राष्ट्र

विक्रम लैंडर का पता चला, ऑर्बिटर ने भेजी तस्वीर

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख के सिवन ने एएनआई से कहा कि हमें विक्रम लैंडर का पता चल गया है। अभी तक विक्रम से कोई संपर्क नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि ऑर्बिटर ने विक्रम की तस्वीरें भेजी हैं ।लेकिन कोई संपर्क नहीं हो सकता है। उन्होंने बताया कि उससे संपर्क करने की कोशिशें की जा रही हैं। भारतीय अनुसंधान संगठन (इसरो) के चीफ के. सिवन ने लैंडर विक्रम से संपर्क टूटने और मिशन चंद्रयान-2 के बारे में कहा था कि अभी सारी उम्मीदें खत्म नहीं हुई हैं। इसरो चीफ ने डीडी न्यूज से बात करते हुए कहा कि वैज्ञानिक उससे अगले चौदह दिनों तक संपर्क साधने की कोशिश करते रहेंगे। लैंडर से दोबारा संपर्क होने की कोई सूरत के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए के. सिवन ने कहा- “हम संपर्क साधने की कोशिश करते रहेंगे, हम अगले 14 दिनों तक संपर्क करने की कोशिश करेंगे।” चंद्रयान के साथ गये ऑर्बिटर के बारे में बताते हुए के सिवन ने कहा कि ऑर्बिटर की लाइफ मात्र एक साल के लिए तय की गई थी, लेकिन ऑर्बिटर में मौजूद अतिरिक्त ईंधन की वजह से अब इसकी उम्र 7 साल तक लगायी जा रही है। इसरो ने बयान जारी कर कहा था- 95 फीसदी मिशन सफल उधर, मिशन चंद्रयान 2 को लेकर शनिवार को मिले जबरदस्त झटके के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने पहले बयान में भारत के चंद्रयान-2 को एक कठिन मिशन करार दिया। इसके साथ ही, इसरो ने इसे एक “महत्वपूर्ण तकनीकी छलांग बताया।” क्या हुआ था मिशन में चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने के भारत के साहसिक कदम को शनिवार तड़के उस वक्त झटका लगा जब चंद्रयान-2 के लैंडर 'विक्रम से चांद की सतह से महज 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर संपर्क टूट गया था। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के मुताबिक लैंडर 'विक्रम चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की तरफ बढ़ रहा था और उसकी सतह को छूने से महज कुछ सेकंड ही दूर था तभी 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई रह जाने पर उसका जमीन से संपर्क टूट गया। इसके बाद इसरो के वैज्ञानिकों में हताशा जरूर नजर आई लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरा देश उनके साथ खड़ा दिखा। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें इससे हताश होने की जरूरत नहीं है। करीब एक दशक पहले इस चंद्रयान-2 मिशन की परिकल्पना की गई थी और 978 करोड़ के इस अभियान के तहत चंद्रमा के अनछुए दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करने वाला भारत पहला देश होता।
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देश में बड़े बदलाव हुए हैं: मोदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि उनकी सरकार के सौ दिनों में ''विकास, विश्वास और देश में बड़े बदलाव हुए हैं और ''हमें पता है कि आगे चुनौतियों से सीधे कैसे निपटना है। हरियाणा विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा के प्रचार अभियान की शुरुआत करते हुए मोदी ने यहां एक रैली में कहा कि कृषि क्षेत्र से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा तक सरकार के बड़े निर्णयों के पीछे प्रेरणा 130 करोड़ भारतीय हैं। उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकसभा चुनावों में हार से वे अब भी ''स्तब्ध हैं। जम्मू-कश्मीर का हवाला देते हुए मोदी ने कहा कि देश और दुनिया ने पिछले सौ दिनों में देखा है कि ''भारत हर चुनौती को चुनौती दे रहा है चाहे ये दशकों पुरानी हों या भविष्य में आने वाली हों। 'विजय संकल्प रैली में उन्होंने कहा, ''मैं हरियाणा में ऐसे समय में आया हूं जब भाजपा नीत राजग सरकार सौ दिन पूरे कर रही है। सौ दिनों में कुछ लोग नहीं समझ सके, कुछ लोगों की हालत इतनी खराब है कि वे चुनावों में हार से स्तब्ध हैं। उन्होंने कहा कि ये सौ दिन ''देश में विकास, विश्वास और बड़े बदलाव के रहे। ये सौ दिन निश्चितता, प्रतिबद्धता और अच्छी मंशा के रहे। उन्होंने कहा, ''पिछले सौ दिनों में जो भी बड़े निर्णय किए गए उनके पीछे प्रेरणा 130 करोड़ भारतीयों की रही। आपके अभूतपूर्व सहयोग के कारण सरकार कृषि क्षेत्र से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा तक बड़े निर्णय कर सकी। प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल के महीने में कई महत्वपूर्ण कानून पास किए गए जिसमें आतंकवाद से निपटना और मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना शामिल है। उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों की मदद के लिए रोडमैप तैयार किया गया है जिसका मकसद अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है और उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए किए गए ''ऐतिहासिक निर्णयों का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ''यह केवल शुरुआत है और इसके लाभ आगामी दिनों में महसूस किए जाएंगे। उन्होंने कहा, ''हमें पता है कि चुनौतियों से कैसे निपटना है। चाहे वह जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का मुद्दा हो या गंभीर जल संकट का मुद्दा हो, देश की 130 करोड़ जनता ने नये समाधान की तरफ देखना शुरू कर दिया है। अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को खत्म करने की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने कहा, ''हम जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों के सपने नयी सोच के साथ पूरा करने की तरफ हैं। आपकी प्रेरणा से चुनावों के दौरान किए गए ऐसे वादों का अब सम्मान किया जा रहा है। मोदी ने कहा कि केंद्र हो या राज्य भाजपा सरकारों की मुख्य प्राथमिकता गरीब लोगों के हितों का ख्याल रखना है और उन्होंने बेहतर स्वास्थ्य सुविधा, स्वच्छ पेयजल, किसान कल्याण और पेंशन योजनाओं जैसे कदमों का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ''हम टुकड़ों में काम नहीं करते बल्कि दिमाग में बड़ा लक्ष्य रखते हैं और सर्वांगीण कदम उठाते हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में पूर्ववर्ती सरकारों में जो रोडमैप नहीं बना उसे अब बनाया गया है।
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चंद्रयान को लेकर बोलीं ममता- आर्थिक आपदा से ध्यान हटाने की है कोशिश

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को चंद्रयान 2 को लेकर कहा है कि यह आर्थिक आपदा से ध्यान हटाने की कोशिश है। ममता बनर्जी ने कहा कि मानो देश में पहली बार ऐसा हो रहा हो। जैसा कि सत्ता में आने से पहले इस तरह के किसी भी मिशन को अंजाम नहीं दिया गया था। बता दें कि भारत आज उस समय इतिहास रचेगा जब चंद्रयान 2 का लैंडर विक्रम शनिवार तड़के एक से दो बजे के बीच चंद्रमा पर उतरना शुरू करेगा और उसके तड़के डेढ और ढाई बजे के बीच चंद्रमा को छूने की संभावना है। चंद्रयान 2 को लेकर पीएम मोदी ने की ये अपील वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अपील की है कि वे ऐतिहासिक सफर पर गये चंद्रयान 2 के चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने के विशेष क्षणों का आनंद लें और इसके फोटो सोशल मीडिया पर शेयर करें जिन्हें वे खुद रि-ट्वीट करेंगे। प्रधानमंत्री खुद भी इसरो के बेंगलुरू स्थित मुख्यालय में वैज्ञानिकों के साथ इस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनेंगे। उनके साथ देश भर के स्कूलों के करीब 70 छात्र भी होंगे। आठवीं से लेकर 10वीं तक के इन छात्रों का चयन एक क्विज के जरिये किया गया है।
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पिता-पति प्रियंका चोपड़ा के लिए सबसे कीमती

मुंबई. प्रियंका चोपड़ा अपने स्टाइल स्टेटमेंट और फैशन सेंस के कारण सुर्खियों में रहती हैं। प्रियंका पिछले 19 साल से फैशन इंडस्ट्री के लिए एक आइकॉन बनी हुई है। अब प्रियंका चोपड़ा ने खुलासा किया है कि उनके कलेक्शन में सबसे कीमती चीज क्या है। प्रियंका चोपड़ा से एक विदेशी मैग्जीन ने इंटरव्यू में इस बारे में सवाल पूछा। प्रियंका ने जवाब में कहा-मेरा मंगलसूत्र। मंगलसूत्र के बारे में बताते हुए प्रियंका ने कहा- भारतीय शादी में ये एक गहना होता है जो दूल्हा, दुल्हन के गले पर पहनाता है। प्रियंका ने मंगलसूत्र के अलावा अपने पिता अशोक चोपड़ा द्वारा दी गई हीरे की अंगूठी को भी सबसे कीमती बताया। आपको बता दें कि प्रियंका चोपड़ा के पिता का कैंसर के कारण साल 2013 में निधन हो गया था। प्रियंका चोपड़ा का मंगलसूत्र डिजाइनर सब्यसाची ने डिजाइन किया है। ये नीओ-ट्रैडिशनल मंगलसूत्र है। प्रियंका के गोल्ड चेन वाले मंगलसूत्र में टीयर शेप्ड डायमंड लॉकेट है। लॉकेट के ठीक ऊपर तीन डायमंड और लगे हुए हैं। प्रियंका के मंगलसूत्र की कीमत का खुलासा नहीं हुआ है। प्रियंका चोपड़ा ने साल 2018 में निक जोनस के साथ क्रिश्चियन और हिंदू रिवाज से शादी की थी। मंगलसूत्र के अलावा हिंदू शादी में भी प्रियंका का लहंगा सब्यसाची ने ही डिजाइन किया था।
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रूस से रिश्ते

भारत और रूस के रिश्तों में अब पुराने दिन लौटने के संकेत साफ नजर आ रहे हैं। इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस यात्रा ज्यादा महत्त्वपूर्ण और सफल इसलिए कही जानी चाहिए कि दोनों देश अपने आंतरिक मामलों में किसी भी बाहरी दखल के खिलाफ खुल कर साथ आए हैं। रूसी शहर व्लादिवोस्तोक में भारत और रूस के बीच होने वाली सालाना शिखर बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साफ कहा कि अपने देश के अंदरूनी मसलों में किसी भी बाहरी दखल के वे खिलाफ हैं। यह बात पिछले महीने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को खत्म किए जाने के बाद पाकिस्तान की बौखलाहट के संदर्भ में उठी। पाकिस्तान और चीन ने संयुक्त राष्ट्र से लेकर तमाम देशों के समक्ष कश्मीर से धारा 370 को हटाने का मसला उठाया था। लेकिन हर जगह से पाकिस्तान को यही सुनने को मिला कि यह भारत का अंदरूनी मसला है और इस पर कुछ नहीं किया जा सकता। इसके अलावा अमेरिका भी समय-समय पर इस मामले में मध्यस्थता का शिगूफा छोड़ता रहा है, जिसे भारत ने साफ तौर खारिज कर दिया। ऐसे में अब इस मसले पर रूस ने भी अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। रूसी राष्ट्रपति ने तो कहा भी कि पाकिस्तान कश्मीर को लेकर अफवाहें फैला रहा है। भारत की यह बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि है। एक पुराने दोस्त ने भारत के साथ पूरी तरह से एकजुटता दिखाई है। भारत और रूस के बीच ईरान को लेकर भी बात हुई। भारत पर अमेरिका का दबाव है कि वह उसके साथ कारोबारी रिश्ते खत्म करे। तेल आयात तो भारत को मजबूरन बंद करना ही पड़ा है। भारत किसके साथ व्यापार करे और किसके साथ नहीं, यह उसका अंदरूनी मामला है। रूस तो खुल कर ईरान के साथ है। इसीलिए पुतिन ने साफ-साफ कहा कि किसी के दबाव में ईरान के साथ रिश्ते खत्म नहीं किए जा सकते। कश्मीर और ईरान के मसले पर रूस का खुल कर भारत के साथ आना बड़ी बात है। हालांकि बदलते वैश्विक परिदृश्य में पिछले कुछ दशकों में भारत का अमेरिका की ओर झुकाव ज्यादा बढ़ा है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि रूस से भारत के संबंधों पर कोई असर पड़ा। ब्रह्मोस मिसाइल परियोजना से लेकर कई क्षेत्रों में रूस भारत को मदद देता रहा है। मोदी और पुतिन पिछले एक साल में छह बार मिल चुके हैं। दोनों नेताओं के बीच जिस तरह से निजी रिश्ते बन गए हैं उनका लाभ भारत को मिल रहा है। रूस ने ऊर्जा और अंतरिक्ष क्षेत्र सहित भारत के साथ पंद्रह करार किए हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि भारत की तरक्की में रूस जैसे पहले साथ था, वैसे ही आज भी है। दोनों देशों के बीच हुए असैन्य परमाणु समझौते के तहत रूस भारत में बीस परमाणु इकाइयां लगाएगा। दूसरी ओर, भारत रूस के तेल और गैस क्षेत्र में निवेश करेगा। अंतरिक्ष के क्षेत्र में मदद के तौर पर रूस गगनयान मिशन के तहत भेजे जाने वाले भारत के अंतरिक्ष यात्रियों को प्रशिक्षण देगा। पिछले कुछ सालों में तेजी से विकास करने वाले और उभरती अर्थव्यवस्था वाले देश के रूप में भारत की जो छवि बनी है उसकी अहमियत रूस बखूबी समझता है। रूस यह भी जानता है कि भारत को अपने एक पड़ोसी के कारण दशकों से आतंकवाद झेलना पड़ रहा है। ऐसे में भारत को रूस से हर स्तर पर समर्थन मिलना दोनों देशों के रिश्तों को और प्रगाढ़ करेगा।
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आ रहे नए नियम: अगर बिजली गुल हुई तो पैसे मिलेंगे

नई दिल्ली। सरकार बिजली क्षेत्र में दूसरे चरण के सुधारों को तेजी से आगे बढ़ाने पर काम कर रही है। इसमें अन्य बातों के अलावा उपभोक्ताओं को सशक्त बनाया जा रहा है। इसके तहत ग्राहकों को 24 घंटे बिजली नहीं मिलने और स्थानीय समस्याओं को निर्धारित समय पर दूर नहीं किए जाने की स्थिति में वितरण कंपनियों को जुर्माना भरना होगा। बिजली मंत्री आर के सिंह ने एक विशेष बातचीत में यह जानकारी दी। मंत्री ने कहा, 'हम बिजली क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों के तहत उपभोक्ताओं को अधिकार दे रहे हैं और यह पहली बार हो रहा है। बिजली देना एक सेवा है और उसके कुछ मानदंड है। ग्राहकों को 24 घंटे बिजली नहीं मिलने पर वितरण कंपनियों को उन्हें जुर्माना भरना होगा। इतना ही नहीं ट्रांसफॉर्मर या किसी अन्य स्थानीय गड़बड़ी के निर्धारित समयसीमा में ठीक नहीं होने पर भी वितरण कंपनियों को ग्राहकों को जुर्माना देना पड़ेगा।' 'कैबिनेट से जल्द मंजूरी की उम्मीद' उन्होंने कहा कि ये सब नई प्रशुल्क नीति में प्रावधान किए जा रहे हैं। यह फिलहाल मंत्रिमंडल के पास है जिसे जल्दी ही मंजूरी मिलने की उम्मीद है। बिजली दरों को वाजिब स्तर पर बनाए रखने के लिए क्रॉस सब्सिडी (एक की लागत पर दूसरे को सब्सिडी) व्यवस्था पर लगाम लगाने और सब्सिडी का लाभ सीधे ग्राहकों को देने जैसे उपाय किए जा रहे हैं। सेवा गुणवत्ता का निर्धारण केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग और राज्य विद्युत नियामक आयोग मिलकर करेंगे। जुर्माने की राशि का निर्धारण राज्य विद्युत नियामक करेंगे। पहले कार्यकाल में हर गांव बिजली एनडीए सरकार का पहला कार्यकाल हर गांव और हर घर बिजली उपलब्ध कराने के लिए सुर्खियों में रहा। बिजली मंत्रालय इस बार क्षेत्र में व्यापक स्तर पर सुधार लाने के लिए कदम उठा रहा है। इसमें नई शुल्क नीति के साथ बिजली वितरण कंपनियों को पटरी पर लाने की उदय योजना में सुधार करना भी शामिल हैं। विशेषज्ञ इसे दूसरे चरण का सुधार कह रहे हैं। '3 साल में हर घर में स्मार्ट मीटर' उन्होंने कहा, 'हम क्रॉस सब्सिडी पर भी अंकुश लगा रहे हैं। राज्य सरकारें अगर किसी को सब्सिडी देना चाहती है तो उन्हें यह सीधे ग्राहकों को देनी होगी। इसके अलावा अगले 3 साल में सभी ग्राहकों को प्रीपेड/ स्मार्ट मीटर लगाना अनिवार्य होगा। इससे वितरण कंपनियों के बिल के मामले में जो समस्या है, वह खत्म होगी और वे अधिक दक्ष होंगे जिसका सकारात्मक असर बिजली दरों पर पड़ेगा।' 'बिजली दरों को तर्कसंगत बनाने की कोशिश' बिजली दरों से जुड़े एक सवाल के जवाब में सिंह ने कहा, 'हमने बिजली शुल्क को तर्कसंगत बनाने के लिए कदम उठाया है। इसके तहत यह व्यवस्था की गई है कि जो सबसे कुशल बिजलीघर हैं और जहां अपेक्षाकृत बिजली की उत्पादन लागत कम है और जहां अतिरिक्त बिजली उपलब्ध है, कंपनियां वहां से पहले बिजली की आपूर्ति करेंगी। इसे बिजली खरीद समझौते (पीपीए) में शामिल किया गया है।'
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चिदंबरम को झटका: कोर्ट ने 19 सितंबर तक तिहाड़ जेल भेजा, अलग कोठरी में रखने का आदेश

नई दिल्ली। आईएनएक्स मीडिया मामले में दिल्ली की एक अदालत (सीबीआई कोर्ट) ने पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम को तिहाड़ जेल भेज दिया है। अदालत ने पी. चिदंबरम को 19 सितम्बर तक 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा है। चिदंबरम की जेड सुरक्षा का ख्याल रखते हुए अदालत ने उन्हें अलग कोठरी में रखने के निर्देश दिए। सॉलिसीटर जनरल ने आश्वासन दिया कि जेल में चिदंबरम के लिए पर्याप्त सुरक्षा होगी। चिदंबरम की दो दिन की सीबीआई की हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद आईएनएक्स मीडिया मामले में गुरुवार को अदालत में पेश किया गया जहां जांच एजेंसी ने कहा कि कांग्रेस नेता को न्यायिक हिरासत में भेजा जाए। चिदंबरम को विशेष अदालत लाया गया। इससे कुछ ही घंटे पहले कांग्रेस नेता ने उनके खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट को चुनौती देने वाली याचिका वापस ले ली थी। गैर जमानती वारंट जारी किये जाने के बाद चिदंबरम को सीबीआई की हिरासत में भेजा गया था। कांग्रेस नेता की 15 दिनों की सीबीआई हिरासत की अवधि आज समाप्त हो रही है। विशेष अदालत ने उन्हें पांच चरणों में 15 दिनों के लिए सीबीआई हिरासत में भेजा था। उन्हें 21 अगस्त की रात को गिरफ्तार किया गया था। चिदंबरम को विशेष न्यायाधीश अजय कुमार कुहाड़ की अदालत में पेश किया गया। कुहाड़ ने उच्चतम न्यायालय के आदेश का संज्ञान लेते हुए पूर्व वित्त मंत्री को दो दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया था। उच्चतम न्यायालय के आदेश में कहा गया था कि कांग्रेस नेता पांच सितंबर तक सीबीआई की हिरासत में रहेंगे। प्रवर्तन निदेशालय की ओर से दर्ज धन शोधन के एक मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के 20 अगस्त के फैसले के खिलाफ चिदंबरम की अपील पर शीर्ष अदालत ने सुनवाई की और अग्रिम जमानत नामंजूर किये जाने को दी जाने वाली उनकी चुनौती को खारिज कर दिया । शीर्ष अदालत के फैसले के कुछ ही घंटे बाद एक अन्य विशेष अदालत ने एयरसेल मैक्सिस मामले में चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति को अग्रिम जमानत दे दी।आईएनएक्स मामले में सीबीआई की ओर से सोलिसीटर जनरल तुषार मेहता अदालत में मामला रख रहे हैं जबकि चिदंरबम की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल कर रहे हैं। कार्यवाही के दौरान, मेहता ने न्यायाधीश को प्रवर्तन निदेशालय मामले में उच्चतम न्यायालय के आदेश के परिणाम और सीबीआई मामले में अपनी याचिकाओं को वापस लेने के बारे में सूचित किया।
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शिक्षक दिवस / 71% व्यूअर्स यूट्यूब पर कुछ सीखने आते हैं, नया मंत्र बन सकता है- यूट्यूब गुरुवे नम:

नई दिल्ली। देश में हर साल पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस पर 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। ये दिन होता है गुरुओं के प्रति आभार प्रकट करने का। उनका आशीर्वाद लेने का। बदलते दौर में शिक्षक की भूमिका भी बदल रही है। लोगों के सीखने का तरीका भी बदल रहा है और सीखने, सिखाने का माध्यम भी बदल रहा है। जैसे अब यूट्यूब एक ऐसा प्लेटफॉर्म बन चुका है, जहां लोग सिर्फ मनोरंजन के लिए ही नहीं जाते बल्कि नॉलेज हासिल करने भी जाते हैं। फिटनेस से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओंतक की तैयारी के लिए यूट्यूब पर अपलोड वीडियो नॉलेज पाने का एक बड़ा जरिया बन चुके हैं। नई जनरेशन के लिए यूट्यूब ही शिक्षक की भूमिका निभा रहा है। यूट्यूब पर 71% यूजर्स कुछ सीखने आते हैं।यूट्यूब कैसे निभा रहा शिक्षक की भूमिका, समझें इन दो किस्सों से... पहला किस्सा नाम : दीपक नायक क्या सीखा : स्ट्रॉबेरी की खेती का तरीका दीपक ने बताया किइंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद उन्होंने वेब डिजाइनिंग का काम शुरू किया। काम अच्छा चल रहा था और इंटरनेशनल क्लाइंट्स भी बन गए थे, लेकिन मन गांव की जमीन पर स्ट्रॉबेरी की खेती करने का था। पहले महाराष्ट्र जाकर स्ट्रॉबेरी की खेती के बारे में पता किया। फिर भी पूरी जानकारी नहीं मिल सकी थी तो यूट्यूब को ही शिक्षक बना लिया। यूट्यूब से नोट्स तैयार किए। विशेषज्ञों से बात की और स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू कर दी। 2 से 5 लाख का निवेश पहली बार में हुआ। 50वें दिन फल आ गए थे। जितने पैसे लगे थे, उतने निकल गए लेकिन आगे के लिए सीख बहुत बड़ी मिल गई। अब फलों के एक्सपोर्ट का काम कर रहे हैं। वे कहते हैं कि, यूट्यूब से सबकुछ तो नहीं लेकिन बहुत कुछ सीखा जा सकता है। किसी भी विषय के बारे में आप काफी हद तक जानकारी यूट्यूब से जुटा सकते हैं। जिनके पास ज्ञान लेने का कोई साधन नहीं है, उनके लिए यूट्यूब सबसे बड़ा शिक्षक बन चुका है। दूसरा किस्सा नाम : प्रद्युम्न शांडिल्य क्या सीखा : म्यूजिक इंस्ट्रुमेंट्स एमपी पीएससी की तैयारी कर रहे प्रद्युम्न कहते हैं किमैंने म्यूजिक इंस्ट्रुमेंट्स प्ले करना यूट्यूब से ही सीखा। बिना कहीं जाए और पैसे खर्च किए बिना मेरा काम हो गया। सीखने के बाद यूट्यूब पर ही चैनल भी बना लिया और अब तक इससे 200 डॉलर से ज्यादा कमा चुका हूं। आज के दौर में यूट्यूब ही सबसे बड़ा शिक्षक है लेकिन यहां थोड़ा अलर्ट रहने की जरूरत है। बहुत सी नकारात्मक और गलत जानकारी वाली चीजें भी यूट्यूब पर आती हैं। ऐसे में जरूरी है कि सही जानकारी को ही अपनाया जाए और फेक न्यूज के चक्कर में न पड़ें। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन डीपी सिंह ने बताया कि शिक्षक का कोई विकल्प नहीं हो सकता, क्योंकि शिक्षक सिर्फ एक फिजिकल एंटिटी नहीं हैं, बल्कि वह एक व्यक्तित्व, ज्ञान, आचरण, गरिमा, मर्यादा, व्यवहार एक रूप भी हैं। शिक्षक रोल मॉडल होते हैं। ये अपेक्षाएं कभी भी तकनीकी विकल्प पूरी नहीं कर सकते। डॉ सिंह कहते हैं कि, यूट्यूब और दूसरी ऐसी तकनीकें हमारी अतिरिक्त जानकारी का जरिया हो सकती हैं लेकिन यह कभी गुरू की भूमिका में नहीं आ सकते। अब शिक्षक को गुरू के रूप में परिवर्तित होना चाहिए। गुरू सिर्फ कक्षा में पाठ्यक्रम से जुड़ी ही बात नहीं करते बल्कि जीवन संग्राम के लिए विद्यार्थी को तैयार करते हैं। सदमार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। डॉ सिंह का मानना है कि यूट्यूब पर जो भी लोग एजुकेशनल वीडियो अपलोड करते हैं, उन्हें पहले उसे लेकर अच्छे से शोध कर लेना चाहिए। पूरी जिम्मेदारीपूर्वक यह काम करना चाहिए क्योंकि आप जो वीडियो डाल रहे हैं और जो जानकारी उसमें दे रहे हैं, वे कई लोगों का भविष्य या तो बना सकती है या बिगाड़ सकती है। इसलिए तथ्यपूर्ण और सही जानकारी ही यूट्यूब पर डालनी चाहिए। यूट्यूब शिक्षक नहीं बल्कि कोचिंग को सप्लीमेंट कर रहा... पंडित माखनलाल चतुर्वेदी के भतीजे और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के पूर्व महानिदेशक अरविंद चतुर्वेदी कहते हैं कि, संभवत यूट्यूब कोचिंग को सप्लीमेंट कर रहा है, शिक्षक को नहीं। शिक्षक की भूमिका तो धीरे-धीरे बहुत कम हो ही चुकी है। अब शिक्षक कक्षा में अपने विषय से जुड़ी पुस्तक उठाकर ही पढ़ा देते हैं। दायित्व बोध का अभाव है। ऐसा नहीं होता तो क्यों छात्र-छात्राएं स्कूल छोड़कर कोचिंग ज्वॉइन करते? आज से 40 साल पहले तो कोई कोचिंग क्लास नहीं थी, क्योंकि पहले मजबूत पर्यवेक्षण तंत्र था, जो अब लगभग समाप्त हो चुका है। केरल में तो 73 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं, जो स्कूल में प्रवेश लेते हैं, लेकिन पढ़ाई करने कोचिंग क्लास में जाते हैं। शिवराज सरकार के समय मध्य प्रदेश से ही खबर आई थी कि सरकार ने ये माना है कि 31 हजार शिक्षक ऐसे हैं, जिन्हें पढ़ाना आता ही नहीं। सरकार ने इन्हें ट्रेंड करने के लिए कार्यशाला आयोजित की। कार्यशाला में शामिल होने के लिए आवदेन मंगाए लेकिन महज 37 शिक्षकों ने सीखने में रूचि दिखाई। कोचिंग संस्थानों का भी पैटर्न फिक्स है। वे समग्र विकास नहीं करते बल्कि एक निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने के उद्देश्य से सिलेबस तैयार करते हैं और वही बच्चों को रटवाते हैं। यूट्यूब सहित शिक्षा के किसी भी स्रोत का स्वागत है, लेकिन यह काम जिम्मेदारी से होना चाहिए और बच्चों की नींव कभी यूट्यूब से मजबूत नहीं हो सकती। अच्छी नींव के निर्माण के लिए अच्छे शिक्षक की जरूरत होती है। सरकार को सबसे पहले अच्छे शिक्षक बनाने पर जोर देना चाहिए। अच्छे शिक्षक बन गए तो पूरा समाज अच्छा हो जाएगा। यूट्यूब दुनिया सबसे बड़ा वीडिया कंटेंट एग्रीगेटर यूट्यूब ओरिजिनल कंटेंट की हेड सुजैन डेनियल (अमेरिका) ने भास्कर के लिए दिए खास मैसेज में कहा कि यूट्यूब दुनिया का सबसे बड़ा वीडियो कंटेंट एग्रीगेटर है। मुझे यह जानकार बहुत खुशी है कि भारत के लोग यूट्यूब कंटेंट को पसंद कर रहे हैं, जो उन्हें ग्लोबल ट्रेंड्स और ऑडियंस से भी जोड़ रहा है। यूट्यूब पर वीडियो की प्रकृति और यूजर द्वारा बनाए गए प्रारूप कंटेंट की एक विस्तृत श्रृंखला उपभोक्ताओं के लिए लाते हैं।
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भारी चालान पर नितिन गडकरी बोले-सरकार का इरादा जुर्माने की राशि बढ़ाना नहीं, नियमों का पालन जरूरी

नई दिल्ली । यातायात नियमों के उल्लंघन पर सरकार के भारी भरकम जुर्माने के प्रावधान पर केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को पहली बार प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा जुर्माने की राशि बढ़ाने की नहीं है बल्कि समय ऐसा आना चाहिए जहां सभी लोग यातायात नियमों का पालन करें और किसी को भी जुर्माने का सामना न करना पड़े। बता दें कि नए मोटर व्हेकिल एक्ट में सरकार ने जुर्माने की राशि में भारी बढ़ोतरी की है। अब यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों को भारी जुर्माना चुकाना पड़ रहा है। जुर्माने की राशि में वृद्धि का विरोध भी हो रहा है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'देश में हर साल पांच लाख दुर्घटनाएं होती हैं और इन दुर्घटनाओं डेढ़ लाख लोगों की मौत हो जाती है। इनमें से 65 प्रतिशत मौत 18 से 35 साल के लोगों की होती है। क्या इनकी जान नहीं बचानी चाहिए। कानून के प्रति लोगों में सम्मान एवं डर होना चाहिए। सरकार को जुर्माने की राशि बढ़ाने की इच्छा नहीं है। समय ऐसा आना चाहिए जहां किसी को जुर्माना देने की आवश्यकता न पड़े और सभी कानून का पालन करें।' नए मोटर व्हेकिल एक्ट के तहत जुर्माने की राशि में भारी वृद्धि की गई है। सीट बेल्ट के बिना वाहन चलाने पर जुर्माने की राशि 1000 रुपए है, पहले यह 100 रुपए थी। गाड़ी चलाते हुए मोबाइल पर बात करने पर जुर्माने की राशि 1000 से 5000 के बीच हो सकती है, पहले यह जुर्माना 1000 रुपया था। जुर्माने में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी शराब पीकर गाड़ी चलाने पर हुई है। नशे में गाड़ी चलाने पर जुर्माना 2000 से बढ़ाकर 10,000 रुपए किया गया है जबकि तेज रफ्तार में गाड़ी चलाने पर जुर्माने की राशि 1000 से 2000 से बीच हो सकती है। किशोर के हाथों सड़क दुर्घटना होने पर गाड़ी के मालिक अथवा अभिभावक को दोषी ठहराया जाएगा। इस स्थिति में जुर्माने की राशि 25,000 रुपए के साथ तीन साल की सजा का प्रावधान है। साथ ही वाहन का पंजीकरण भी रद्द होगा। भुवनेश्वर में बुधवार को एक शराबी ऑटोरिक्शा चालक को वैध परमिट, लाइसेंस, पंजीकरण के बिना वाहन चलाने पर 47,500 रुपए का जुर्माना लगाया गया। गुरुग्राम में तीन ऑटोरिक्शा चालकों को यातायात के नियमों का उल्लंघन करने पर 9,400 रुपए, 27,000 रुपए और 37,000 रुपए के चालान काटे गए। गुरुग्राम में ही दिल्ली के एक स्‍कूटर चालक का 23,000 रुपए का चालान कटा। गौरतलब है कि गत 1 सितंबर से लागू हुए नए मोटर वाहन एक्ट के बाद यातायात पुलिस नियमों को लेकर बेहद सख्त हो गई है और नियमों का उल्लंघन करने वालों से चालान के रूप में बड़ी राशि ली जा रही है।
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जारी है पाकिस्तान की हिमाकत, LoC के पास लाया ब्रिगेड

नई दिल्ली। कश्मीर मुद्दे पर तनाव के बीच पाकिस्तान ने अपने कब्जे वाले कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के समीप कोटली एवं बाघ सेक्टर में करीब एक ब्रिगेड से ज्यादा फौज को इकट्ठा किया है। इन 2000 से ज्यादा सैनिकों को शांति वाली जगहों से यहां लाया गया है और इनकी तैनाती नियंत्रण रेखा से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर हुई है। समाचार एजेंसी एएनआई ने सेना के सूत्रों के हवाले से यह रिपोर्ट दी है। पाकिस्तानी सेना की गतिविधियों पर भारतीय सेना ने करीबी नजर बना रखी है। सूत्रों ने बताया, 'अभी इन सैनिकों की तैनाती आक्रामकता दिखाने वाले रूप में नहीं है। फिर भी भारतीय सेना उनकी गतिविधियों पर करीबी नजर बनाए हुए है।' सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तानी सेना का यह जमावड़ा ऐसा समय हुआ है जब उसने पहले ही आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले अपने एजेंटों को सक्रिय कर दिया है। आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद बड़ी संख्या में अफगान एवं स्थानीय लड़ाकों की भर्ती कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक नियंत्रण रेखा के समीप पाकिस्तानी फौज की जो टुकड़ी आई है उसका आकार एक ब्रिगेड के करीब है और इस टुकड़ी में शामिल सैनिकों की संख्या 2000 से अधिक हो सकती है। जम्मू-कश्मीर पर भारत सरकार के फैसले के बाद पाकिस्तानी फौज एलओसी पर अपने सैनिकों की तादाद और अपनी गतिविधियां बढ़ा रही है। घाटी में वह आतंकवाद एवं हिंसा को हवा देने की कोशिश कर रहा है। भारत सरकार के फैसले तिलमिलाया पाकिस्तान दुनिया का ध्यान कश्मीर की तरफ खींचने के लिए जी-जान से लगा है, वह यह बताने की असफल कोशिश कर रहा है कि कश्मीर में स्थितियां काफी जटिल हैं और दोनों देशों के बीच संबंध काफी खराब हो गए हैं। पाकिस्तान ने एलओसी में 100 से ज्यादा अपने कमांडो तैनात किए हैं। वह अपने सैनिकों एवं कमांडों की मदद से कश्मीर में बड़ी संख्या में आतंकवादियों की घुसपैठ कराने की फिराक में है। यही नहीं पाकिस्तान ने विवादित सर क्रीक इलाके में भी अपने विशेष बल को तैनात किया है। सूत्रों का कहना है कि भारतीय सुरक्षा बलों पर हमले के लिए पाकिस्तानी एजेंसियां अफगानिस्तान के आतंकवादियों को भर्ती करने की प्रक्रिया में हैं। ऐसी आशंका है कि पाकिस्तान कश्मीर के स्थानीय कमांडरों की जगह अफगानिस्तान के लड़ाकों की भर्ती करेगा। सेना के सूत्रों का कहना है कि फाइनेंशिय एक्शन टॉस्क फोर्स (एफएटीएफ) के कसते शिकंजे से बचने के लिए पाकिस्तान ने आतंकवादियों की भर्ती एवं प्रशिक्षण पर आंशिक रोक लगाई थी लेकिन यह प्रक्रिया एक बार फिर शुरू हो गई है।
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