राष्ट्र

गणेश विसर्जन: महाभारत काल से जुड़ी है ये प्रथा

गणेश चतुर्थी के दिन बप्पा की स्थापना कर उनकी पूजा एक, तीन, पांच या दस दिन तक की जाती है। श्रद्धानुसार लोग अपने अनुसार बप्पा का पूजा के दिन निर्धारित करते हैं, उसके बाद उनका विसर्जन जरूर करते हैं। विर्सजन भी भगवान का उतने ही धूमधाम से किया जाता है जितना की स्थापना के समय उनका स्वागत होता है। मान्यता है कि बिना विसर्जन बप्पा की पूजा पूरी नहीं मानी जाती। इसलिए विसर्जन करना जरूरी होता है लेकिन विसर्जन के पीछे एक महत्वपूर्ण वजह भी है। ऐसे शुरू हुई उत्सव की प्रथा गणेशोत्सव की शुरुआत आजादी से पूर्व ही शुरू हो चुकी थी। अंग्रेजो के खिलाफ देशवासियों को एकजुट करने के लिए श्री बाल गंगाधर तिलक ने गणेशोत्सव का पहली बार आयोजन किया था। धीरे-धीरे ये प्रथा बनी और हर साल पूरे देश में इस उत्सव का आयोनज होना शुरू हो गया। पूजा के बाद विसर्जन करने को लेकर कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर गणपति जी का विसर्जन करना जरूरी क्यों होता है। आइए जानें क्या है इसके पीछे की कहानी। भगवान हैं जल तत्व के अधिपति भगवान गणेश जल तत्व के अधिपति माने गए हैं। मुख्य कारण तो उनके वसर्जन का यही है कि अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान गणपति की पूजा-अर्चना के बाद उन्हें वापस जल में विसर्जित कर दिया जाता है। यानी वह जिसके अधिपति है, वहीं उन्हें पहुंचा दिया जाता है, लेकिन पुराणों में उनके विसर्जन के पीछे कुछ और बातें भी हैं। बढ़ गया था तापमान, इसलिए जल में डाला गया बप्पा को धार्मिक पुराणों में उनके विसर्जन के पीछे मान्यता बिलकुल इतर है। पुराणों के अनुसार श्री वेद व्यास जी गणेश चतुर्थी से महाभारत कथा प्रारंभ की और गणपति जी अक्षरश: लिखते जा रहे थे। व्यास जी आंख बंद कर कथा लगातार दस दिन तक सुनाते रहे और गणपति जी लिखते ही रहे। दस दिन बाद जब व्यास जी ने कथा खत्म कर आंखें खोलीं तो पाया कि गणपति जी के लगातार काम करने से उनके शरीर का तापमान बहुत बढ गया था। व्यास जी ने गणेश जी के शरीर को ठंडक देने के लिए एक सरोवर में ले जा कर खूब डुबकी लगवाई, जिससे उनका तापमान समान्य हो गया। इतना ही नहीं उनके तापमान को कम करने के लिए व्यास जी ने उनके शरीर पर सुगंधित सौंधी माटी का लेप भी किया था और जब वह सूख गई तो उनका शरीर अकड़ने लगा इस कारण भी उन्हें सरोवर में ले जाया गया ताकि माटी शरीर से अलग हो कर उन्हें ठंडक दे सकें। इसके बाद व्यास जी ने 10 दिनों तक गणपति जी को उनके पसंद का भोजन कराया था। इसी मान्यता के अनुसार प्रभु की पूजा के बाद उनका विसर्जन किया जाता है।
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इन उपायों से दूर हो सकती है आर्थिक सुस्ती

रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वी.के. यादव ने कहा है कि स्टेशनों पर बोतलों को नष्ट करने वाली 400 मशीनें लगाई जाएंगी। इसका इस्तेमाल करने वाले यात्रियों को मशीन में अपना मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा और इसके बाद उनका मोबाइल फोन रिचार्ज हो जाएगा। हालांकि, रिचार्ज के विवरण फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 128 स्टेशनों पर बोतल नष्ट करने वाली 160 मशीनें लगाई गई हैं। उन्होंने कहा कि रेलवे कर्मचारियों को स्टेशनों पर इस्तेमाल हो चुकी प्लास्टिक बोतलों को जमा करने और उन्हें रिसाइकल के लिए भेजने का निर्देश दिया है। इससे पहले, मंत्रालय ने सभी विक्रेताओं और कर्मचारियों को प्लास्टिक का इस्तेमाल घटाने के लिए फिर इस्तेमाल होने वाले बैग के प्रयोग का निर्देश दिया था। कुछ अर्थशास्त्री ग्रामीण मांग बढ़ाने और वित्तीय प्रोत्साहन देने का सुझाव दे रहे जबकि कुछ का कहना है कि भारत में वास्तविक ब्याज दर लंबे समय तक ऊंची होने से उपभोग और निवेश की मांग प्रभावित हुई है। आर्थिक सुस्ती गहराने के मूल में हालांकि, सभी का इशारा मांग की कमी होने की तरफ ही रहा है लेकिन मांग पैदा करने और अर्थव्यवस्था में गतिविधियां बढ़ाने के बारे में उनके सुझाव अलग अलग रहे हैं। उल्लेखनीय है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर छह साल के निम्न स्तर, पांच प्रतिशत पर पहुंच गई। रिजर्व बैंक ने अपनी ताजा मौद्रिक समीक्षा में इस वित्त वर्ष की आर्थिक वृद्धि का अनुमान सात प्रतिशत से घटाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया। कुछ वैश्विक एजेंसियों ने इसके 6.5 प्रतिशत या उससे भी कम रहने का अनुमान जताया है। नेशनल इंस्टीट्यूट आफ पब्लिक फाइनेंस एण्ड पालिसी के प्रोफेसर एन आर भानुमूर्ति कहते हैं, ‘इस समय सरकार को सड़क, रेलवे, बिजली, ग्रामीण एवं शहरी आवास क्षेत्र की तमाम बड़ी परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाना होगा ताकि आर्थिक गतिविधियों में तेजी आये।’ उन्होंने कहा, ‘आर्थिक सुस्ती तो काफी पहले शुरू हो गई थी हालांकि, सरकार इसे अब महसूस कर रही है। इसकी वजह चक्रीय और संरचनात्मक दोनों तरह की हैं।’ भानुमूर्ति ने कहा, ‘आपको वित्तीय प्रोत्साहन देने होंगे, मौद्रिक उपाय का फिलहाल असर नहीं होगा। सरकार के वित्तीय प्रोत्साहनों का स्वरूप 2008- 09 की तरह नहीं होना चाहिये। सीधे उपभोक्ता खपत बढ़ाने वाले उपाय यदि होंगे तो मुद्रास्फीति बढ़ सकती है इसलिये इससे बचना होगा। पूर्ववर्ती योजना आयोग में प्रधान आर्थिक सलाहकार रहे प्रणव सेन इस मामले में सीधे मांग की कमी को आर्थिक सुस्ती की वजह बताते हैं। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र में मांग कमजोर बनी हुई है। शहरी गरीब लोगों की आमदनी कम है। इससे जनसंख्या के एक बड़े तबके की मांग कमजोर बनी हुई है। उनका स्पष्ट मानना है कि अर्थव्यवस्था में आपूर्ति की कोई तंगी नहीं है बल्कि मांग की कमी बनी हुई है। उनका सुझाव है कि किसानों को सालाना 6,000 रुपये देने की पीएम किसान योजना पर तेजी से अमल होना चाहिये। ग्रामीण स्तरीय परियोजनाओं जैसे कि ग्रामीण सड़क योजना, लघु सिंचाई योजना, सस्ती आवास योजना पर काम तेज होना चाहिये। इनमें स्थानीय ठेकेदारों और स्थानीय कामगारों को काम दिया जाना चाहिये। वहीं सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट रिसर्च (सीजीडीआर) के निदेशक डा. कन्हैया सिंह ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मुख्यत: आपूर्ति प्रेरित है। देश में मानसून अच्छा रहता है तो बाजार में गर्मी आती है। इस तरह उद्योग धंधे मानसून की चाल पर निर्भर करते हैं। उन्होंने आर्थिक सुस्ती के स्वरूप पर एक अलग नजरिया पेश करते हुए कहा कि अप्रैल- जून 2019 की पहली तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि कम रही है लेकिन बिजली क्षेत्र की वृद्धि 8.62 प्रतिशत पर अच्छी रही है। विनिर्माण क्षेत्र अच्छा नहीं कर रहा है लेकिन अन्य क्षेत्र अपेक्षाकृत ठीक प्रदर्शन कर रहे हैं इसको समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा बिजली क्षेत्र का प्रदर्शन अच्छा है तो इसकी खपत हुई उत्पादन भी हुआ लेकिन बिक्री नहीं हुई। यह पिछले साल के ऊंचे स्तर का भी असर हो सकता है। भानुमूर्ति कहते हैं कि विदेशी जोखिम को कम करने के लिये घरेलू क्षेत्र पर ध्यान देना होगा। घरेलू बचत को बढ़ावा दिया जाना चाहिये। अवसंरचना बॉंड, कर मुक्त सुविधा वाले बॉंड जारी किये जा सकते हैं। प्रणव सेन का कहना है कि समस्या मांग की है जबकि सरकार के उपाय आपूर्ति बढ़ाने की तरफ अधिक हैं। बैंकों में नकदी उपलब्ध है लेकिन मांग नहीं है। कन्हैया सिंह कहते हैं कि भारत जैसे देश में मुद्रास्फीति को लक्षित दायरे में बांधना ठीक नहीं है। पिछले डेढ़ दो साल में मुद्रास्फीति कम रहने के बावजूद रिजर्व बैंक की रेपो दर को ऊंचा रखा गया। इसमें कमी नहीं की गई परिणामस्वरूप वास्तविक ब्याज दर ऊंची बनी रही। इसका निवेश पर असर पड़ता है। सिंह का मामना है कि 2019-20 की जीडीपी वृद्धि सात प्रतिशत के आसपास रहेगी। प्रणव सेन ने कहा वृद्धि 5.5 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी लेकिन भानुमूर्ति का मानना है कि यह 6 से 6.5 प्रतिशत के दायरे में रह सकती है।
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जमीन का जीवन

करीब दो साल पहले आए एक अध्ययन के मुताबिक भारत की लगभग तीस फीसद जमीन खराब या बंजर होने की कगार पर है। पिछले कुछ दशकों के दौरान हमारे देश में खेती के लगातार घाटे का सौदा होने की समस्या पहले ही गंभीर होती गई है। इससे इतर एक बड़ी मुश्किल यह खड़ी हो गई है कि तेजी से शहरीकरण और ग्रामीण इलाकों में भी रिहाइशी इलाकों के विस्तार की वजह से जिस तरह खेती-योग्य जमीन का रकबा सिकुड़ रहा है, उसमें यह चिंता स्वाभाविक है कि आने वाले वक्त में अनाज उत्पादन की स्थिति क्या होगी! हालांकि देश में खेती के लायक जमीन की कमी नहीं है, लेकिन सच यह है कि इसमें एक बड़ा भूभाग बंजर है और उसकी कोई उपयोगिता नहीं है, बल्कि जमीन के बंजर होने का एक गंभीर असर पानी की उपलब्धता और उसके संरक्षण की कोशिशों पर भी पड़ता है। आमतौर पर आर्थिक गतिविधियों की चर्चा और उनके आंकड़ों से विकास की रफ्तार का अंदाजा परोसने के क्रम में भूमि के बंजर होने और उससे पैदा होने वाली समस्याओं का आकलन पीछे छूट जाता है। जबकि अनाज उत्पादन से लेकर पानी और पेड़-पौधों तक का संरक्षण आर्थिक चक्र के साथ अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है। ऐसे में प्रधानमंत्री ने बंजर जमीन की समस्याओं को लेकर चिंता जाहिर की है। गौरतलब है कि सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र के ताजा सम्मेलन (यूएनसीसीडी) की एक सभा में कहा कि 2015 और 2017 के दौरान भारत में पेड़ और जंगल के दायरे में करीब आठ लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है और इससे बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने में बड़ी मदद मिलेगी। इसके अलावा, उन्होंने यह घोषणा भी की कि अब से लेकर सन 2030 तक भारत अपनी जमीन को उपजाऊ बनाने के मकसद से खेती के कुल रकबे का भी विस्तार करेगा और उसे 2.1 करोड़ हेक्टेयर से बढ़ा कर 2.6 करोड़ हेक्टेयर करेगा। जाहिर है, यह न केवल देश में भूमि की उपयोगिता के मद्देनजर बेहद अहम घोषणा है, बल्कि इससे जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता और भूमि क्षरण जैसे मामलों में भी चुनौतियों का सामना करने के लिए एक ठोस भूमिका बनेगी। एक अहम चिंता यह भी है कि पिछले कुछ दशकों में प्लास्टिक के बेतहाशा उपयोग ने सही-सलामत जमीन को भी लगभग बंजर बना दिया है। इसी के मद्देनजर सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने इस पर भी चिंता जताई कि अगर प्लास्टिक के बढ़ते इस्तेमाल को नहीं रोका गया तो भूक्षरण का एक अन्य स्वरूप सामने आएगा और नतीजे में जमीन की उत्पादकता को फिर से हासिल करना संभव नहीं रह पाएगा। करीब दो साल पहले आए एक अध्ययन के मुताबिक भारत की लगभग तीस फीसद जमीन खराब या बंजर होने की कगार पर है। यानी इस दिशा में जताई जाने वाली चिंता से आगे अगर ठोस पहल नहीं की जाती है तो आने वाले वक्त में समूचे देश को एक बड़े संकट से दो-चार होना पड़ सकता है। तकनीक के विकास और विस्तार से बंजर जमीन को खेती योग्य या पेड़-पौधे लगाने के लायक बनाया जा सकता है। मगर दूसरी ओर विकास का हवाला देकर अगर वन क्षेत्र की संरक्षित भूमि की अहमियत को नजरअंदाज किया जाता है और खनन या दूसरी वजहों से पेड़ों को काटने को मंजूरी दी जाती है तो उसके असर का आकलन भी कर लिया जाना चाहिए। यों भी, जब बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने की दिशा में कारगर पहलकदमी होती है तो वह जल संकट को दूर करने में भी मददगार साबित होगी। यह किसी से छिपा नहीं है कि हाल के वर्षों में भारत सहित दुनिया के कई देश जिस तरह पानी की कमी की चपेट में आए हैं, वह भविष्य को लेकर एक गंभीर चेतावनी है।
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इस लिक्विड से आधे मिनट से भी कम समय में ठीक हो जाएगा बाइक-कार का पंक्चर

नई दिल्ली: कार या बाइक चलाते समय बीच रास्ते में पंक्चर हो जाए तो आपको काफी दिक्कत हो सकती है और इसमें आपका काफी समय बर्बाद हो जाता है, लेकिन आज हम आपको ऐसे प्रोडक्ट के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपकी कार और बाइक के टायर को महज आधे मिनट में ठीक कर देता है। तो चलिए आज आप भी जान लीजिए इस ख़ास लिक्विड के बारे में। दरअसल हाल ही में बाइक सील नाम की कंपनी ने एक चमत्कारी लिक्विड लांच किया है जिससे कुछ ही सेकंडों में बाइक के पंक्चर को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। इस प्रोडक्ट की खास बात यह है कि इसे इस्तेमाल करने के लिए आपको किसी मैकेनिक की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। इसे आप खुद ही इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे करते हैं इस प्रोडक्ट का इस्तेमाल यह प्रोडक्ट लिक्विड फॉर्म में आता है इसलिए आप इसे बड़ी आसानी से अपनी बाइक के साथ कैरी कर सकते हैं और बाइक पंक्चर होने के कुछ ही मिनटों में इसे ठीक भी कर सकते हैं। इसके लिए बस आपको अपने टायर में उस जगह पर इस लिक्विड को डालना होता है जहां पर कील या फिर कोई नुकीली चीज से छेद हो गया हो। इसके बाद आपको बस अपने टायर को वैसे ही छोड़ देना है क्योंकि बाकी का काम ये चमत्कारी लिक्विड अपने आप कर देता है और फिर आप अपनी बाइक को ले जा सकते हैं। इतनी है कीमत मार्केट में लॉन्च हो चुके इस प्रोडक्ट को आप ऑनलाइन शॉपिंग साइट पर बड़ी ही आसानी से 2500 रुपये में खरीद सकते हैं। कीमत के हिसाब से यह एक अफोर्डेबल प्रोडक्ट है जो बाइकर्स और कार मालिकों के लिए वरदान है।
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81 साल का बुजुर्ग बन अमेरिका जाने के लिए एयरपोर्ट पहुंचा युवक, एक गलती ने खोली सारी पोल

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे(आईजीआई) से एक 32 साल के युवक की गिरफ्तारी की खबर सामने आई है, जो अपने आप में बेहद हैरान करने वाली है। वैसे तो आईजीआई एयरपोर्ट पर किसी न किसी वजह से लोगों की गिरफ्तारी होती ही रहती है लेकिन इस युवक की गिरफ्तारी का मामला थोड़ा अजीब है। दरअसल यह युवक इसलिए गिरफ्तार हुआ क्योंकि ये एक 81 साल के बुजुर्ग के पासपोर्ट पर अमेरिका जाना चाहता था। सिर्फ यही नहीं इस युवक ने 81 साल का दिखने के लिए उक्त 81 साल के बुजुर्ग के जैसे हुलिया भी बना लिया। युवक ने न सिर्फ बुजुर्ग जैसे बाल और दाढ़ी को सफेद किया बल्कि उसके जैसे कपड़े और चश्मा भी पहन लिया। आगे जानिए फिर ऐसा क्या हुआ जो उस युवक का राज खुल गया।
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करपका विनायक मंदिर, यहां गणेश प्रतिमा की हैं सिर्फ दो भुजाएं

नई दिल्ली। देशभर में भगवान गणेश के कई प्राचीन और खूबसूरत मंदिर हैं। ऐसा ही एक मंदिर तमिलनाडु के तिरुपथुर तालुक में पिल्लरेपट्टी में स्थित है। यह करपका विनायक मंदिर के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि यहां गणेश भगवान की मूर्ति पर की गई नक्‍काशी चौथी शताब्दी के आसपास की गई थी। मंदिर का ध्यान चेट्टियार समुदाय द्वारा रखा जाता है और यह इस समुदाय के नौ सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है। 1091 और 1238 ई. के बीच बना मंदिर करपका विनायक मंदिर भगवान गणेश को समर्पित एक प्राचीन और गुफा मंदिर है। इस मंदिर को पिल्लरेपट्टी पिलर मंदिर के रूप में भी जाना जाता है। यहां एक गुफा है जिसे एक ही पत्थर को काटकर बनाया गया है। ये गुफा भी भगवान गणेश को समर्पित है। गुफा में भगवान शिव और अन्य देवताओं के पत्थर से बनाई गई मूर्तियां हैं। मंदिर की गुफा एक ही पत्थर से काटकर बनाई गई है। मंदिर के गर्भगृह में अंदर पर्याप्त रोशनी के लिए तेल के बड़े-बडे दीपकों का प्रयोग किया जाता है। यहां पाए गए शिलालेखों के अनुसार यह मंदिर 1091 और 1238 ई. के बीच बनाया गया था। पांड्या राजाओं ने करवाया था इसका निर्माण पांड्या राजाओं द्वारा पिल्लरेपट्टी पहाड़ी पर मंदिर का निर्माण किया गया है। मंदिर में अन्य तीर्थस्थान भगवान शिव, देवी कात्यायनी, नागलिंगम और पसुपथिस्वरार को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि देवी कात्यायनी की प्रार्थना करने से कुंवारी लड़कियों का विवाह जल्दी हो जाता है और भगवान नागलिंगम की पूजा करने से संतान की प्राप्ति होती है। वहीं धन प्राप्ति और सुख- समृद्धि के लिए पसुपथिस्वरार की पूजा की जाती है। सोने से मढ़ी हुई है गणेश प्रतिमा यहां गणेशजी की 6 फीट लंबी चट्टान की मूर्ति है। आमतौर पर गणेशजी के हर स्वरूप में चार भुजाएं होती हैं किंतु इस मंदिर में स्थापित मूर्ति में गणेशजी की सिर्फ दो ही भुजाएं हैं। मुख्य प्रतिमा सोने से मढ़ी हुई है। यहां गणेशजी की सूंड दाईं ओर है जिसकी वजह से उन्हें वैलपूरी पिल्लईर भी कहा जाता है। यहां पर सभी देवताओं की मूर्तियों का मुख उत्तरी दिशा की ओर है। गणेशजी का उत्तर की ओर मुख करना और दाईं तरफ सूंड का होना काफी शुभ माना जाता है। यह समृद्धि, धन और ज्ञान का कारक होता है।
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शख्स ने चुराई क्रेडिट कार्डो की जानकारी- 1300 कार्डों का नंबर, नाम, एक्सपायरी डेट और कोड किया याद

नई दिल्ली: पुलिस के अनुसार, तनीगुची कोट्टो सिटी के एक मॉल में ब्योरा दर्ज करने का पार्ट-टाइम जॉब करता था। जापानटुडे डॉट कॉम की रविवार की रिपोर्ट में कहा गया कि जब भी कोई ग्राहक क्रेडिट कार्ड से भुगतान करता था, तो संदिग्ध कथित तौर पर उनकी खरीद की प्रक्रिया के दौरान उनका 16 अंकों का नंबर, नाम, एक्सपायरी डेट और सुरक्षा कोड याद कर लेता था। कोट्टो सिटी के मॉल में काम करने वाले 34 वर्षीय क्लर्क पर आरोप है कि उसने कथित तौर पर ग्राहकों के 16 अंकों के क्रेडिट कार्डस की जानकारियों को याद किया और फिर उससे ऑनलाइन खरीदारी की। एएनएन न्यूज के अनुसार, हालांकि भले ही आरोपी की स्मृति-क्षमता का स्तर शरलॉक होम्स के स्तर का था, लेकिन उसने क्रेडिट कार्ड्स की जानकारियों का इस्तेमाल करके 270,000 येन (लगभग 2,500 डॉलर) मूल्य के दो बैग खरीदे, जिसके लिए उसने मेल पर अपना पता सार्वजनिक किया। शिकायत के बाद पुलिस सीधे वहां गई और उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को एक नोटबुक मिली है, जिसमें उसने कई लोगों के नाम और उनसे जुड़ी जानकारियां लिखी हैं।
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20वीं बार बच्चे को जन्म देगी महिला, 38 साल की उम्र में हैं 11 बच्चे

मुंबई। महाराष्ट्र की एक महिला 20वीं बार बच्चे को जन्म देने वाली है। डॉक्टरों ने सोमवार को यह जानकारी दी। डॉक्टरों ने बताया कि बीड जिले की 38 वर्षीय यह महिला इससे पहले अब तक 19 बार गर्भवती हो चुकी है और अब वह सात माह की गर्भवती है। खानाबदोश गोपाल समुदाय से आने वाली लंकाबाई खराट को स्थानीय अधिकारियों ने देखा, जो उसके 20वें गर्भधारण के बारे में जानकर हैरान थे। बीड जिला के सिविल सर्जन डॉ. अशोक थोराट ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘इस वक्त उसके 11 बच्चे हैं और 38 साल की उम्र में वह 20वीं बार मां बनने वाली है।’ अन्य डॉक्टर ने बताया कि जब हमें उसके गर्भावस्था का पता चला तो उसे सरकारी अस्पताल लाया गया और सभी जरूरी जांच की गयी। वह 20वीं बार गर्भवती हुई है। जच्चा और बच्चा अब तक स्वस्थ हैं। उसे दवाइयां दी गई हैं और संक्रमण से बचने के लिये स्वच्छता और अन्य बातों की सलाह दी गई है। थोराट ने कहा, ‘पहली बार वह अस्पताल में बच्चे को जन्म देगी। इससे पहले उसने घर पर ही बच्चे को जन्म दिया था। किसी भी खतरे से बचने के लिये हमने उसे स्थानीय सरकारी अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी है।’ खराट बीड जिले के मजलगांव तहसील में केसापुरी इलाके की रहने वाली है। बीड जिला कलेक्टरेट से एक अधिकारी ने बताया, ‘वह गोपाल समुदाय से संबंधित है जो आमतौर पर भीख मांगने या मजदूरी अथवा छोटे-मोटे काम करते हैं। वे एक जगह से दूसरी जगह पर जाते रहते हैं।’
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मोदी सरकार के 100 दिन को कांग्रेस ने बताया- निरंकुशता, अव्यवस्था, अराजकता

नई दिल्ली। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के 100 दिन पूरे होने पर केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाना, तीन तलाक खत्म करना इस अवधि में किए गए सबसे महत्वपूर्ण काम हैं, वहीं कांग्रेस ने रविवार को यह कहते हुए निशाना साधा कि इस कार्यकाल को तीन शब्दों 'निरंकुशता, अव्यवस्था और अराजकता' में बयां किया जा सकता है। मोदी सरकार के 100 दिन पूरे होने पर विपक्षी पार्टी ने इस अवधि को अर्थव्यवस्था के लिए बुरा वक्त बताने के लिए अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर कई आंकड़े पोस्ट किए। कांग्रेस ने कहा, 'तीन शब्द जो बीजेपी सरकार के दूसरे कार्यकाल के शुरुआती 100 दिनों की व्याख्या करते हैं, वे हैं - निरंकुश शासन, अव्यवस्था और अराजकता।' पार्टी ने कहा, 'आठ क्षेत्रों में दो प्रतिशत से नीचे का विकास दर दर्ज किया गया और हमारी वित्त मंत्री अब भी इस बात को स्वीकार करने से इनकार कर रही हैं कि हमारी अर्थव्यवस्था तेजी से गिर रही है। अगर बीजेपी लापरवाही एवं धोखेबाजी के इस रास्ते पर चलती रही तो हम मंदी की तरफ बढ़ जाएंगे।' कांग्रेस ने कहा कि समस्याओं के समाधान के लिए पहले उनकी पहचान की जाती है जिसमें यह सरकार विफल रही है। पार्टी ने आरोप लगाया, 'बीजेपी राजनीति 101 : जब सब कुछ नाकाम रहे, विपक्ष के हाई प्रोफाइल नेताओं को गिरफ्तार करें और उम्मीद जताएं कि जनता इस पर गौर नहीं करेगी कि आप बाकी हर जगह विफल रहे हैं।' साथ ही कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि बीजेपी 'संसद को नोटिस बोर्ड' की तरह लेती है क्योंकि वहां विधेयकों पर चर्चा नहीं की जाती बल्कि उन्हें महज औपचारिकता पूरी करने के लिए पेश कर दिया जाता है। कांग्रेस ने हैशटेग '100 डेज नो विकास' के साथ एक ट्वीट में कहा, 'यह लोकतंत्र के कमजोर होने का संकेत है।'
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देश में एक भी घुसपैठिए को नहीं रहने देंगे: शाह

गुवाहाटी। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि देश में किसी भी ''अवैध प्रवासी को रहने की अनुमति नहीं दी जायेगी और असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) की कवायद ''समयबद्ध तरीके से पूरी की गई। शाह पूर्वोत्तर परिषद (एनईसी) के अध्यक्ष भी है। वह यहां एनईसी के 68वें पूर्ण सत्र के उद्घाटन संबोधन में आठ पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों को संबोधित कर रहे थे। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा, ''विभिन्न लोगों ने एनआरसी पर कई तरह के सवाल उठाये। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि भारत सरकार किसी भी अवैध प्रवासी को देश में रहने की अनुमति नहीं देगी। यह हमारी प्रतिबद्धता है। हाल में एनआरसी की सूची जारी होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ''इसे समयबद्ध ढंग से पूरा किया गया है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि बैठक को केन्द्रीय मंत्री और एनईसी के उपाध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने भी संबोधित किया। एनआरसी राज्य समन्वयक कार्यालय ने 31 अगस्त को कहा था कि एनआरसी में शामिल होने के लिए 3,30,27,661 लोगों ने आवेदन दिया था। इनमें से 3,11,21,004 लोगों को शामिल किया गया है और 19,06,657 लोगों को बाहर कर दिया गया है।
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