कानूनी लड़ाई अब आखिरी पड़ाव पर पहुंचती दिख रही है। 6 अगस्त से सुप्रीम कोर्ट में हो रही रोजाना सुनवाई के चलते हिंदू पक्ष की दलीलें पूरी हो चुकी हैं। 16 दिन की सुनवाई में हिंदू पक्ष (रामलला विराजमान और निर्मोही अखाड़ा) के वकीलों ने अपनी बात को पूरी प्रमाणिकता के साथ रखने की भरसक कोशिश की है। सुनवाई के दौरान दिलचस्प दलीलें भी रखी गईं। कभी रामलला को नाबालिग बताया गया तो कभी मालिकाना हक के सबूत डकैती में लुटने की बात भी सामने आई। सुप्रीम कोर्ट ने भी राम के वंशजों के बारे में पूछकर हलचल मचा दी। अब सबकी नजरें सोमवार से शुरू होने वाली मुस्लिम पक्ष की दलीलों पर हैं कि वे किस तरह से अपने दावे को सामने रखेंगे। ऐसे में आइए जानते हैं कि देश के सबसे बड़े मुकदमे राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद की अबतक हुई सुनवाई में हिंदू पक्ष ने कौन सी दमदार दलीलें सुप्रीम कोर्ट में रखी हैं। 1. 1949 से नमाज नहीं, मुस्लिम पक्ष का दावा नहीं बनता सुनवाई के पहले दिन ही हिंदू पक्ष ने यह दलील रखी। निर्मोही अखाड़े के वकील सुशील जैन ने कहा कि विवादित भूमि पर 1949 के बाद से नमाज नहीं हुई इसलिए मुस्लिम पक्ष का वहां दावा ही नहीं बनता है। उन्होंने कहा कि जहां नमाज नहीं अदा की जाती है, वह स्थान मस्जिद नहीं मानी जा सकती है। 2. डकैती में लुट गए सबूत मालिकाना हक का दावा कर रहे निर्मोही अखाड़े से कोर्ट ने पूछा कि क्या आपके पास कुर्की से पहले का राम जन्मस्थान के कब्जे का मौखिक या रेवेन्यू रिकॉर्ड है? जवाब में निर्मोही अखाड़े की ओर से कहा गया कि 1982 में एक डकैती हुई थी, जिसमें सारे रेकॉर्ड चले गए। जस्टिस बोबड़े ने पूछा कि जिस तरह रामजन्मभूमि का विवाद कोर्ट के सामने आया है क्या दुनिया भर में किसी धार्मिक स्थान को लेकर दो समुदायों का कोई सवाल या विवाद कभी भी किसी अदालत में आया है? कोर्ट ने पूछा कि क्या जीसस क्राइस्ट बेथलहम में पैदा हुए थे, ऐसा सवाल कभी कोर्ट में आया क्या? इस पर रामलला के वकील परासरन ने कहा कि इस बारे में जानकारी नहीं है, पता करना पड़ेगा। 3. जन्मस्थान को इंसान माना जाए? वकील बोले- हां तीसरे दिन सुप्रीम कोर्ट ने राम लला विराजमान के वकील से पूछा कि देवता के जन्मस्थान को मामले में कानूनी व्यक्ति के तौर पर माना जा सकता है? क्या जन्मस्थान वादी हो सकता है? राम लला के वकील परासरन ने कहा कि जन्मस्थली भी कानूनी व्यक्ति की तरह है, वह वादी हो सकता है। यहां परासन ने गंगा नदी, सूरज का जिक्र किया, जिन्हें कानूनी व्यक्ति होने का दर्जा प्राप्त है। 4. राम के वंशज अयोध्या या दुनिया में हैं? 9 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने रामलला के वकील से पूछा कि क्या भगवान राम का कोई वशंज अयोध्या या फिर दुनिया में है? इसपर तब वकील ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। हालांकि इसके बाद जयपुर राजघराने ने खुद को राम का वशंज बताया था। इसके बाद कुछ और लोग इसी दावे के साथ सामने आए। 5. अंग्रेज भी बता गए अयोध्या में था मंदिर, तोड़कर बनी थी मस्जिद' छठे दिन राम लला के वकील वैद्यनाथन ने दलील दी कि पुराण और अलग-अलग समय के ब्रिटिश रेकॉर्ड राम और अयोध्या के बीच संबंधों की पुष्टि करते हैं और यह भी बताते हैं कि मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई गई। ब्रिटिश सर्वेयर एम. मार्टिन और जोसेफ टिफेंथलर ने भी कहा था कि लोगों का विश्वास था कि अयोध्या राम की जन्मस्थली है। इतना ही नहीं, यहां से सवाल भी उठा कि मंदिर कब तोड़ा गया। यहां बाबर और औरंगजेब दोनों का नाम आया। 6. सड़क पर भी नमाज पढ़ी जाती है, इससे वह मस्जिद नहीं हो जाएगी सातवें दिन हिंदू पक्ष ने आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) का जिक्र करके कहा कि उसमें साफ बताया गया है कि नीचे विशाल मंदिर का ढांचा था। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया था कि मस्जिद के नीचे जो ढांचा था वह धार्मिक स्ट्रक्चर ही था, इसे साबित करें। इसपर वैद्यनाथन ने कहा कि खुदाई में जो खंभे मिले थे उसमें राम के बाल स्वरूप की तस्वीर दिखती है। साथ ही खंभों में शिव तांडव और भगवान कृष्ण की भी तस्वीर है। मस्जिद में मानव और जीव की मूर्तियां नहीं होतीं। खंभों और छतों पर तस्वीर मस्जिदों में नहीं होती। तस्वीर मंदिर में होती है और ये हिंदू परंपरा के हिसाब से हैं। ये इस्लाम के खिलाफ है। सड़कों पर भी नमाज पढ़ी जाती है, इसका मतलब यह नहीं है कि वह मस्जिद हो जाएगी और उनको मालिकाना हक मिल जाएगा। जो भी स्ट्रक्चर था वह कभी भी मस्जिद नहीं माना जा सकता क्योंकि वह मंदिर के स्ट्रक्चर पर था। जो तस्वीर है वह इस्लामिक आस्था और विश्वास के विपरीत है। कहा कि अयोध्या में मौजूद शिला पट्ट पर मगरमच्छ, कछुए की तस्वीरों का जिक्र है। इन चीजों का इस्लाम से कोई ताल्लुक नहीं है। मोहम्मद हाशिम ने बयान दिया था कि जिस तरह से मुसलमानों के लिए मक्का है, उसी तरह से हिंदुओं के लिए अयोध्या का महत्व है। एक मुस्लिम गवाह हसमतुल्ला अंसारी का बयान है कि अयोध्या राम के जन्म के कारण पवित्र मानी गई है। वहीं मोहम्मद कासिम अंसारी का बयान है जिसमें उन्होंने कहा था कि ये सही है कि बाबरी मस्जिद को हिंदू जन्मभूमि कहते थे। 8. नाबालिग हैं रामलला सुनवाई के 9वें दिन रामलला विराजमान के वकील सी.एस वैद्यनाथन तर्क रख रहे थे। उन्होंने मंदिर के पक्ष में दलील दी कि अयोध्या के भगवान रामलला नाबालिग हैं। नाबालिग की संपत्ति को न तो बेचा जा सकता है और न ही छीना जा सकता है। 9. पूजा और चढ़ावे पर निर्मोही अखाड़े ने मांगा अधिकार 12वें दिन निर्मोही अखाड़े के वकील सुशील कुमार जैन ने दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि हम देव स्थान का मैनेजमेंट करते हैं और पूजा का अधिकार चाहते हैं। जन्मस्थान पर अधिकार न तो देवता के नेक्स्ट फ्रेंड को दिया जा सकता है न ही पुजारी को। यह केवल जन्मस्थान का मैनेजमेंट करने वाले को दिया जा सकता है और निर्मोही अखाड़ा जन्मस्थान का मैनेजमेंट देखता है। 10. बेटे कुश ने बनवाया था राम का मंदिर, मस्जिद से बाबर का लेना देना नहीं' 14वें दिन की सुनवाई के दौरान हिंदू पक्षकार के वकील ने कहा कि बाबरनामा में कहीं भी जिक्र नहीं है कि मीर बाकी ने मस्जिद बनावाई थी, मीर बाकी नामक किसी शख्स का जिक्र नहीं है। दरअसल, औरंगजेब ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनवाई। गौरतलब है कि मुस्लिम पक्षकार की ये दलील है कि मस्जिद मीर बाकी ने बनवाई थी।
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बैंकों का महाविलय, तकनीक और एचआर प्रबंधन का एकीकरण सबसे बड़ी चुनौती

नई दिल्ली। शुक्रवार को सरकार ने 10 सरकारी बैंकों के महाविलय का ऐलान किया। सरकार का कहना है कि नेक्स्ट जनरेशन के हिसाब से बैंकों को हाइटेक करने के लिए यह कदम उठाया गया है। लेकिन मर्जर के काम में लगे कर्मचारियों की मानें तो इस काम में बहुत सारी चुनौतियां हैं। सबसे बड़ी चुनौती तकनीक के एकीकरण और एचआर को लेकर है। मुश्किल है तकनीक का विलय इस महाविलय में सबसे आसान बैलेंसशीट को कंबाइन करना है। इसके बाद जमा धन को इकट्ठा करना और एटीएम नेटवर्क का विलय करना भी अपेक्षाकृत आसान है। जानकारों का कहना है कि दो आईटी प्लैटफॉर्म पर काम करने वाले नेटवर्क का मर्जर करके एक करना काफी मुश्किल काम है। इससे आसान तो नए नेटवर्क का सेटअप करना है। हालांकि सरकार ने यह ध्यान रखने की कोशिश की है कि कॉमन आईटी प्लैटफॉर्म वाले बैंकों का ही आपस में मर्जर किया जाए। कर्मचारी और ग्राहकों की समस्याएं असोसिएट बैंकों के विलय के समय पर अरुंधति भट्टाचार्य स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की चेयरमैन थीं। उनके मुताबिक विलय होने वाले बैंक एसबीआई से जुड़े हुए थे लेकिन सबका अपना कल्चर था और इसमें 242 तरह की तकनीक का इस्तेमाल होता था। इन सबका मर्जर होना था। भट्टाचार्य ने बताया, 'हमने कर्मचारियों की समस्या का समाधान करने के लिए एक पोर्टल बनाया था और एक दिन में लगभग 200 सवाल पूछे जाते थे। बहुत जरूरी है कि ग्राहकों से बात की जाए ताकि वे अपने मन के डर को बता सकें।' उन्होंने आगे कहा कि बैंकों के विलय का फायदा दिखने में दो साल का समय लग सकता है। संयोग से तकनीक के नजिरए से भी यह बैंकों के लिए एक मौका है कि इससे बड़े आईटी निवेश के दरवाजे खुलेंगे। इस क्षेत्र में ये सरकारी बैंक अकसर पीछे रह जाते थे। इससे पहले बैंक ऑफ बड़ौदा के मैनेजिंग डायरेक्टर पीएस जय कुमार कह चुके हैं कि बैंकों के तकनीकी एकीकरण में 12 से 18 महीने लग जाएंगे। सभी बैंक फिनाकल (इन्फोसिस का कोर बैंकिंग प्रॉडक्ट) का इस्तेमाल करते हैं लेकिन सभी अलग वर्जन के हैं। हाल में होने वाले 10 बैंकों के विलय में बड़ी चुनौती यह भी है कि बैंक की शाखाओं में से किन को चालू रखना है और किसे हटाना है या बंद करना है। जैसे कैनड़ा बैंक और सिंडिकेट बैंक दोनों ही कर्नाटक से हैं। दोनों का अपस में विलय होना है। कई जगह पर दोनों की शाखाएं आसपास हैं। ऐसे में यह चुनौती होगी कि इनको अपनी जगह से अलग शिफ्ट किया जाएगा या फिर एक को बंद किया जाएगा। अलग-अलग कार्य संस्कृति साल 2000 में बैंक ऑफ मदुरै और आईसीआईसीआई के विलय के समय बैंक में कार्यरत एक अधिकारी का कहना है कि सांस्कृतिक एकीकरण एक बड़ी चुनौती थी। उस समय बैंक ऑफ मदुरै में बड़ी संख्या में कर्मचारी थे। उनका कहना है कि विलय के समय बहुत सारी रणनीतियां बनाई जा सकती हैं लेकिन संस्कृति ऐसी चीज है जो रणनीतियों को खत्म कर देती है। सभी संगठनों की अलग संस्कृति होती है और उसे मिलाने में बहुत लंबा वक्त लगता है।
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