राष्ट्र

रूस को एक अरब डालर का कर्ज देगा भारत

व्लादिवोस्तोक (रूस): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि भारत रूस के सुदूर पूर्व क्षेत्र के विकास के लिये उसके साथ मिलकर काम करेगा। उन्होंने संसाधन से भरपूर क्षेत्र के विकास के लिये एक अरब डॉलर की कर्ज सुविधा देने की भी घोषणा की। पांचवें पूर्वी आर्थिक मंच (ईईएफ) के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारत और रूस के बीच दोस्ती केवल राजधानी शहरों में सरकारी बातचीत तक सीमित नहीं है बल्कि यह लोगों और करीबी व्यापारिक संबंधों की मित्रता के बारे में है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी में प्रधानमंत्री ने ‘सुदूर पूर्व में कार्य करो’ (एक्ट फार ईस्ट) की नीति भी पेश की। रूस के सुदूर पूर्व क्षेत्र के साथ गतिविधियों को मजबूत बनाने के इरादे से यह नीति लायी गयी है। उन्होंने कहा, ‘रूस के सुदूर पूर्व क्षेत्र के विकास के लिये भारत एक अरब डॉलर की कर्ज सुविधा देगा। मेरी सरकार पूर्व की ओर कार्य करो (एक्ट ईस्ट) की नीति पर सक्रियता से काम कर रही है। यह हमारी आर्थिक कूटनीति को एक नया आयाम देगी।’ बुधवार को दो दिन की यात्रा पर यहां आये मोदी रूस के सुदूर पूर्व क्षेत्र की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। वह यहां पुतिन के साथ 20वें भारत-रूस सालाना शिखर सम्मेलन और पांचवें पूर्वी आर्थिक मंच की बैठक में भाग लेने के लिये आये हैं। मंच रूस के सुदूर पूर्व क्षेत्र में व्यापार के विकास और निवेश के अवसरों पर केंद्रित है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जापानी समकक्ष शिंजो आबे से मुलाकात की और दोनों नेताओं ने उस रणनीतिक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई, जहां चीन अपनी सैन्य ताकत दिखा रहा है। दोनों नेताओं ने ओसाका में जून में जी20 शिखर सम्मेलन के बाद अपनी इस दूसरी मुलाकात में व्यापार, संस्कृति और रक्षा समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग गहरा करने का संकल्प लिया। दो दिवसीय यात्रा पर रूस पहुंचे मोदी रूस के पूर्वी सुदूर क्षेत्र की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। मोदी ने ट्वीट किया, ‘व्लादिवोस्तोक में प्रधानमंत्री शिंजो आबो से मुलाकात करके खुशी हुई। हमने कई विषयों पर गहराई से बातचीत की। हमने विशेष रूप से हमारे देशों के बीच व्यापारिक एवं सांस्कृतिक संबंध और बेहतर करने पर वार्ता की। हम दोनों देश एक बेहतर ग्रह बनाने के लिए विभिन्न वैश्विक मंचों पर मिलकर काम कर रहे हैं।’
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ज्योतिरादित्य की राहुल जैसी हैसियत पाने की जंग

भोपालः मध्य प्रदेश कांग्रेस में संगठन की कमान संभालने को लेकर घमासान शुरू हो गया है। सूबे की राजनीति में ज्योतिरादित्य सिंधिया अब धीरे-धीरे अलग-थलग पड़ते जा रहे हैं। लेकिन अपनी अहमियत को कम होता देखा उनकी नजरें प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर लग गई हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ने अपना पद छोड़ने की पहले ही पेशकश कर चुके हैं, लेकिन कमलनाथ संगठन पर अपनी पकड़ को मजबूत बनाए रखने के लिए अपने करीबी मंत्री बाला बच्चन को प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनवाना चाहते हैं। चूंकि मुख्यमंत्री कमलनाथ अभी अध्यक्ष पद पर बने हुए हैं, इसलिए ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ दोनों ही नेताओं ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलकर अपनी-अपनी बातें रखी हैं। सूबे की राजनीति में धीरे-धीरे हाशिए पर होते जा रहे सिंधिया ने यूपीए चेयरपर्सन से मिलकर अपनी नाराजगी जताई है। लेकिन, कमलनाथ ने सोनिया गांधी को अध्यक्ष पद के लिए नए नेता के चुनाव का सुझाव दिया है। कांग्रेस नेतृत्व राज्य में दो पावर सेंटर बनाने का पक्षधर नहीं है। इसके पहले पार्टी ने सिंधिया को उत्तर प्रदेश में पश्चिमी हिस्से का प्रभार दिया था, जिसमें कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था और अब महाराष्ट्र चुनाव के लिए स्क्रीनिंग कमेटी का चेयरमैन बनाकर संतुष्ट करने का काम किया है। इस तरह से मुख्यमंत्री कमलनाथ के सामने उनका कद फिलहाल छोटा हो गया है। जहां पर उन्हें जिम्मेदारी दी गई, वहां पर पार्टी को करारी हार मिली। साथ ही सिंधिया खुद लोकसभा चुनाव हार गए हैं। अब संगठन पर पकड़ मजबूत करके फिर से वापसी चाहते हैं, इसलिए उनके समर्थक काफी हंगामा भी खड़ा कर रहे हैं। कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के बीच भी इस समय कोई खास तालमेल नहीं है। जिसकी वजह से सिंधिया सीएम की दौड़ में पिछड़ गए थे। लोकसभा चुनाव हारने और राज्य में अपनी दखल कम होती देख फिलहाल उन्होंने खुद को पीछे कर अपने करीबी मंत्री गोविंद राजपूत और राम निवास रावत का नाम आगे बढ़ाए हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ काफी मंझे हुए राजनेता हैं। राज्य में संगठन की कमान कमलनाथ को मिलने के बाद ही कांग्रेस की ताकत में बढ़ोतरी हुई, जिसके बाद पिछले 15 साल से राज्य की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी की सरकार को बाहर किया जा सका। ऐसा देखा जा रहा है कि लोकसभा चुनावों में मिली हार के बाद से कांग्रेस में काफी उठा-पटक चल रही है। लगभग सभी राज्यों में कांग्रेस में काफ हलचल देखी जा रही है। हरियाणा में कांग्रेस नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा भी पार्टी से नाराज बताए जा रहे हैं। इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष की नाक के नीचे दिल्ली में संगठन की कमान संभालने के लिए काफी खींचतान चल रही है। वहां पर भी कई नेता दावेदार बताए जा रहे हैं, लेकिन कोई भी इस बात के लिए आश्वस्त नहीं कर सकता है कि उसको अध्यक्ष बना दिए जाने के बाद कांग्रेस के अंदर जान आ जाएगी। फिलहाल, कांग्रेस नेतृत्व इस बात को लेकर ज्यादा चिंतित होगा कि आने वाले समय में जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। उन राज्यों पर ज्यादा फोकस किया जाए। लेकिन राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली की समस्याएं भी कांग्रेस नेतृत्व को चिंता में डालती जा रही हैं।
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1 अक्टूबर से घट जाएगा लोन पर ब्याज

देश के केंद्रीय बैंक आरबीआई ने लोन लेनेवालों के हक में बड़ा फैसला किया है। अब रिजर्व बैंक की तरफ से नीतिगत ब्याज दर में कटौती होते ही होम लोन, ऑटो लोन, पर्सनल लोन, सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को मिलने वाले लोन आदि की ब्याज दर में भी तुरंत कटौती की जाएगी। इसका सीधा फायदा लोन लेने वालों को होगा। इससे पहले लोन देने वाले बैंक आरबीआई के रेट कट का फायदा ग्राहकों को पहुंचाने में आनाकानी करते रहे हैं। यही कारण है कि आरबीआई ने सारे बैंकों को सर्कुलर भेजकर स्पष्ट कहा है कि अब वे लोन की ब्याज दरें मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स आधारित लेंडिर रेट यानी एमसीएलआर के आधार पर तय नहीं करेंगे। इन्हीं तीन में से कोई एक सिस्टम लागू करें बैंक: RBI आरबीआई ने सर्कुलर के माध्यम से बैंकों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि उन्हें फ्लोटिंग रेट पर दिए जाने वाले सभी लोन को एमसीएलआर के बजाय इन तीन बाहरी बेंचमार्कों में से किसी एक से जोड़ना होगा। बैंकों को कहा गया है कि वे आरबीआई के रीपो रेट, तीन महीने या छह महीने के ट्रेजरी बिल यील्ड्स या फाइनैंशल बेंचमार्क्स इंडिया (एफबीआईएल ) द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले किसी बेंचमार्क रेट में से किसी एक का चुनाव कर सकते हैं। FBIL डेट मार्केट रेट्स प्रकाशित करता है। आरबीआई का सर्कुलर कहता है कि यह निर्देश हाउसिंग, ऑटो और पर्सनल लोन के साथ-साथ सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को मिलने वाले लोन पर लागू किया जाना है। रिजर्व बैंक ने गुरुवार को बयान में कहा कि ऐसा देखने को मिला है कि मौजूदा कोष की एमसीएलआर सिस्टम में नीतिगत दरों में बदलाव को बैंकों के लोन रेट तक पहुंचाना कई कारणों से संतोषजनक नहीं है। इसी के मद्देनजर रिजर्व बैंक ने पर्सनल, रिटेल और एमएसएमई को दिए जा रहे फ्लोटिंग रेट वाले लोन को 1 अक्टूबर, 2019 से तीन बाहरी मानको में किसी एक से जोड़ना अनिवार्य कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि बाहरी मानक आधारित ब्याज दर को तीन महीने में कम-से-कम एक बार नए सिरे से तय किया जाना जरूरी होगा। करीब एक दर्जन बैंक पहले ही अपने लोन रेट को रिजर्व बैंक के रीपो रेट से जोड़ चुके हैं। कितना फायदा? नई व्यवस्था से ग्राहकों को क्या फायदा होगा, इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है। देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने अपना होम लोन रेट रीपो रेट से जोड़ दिया है। इस कारण एसबीआई का होम लोन पर 8.05% की दर से ब्याज लगता है। यह एमसीएलआर आधारित होम लोन देने वाले बैंकों की ब्याज दर के मुकाबले बहुत कम है। चूंकि अभी आर्थिक सुस्ती का माहौल है, इसलिए पूरी संभावना है कि आरबीआई आगे भी रेट कट करेगा जिससे ग्राहकों को और ज्यादा फायदा मिलना तय है। हालांकि, यह जानना जरूरी है कि नई व्यवस्था का स्वतः लाभ सिर्फ नए लोन पर ही मिलेगा, पुराने लोन पर नई व्यवस्था लागू करने के लिए बैंक कन्वर्जन चार्ज ले रहे हैं। मसलन, एसबीआई ने कन्वर्जन चार्ज के रूप में लोन अमाउंट का 0.25% तय किया है।
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सोने को मुँह चिढ़ा रही चांदी

ट्रेड वॉर और सुस्त पड़ती ग्लोबल इकनॉमी के बीच गोल्ड और सिल्वर तेजी के नए रेकॉर्ड बना रहे हैं। गोल्ड के साथ सिल्वर भी तेजी की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। खास बात यह है कि इस बार रिटर्न के मामले में सिल्वर ने गोल्ड को पीछे छोड़ दिया है। सिल्वर इस साल अब तक 21 पर्सेंट रिटर्न दे चुका है, जबकि गोल्ड का रिटर्न रेट 20 पर्सेंट है। दिल्ली सर्राफा बाजार में बुधवार को सिल्वर पौने पांच साल की सबसे बड़ी एक दिनी तेजी के साथ 51 हजार रुपये प्रति किलोग्राम के पार निकल गया। सिल्वर 2,530 रुपये की छलांग लगाकर 51,600 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। एक दिन की तेजी के मामले में यह 2 दिसंबर 2014 के बाद की सबसे बड़ी तेजी है। गोल्ड भी 225 रुपये चमककर अब तक के रेकॉर्ड स्तर 40,420 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया। कमोडिटी गुरु वी चंद्रशेखर का कहना है कि ग्लोबल इकॉनमी में सुस्ती अब पुख्ता हो रही है। ऐसे में इंटरनैशनल इन्वेस्टर्स अब गोल्ड के साथ ही सिल्वर में भी निवेश कर रहे हैं। यही कारण है कि सिल्वर में तेजी का रुख लगातार बढ़ रहा है। कोई बड़ी बात नहीं होगी कि सिल्वर 55,000 रुपये प्रति किलो का स्तर छू ले। अगर ऐसा हुआ तो रिटर्न के मामले में सिल्वर का पर्सेंट बढ़कर 25 तक हो सकता है। इंटरनैशनल मार्केट में सिल्वर की धूम निवेश के मामले में इंटरनैशनल इन्वेस्टर्स का रुख अब गोल्ड के साथ सिल्वर की तरफ भी जा रहा है। एक्सपर्ट के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में गोल्ड काफी महंगा हो चुका है। इसके मुकाबले सिल्वर में उतनी तेजी नहीं आई है। गोल्ड के महंगा होने से सिल्वर की डिमांड बढ़ रही है। इसके अलावा इंडस्ट्री की बात करें तो फार्मा, बैटरी, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स सहित कम से कम 20 ऐसे बड़े सेक्टर हैं, जिनमें सिल्वर की डिमांड होती है। स्लोडाउन से उबरने के लिए भारत सहित कई देश राहत पैकेज के साथ बूस्टर डोज की घोषणाएं कर रहे हैं। यही कारण है कि इन्वेस्टर्स को लग रहा है कि आने वाले समय में सिल्वर की डिमांड बढ़ सकती है। वे अब चांदी में निवेश को तरजीह दे रहे हैं।
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जी एस टी में और कमी करके मंदी दूर की जाएगी

गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (GST) काउंसिल की 20 सितंबर को होने वाली अहम मीटिंग से पहले फाइनैंस मिनिस्ट्री ने राजस्व के आंकड़ों पर गौर करना शुरू कर दिया है। मिनिस्ट्री यह देख रही है कि फेस्टिव सीजन में डिमांड बढ़ाने के इरादे से अगर GST रेट में कमी की जाती है तो राजस्व पर उसका कितना असर पड़ेगा। मामले से वाकिफ दो अधिकारियों ने ईटी को बताया कि रेट में बदलाव पर गौर करने वाले पैनल की जल्द बैठक हो सकती है, जो कुछ राज्यों और इंडस्ट्री की ओर से दिए गए सुझावों पर विचार करेगा। इस पैनल में केंद्र और राज्यों के अधिकारी हैं। ऑटोमोबाइल्स, टायर, सीमेंट, एयर कंडिशनर और बड़े एलसीडी टीवी को अभी 28 प्रतिशत ब्रैकेट में रखा गया है। ऑटोमोबाइल्स पर सेस भी लगता है, जो गाड़ी के साइज पर निर्भर करता है। एक अधिकारी ने बताया, 'कई मुद्दों पर गहराई से विचार किया जा रहा है। आंकड़ों का भी विश्लेषण किया जा रहा है।' इकॉनमी को बूस्ट करने के कई सुझाव कुछ राज्यों ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर कहा है कि ऑटोमोबाइल्स और सीमेंट पर रेट घटाना चाहिए ताकि इकॉनमी को सहारा दिया जा सके। कुछ राज्यों की राय यह है कि रेट स्ट्रक्चर की ही समीक्षा की जरूरत है, मसलन 12 प्रतिशत और 18 प्रतिशत के स्लैब्स को मिलाकर एक कर दिया जाना चाहिए। काउंसिल की गोवा में होने वाली मीटिंग में अहम मुद्दा ऑटोमोबाइल्स पर रेट कट का होगा। हालांकि इस मसले पर राज्यों में मतभेद भी हैं। पंजाब ने रेट स्ट्रक्चर पर व्यापक तरीके से विचार करने पर बल दिया है और ऑटोमोबाइल्स सरीखे सेक्टरों के लिए रेट कट करने को कहा है। वहीं केरल ने ऐसे कदम का विरोध किया है। सबसे सुस्त रफ्तार में जीडीपी पश्चिम बंगाल ने भी ऑटो सेक्टर के लिए कदम उठाने की मांग की है, खासतौर से हाइब्रिड और BSVI गाड़ियों के लिए। BS VI में गाड़ियों के लिए एमिशन नॉर्म्स कड़े हैं। एक अधिकारी ने बताया कि केंद्र सभी विकल्पों पर विचार कर रहा है। आरबीआई ने अगस्त में रेपो रट 35 बेसिस पॉइंट्स कम किया था। एक्सपर्ट्स ने कहा कि अब इकॉनमी को सहारा देने के कदम उठाने का जिम्मा सरकार का है। भारत का जीडीपी जून तिमाही में 5 प्रतिशत बढ़ा था। यह पिछले छह वर्षों में इसकी सबसे सुस्त रफ्तार रही। वहीं प्राइवेट कंजम्पशन एक्सपेंडिचर घटकर 3.1 प्रतिशत पर आ गया, जो 18 तिमाहियों का निचला स्तर रहा। मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ में भी काफी कमी मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ महज 0.6 प्रतिशत रही। कंजम्पशन ने पिछले कुछ वर्षों में ग्रोथ को सहारा दिया था, लेकिन प्राइवेट इनवेस्टमेंट और एक्सपोर्ट्स में सुस्ती के बीच कोई भी रिवाइवल प्लान इस बात पर निर्भर है कि लोग फेस्टिव सीजन में खरीदारी के लिए मुट्ठी ढीली करते हैं या नहीं। एक्सपर्ट्स ने कहा कि GST रेट कट से जरूरी नहीं है कि राजस्व घटे क्योंकि इससे डिमांड में बढ़ोतरी भी होगी। पीडब्ल्यूसी में इनडायरेक्ट टैक्सेज के नैशनल लीडर प्रतीक जैन ने कहा, 'आर्थिक सुस्ती को देखते हुए ऑटो जैसे कुछ सेक्टरों के लिए रेट कट का आधार बनता है। ऐसा पहले भी किया गया है। हालांकि इसके साथ कुछ दूसरे उपाय भी करने होंगे।'
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आतंकियों की जारी हुई नई लिस्ट, मसूद अजहर, दाऊद, हाफिज सईद और लखवी शामिल

नई दिल्ली। आतंकवाद पर लगाम कसने के लिए बनाए गए नए कानून UAPA के तहत भारत ने 4 खूंखार आतंकियों को टेरर लिस्ट शामिल किया है। सूची में पहले नंबर पर पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड मसूद अजहर को रखा गया है। इसके अलावा आतंकी संगठन जमात उद-दावा के सरगना और मुंबई हमले का मास्टरमाइंड हाफिज सईद को नंबर दो पर रखा गया है। तीसरे नंबर पर माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम है, जिसके अक्सर पाकिस्तान कराची में रहने की खबरें मिलती रहती हैं। आतंकी जकी-उर रहमान लखवी को भी इस लिस्ट में रखा गया है। यूएपीए यानी गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम कानून को हाल ही में समाप्त हुए संसद सत्र में पारित किया गया था। गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र की ओर से भी मसूद अजहर और हाफिज सईद को ग्लोबल आतंकी घोषित किया जा चुका है। यूएपीए में किसी व्यक्ति विशेष को कब आतंकवादी घोषित किया जाएगा, इसका प्रावधान है। इसके तहत, कोई व्यक्ति आंतकवादी गतिविधियों को अंजाम देता है या उसमें भाग लेता है तो उसे आतंकवादी घोषित किया जा सकता है। इस कानून में पहला अमेंडमेंट 2004 के अंत में आया था जब यूपीए सरकार थी। दूसरा संशोधन 2008 में और तीसरा अमेंडमेंट 2013 में आया था। गृह मंत्री अमित शाह ने कानून के बारे में कहा था कि कोई अगर आंतकवाद के पोषण में मदद करता है, धन मुहैया कराता है, आतंकवाद के साहित्य का प्रचार-प्रसार करता है या आतंकवाद की थिअरी युवाओं के जहन में उतारने की कोशिश करता है, उसे आतंकवादी घोषित किया जाएगा।
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20 साल पहले पुतिन के पीछे खड़े थे मोदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मोदी रूस के दौरे पर हैं और 20वें वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन में भी शिरकत कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भी याद किया। राष्ट्रपति पुतिन के साथ साझा बयान में उन्होंने पहले सम्मेलन को याद करते हुए कहा कि 2001 में इसकी शुरुआत हुई थी। उन्होंने कहा, 'उस समय पुतिन राष्ट्रपति थे और मैं अटल जी के साथ गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर आया था। इसके बाद हम दोनों की दोस्ती का सफर आगे बढ़ा।' पीएम मोदी ने 2001 के पहले शिखर सम्मेलन को याद करते हुए कुछ तस्वीरें भी ट्वीट कीं। पीएम मोदी ने एक तस्वीर साझा कि जिसमें वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बगल बैठे हैं और दूसरी तरफ राष्ट्रपति पुतिन बैठे हैं। एक और तस्वीर में राष्ट्रपति पुतिन और अटल बिहारी वाजपेयी बयान दे रहे हैं। कुर्सी के पीछे मोदी और जसवंत सिंह खड़े हैं। जसवंत सिंह उस समय विदेश मंत्री थे। पीएम मोदी ने लिखा, '20वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेते वक्त मुझे 2001याद आ रहा था जब अटल जी प्रधानमंत्री थे और मुझे गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में प्रतिनिधि मंडल में शामिल किया गया था।' दो घंटे चले सम्मेलन में कई समझौते हुए। विदेश मंत्रालय के मुताबिक तेल औऱ गैस, रक्षा, खनन, हवाई और समुद्री कनेक्टिविटी, न्यूक्लियर एनर्जी, ट्रांसपॉर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर, व्यापार ओर निवेश संबंधी विषयों पर बात हुई। पीएम मोदी ने कहा कि ईस्टर्न इकनॉमिक फोरम के लिए मिला निमंत्रण बेहद सम्मान का विषय है। उन्होंने कहा 20 वर्षों में इस व्यवस्था ने हमारे संबंधों को 21वीं सदी के अनुरूप ढाला है और विश्व के लिए शांति, प्रगति और स्थायित्व का एक विशेष कारक बनाया है।
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गुरुग्राम में अब कटा 59,000 रुपये का चालान

गुरुग्राम। मोटर वाहन संशोधन अधिनियम, 2019 पहली सितंबर से लागू हो गया है, जिसके बाद दिल्‍ली और एनसीआर में ट्रैफिक पुलिस नियमों का उल्‍लंघन करने वालों के खूब चालान काट रही है। यहां एक स्‍कूटर चालक का 23,000 रुपये का चालान काटने के बाद अब ट्रैफिक पुलिस ने एक ट्रैक्‍टर-ट्रॉली चालक का 59,000 रुपये का चालान काट दिया। ट्रैक्‍टर-ट्रॉली चालक को पुलिस ने यह चालान 10 ट्रैफिक नियमों के उल्‍लंघन को लेकर थमाया। ट्रैक्‍टर-ट्रॉली चालक का पुलिस ने मंगलवार रात ट्रैफिक नियमों के उल्‍लंघन के कारण चालान काटा। दरअसल, चालक ने लाल बत्‍ती जंप करने की कोशिश की थी और इस दौरान एक मोटसाइकिल सवार को टक्कर भी मार दी थी। ट्रैफिक पुलिस ने उसे रोककर कागजात मांगे तो वह कोई दस्तावेज नहीं दिखा सका। इसके बाद पुलिस ने नए ट्रैफिक नियमों के तहत कई उल्‍लंघनों को लेकर चालक रामगोपाल को 59,000 रुपये का चालान थमा दिया। ट्रैक्‍टर-ट्रॉली चालक को लाइसेंस के बगैर वाहन चलाने, रजिस्‍ट्रेशन सर्टिफिकेट नहीं होने, फिटनेस प्रमाण-पत्र नहीं होने, थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस नहीं होने, वायु प्रदूषण के निर्धारित मानकों का उल्‍लेघन करने, खतरनाक सामान रखने, खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाने, ट्रैफिक पुलिस के आदेशों को नहीं मानने, रेड लाइट जंप करने के मामले में कुल 59,000 का चालान किया गया। गुरुग्राम पुलिस ने ट्रैक्‍टर-ट्रॉली को जब्‍त भी कर लिया। गुरुग्राम में इससे पहले भी ट्रैफिक नियमों के उल्‍लंघन को लेकर कई भारी-भरकम चालान काटे जा चुके हैं। ट्रैफिक नियमों के उल्‍लंघन को लेकर यहां एक ऑटो-रिक्‍शा चालक को 32,500 रुपये का चालान थमाया जा चुका है। दिल्‍ली निवासी एक स्‍कूटी चालक को ट्रैफिक नियमों के उल्‍लंघन पर 23,000 रुपये का चालान किया गया, जबकि उसकी स्‍कूटी की कीमत 15,000 रुपये बताई गई। वहीं, बुधवार को तीन ऑटो रिक्‍शाचालकों का ट्रैफिक नियमों के उल्‍लंघन को लेकर क्रमश: 9,400 रुपये, 27,000 रुपये और 37,000 रुपये का चालान काटा गया।
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पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट, 18 की मौत, कई के फंसे होने की आशंका

गुरदासपुर। पंजाब के बटाला में पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट में 18 लोगों की मौत हो गई है। पंजाब पुलिस ने बताया कि मलबे में अनेक लोगों के फंसे होने की आशंका है और राहत अभियान जारी है। मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने जानमाल के नुकसान पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि बचाव अभियान जारी है। उन्होंने ट्वीट किया, 'बटाला में पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट के कारण जानमाल के नुकसान का गहरा दुख पहुंचा है। राहत और बचाव के प्रयासों के तहत डीसी और एसएसपी के नेतृत्व में बचाव अभियान जारी है।' विस्फोट इतना भीषण था कि आसपास की कुछ इमारतें भी नष्ट हो गईं। गुरदासपुर से सांसद सनी देओल ने भी घटना पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा, 'बटाला में फैक्ट्री में विस्फोट की खबर सुनकर दुख पहुंचा है। एनडीआरएफ और जिला प्रशासन की टीम राहत अभियान के लिए पहुंच गई हैं।' राहत अभियान में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीम लगाई गई हैं। जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद हैं।
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जोशी ने कहा- देश को ऐसे नेता की जरूरत जो प्रधानमंत्री से बेहिचक बहस कर सके

नई दिल्ली। भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने मंगलवार को कहा कि वर्तमान में देश को ऐसे नेता की जरूरत है जो प्रधानमंत्री के साथ बेहिचककिसी भी मुद्दे पर बहस कर सके और अपनी बात स्पष्ट तरीके से रखे। दिवंगत कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री एस जयपाल रेड्डी के श्रद्धांजलिकार्यक्रम में बोलते हुए जोशी ने कहा कि रेड्‌डी ऐसे नेता रहे हैं जिन्होंने हमेशा तात्कालिक मुद्दों पर बात की और कभी भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। जोशी ने 1990 के दशक में रेड्‌डी के साथ बिताए अपने समय को याद करते हुए कहा कि रेड्‌डी हमेशा दलगत भावनाओं से ऊपर उठकर अपनी बात रखते थे। उन्होंने इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स के मुद्दों पर भी फोरम में बेबाकी से अपनी बात रखी थी। जोशी ने आगे यह भी कहा, “मैं ऐसा समझता हूं कि आजकल ऐसे नेतृत्व की बहुत जरूरत है जो इस बात की चिंता किए बिना कि प्रधानमंत्री नाराज या खुश होंगे, अपनी बात साफ-साफ कहते हैं, उनसे बहस करते हैं।” वह फोरम खत्म हुए,जहां नेता अपनी बात खुलकर रखते थे: जोशी भाजपा नेता ने कहा कि एक ऐसेफोरम खत्म हो चुके हैं, जहांराजनेता राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर पार्टी लाइन से ऊपर उठकर अपनी बात रखते थे।इसेपुनर्जीवितकरने की आवश्यकता है।कुछ ऐसे प्रश्न हैं जो देश और कुछ मामलों में विश्व के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन पर विचार विमर्श होना जनतंत्र और देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। हमें इस तरफ ध्यान देने की जरूरत है। यही रेड्डी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। संस्मरण सभा में कई नेता मौजूद थे रेड्डी की याद में आयोजित संस्मरण सभामें उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी, भाकपा के डी राजा, वरिष्ठ समाजवादी नेता शरद यादव और कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी सहित विभिन्न दलों के नेता मौजूद रहे। पूर्व केंद्रीय मंत्री जयपाल रेड्‌डी इसी साल जुलाई में हैदराबाद में 77 साल की उम्र में निधन हो गया था। वे निमोनिया से पीड़ित थे। वे 1998 में पूर्व प्रधानमंत्री इंद्रकुमार गुजराल सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्रीरहे।
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