राष्ट्र

शाहीन बाग में लगाई गई धारा 144, भारी पुलिस बल तैनात

नई दिल्‍ली नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और NRC के विरोध में देश की राजधानी दिल्‍ली के शाहीन बाग इलाके में दो महीने से भी ज्‍यादा वक्‍त से लोग धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं. इस बीच, हिन्‍दू सेना ने शाहीन बाग में जवाबी विरोध-प्रदर्शन का ऐलान किया था. हालांकि, हिन्‍दू सेना ने 29 फरवरी को इस घोषणा को वापस ले लिया था. इसके बावजूद दिल्‍ली पुलिस ने एहतियातन इलाके में दिनभर के लिए धारा 144 लगा दिया है, ताकि एक जगह ज्‍यादा लोग इकट्ठा न हो सकें. बता दें कि उत्‍तर-पूर्वी दिल्‍ली में हिंसा के खिलाफ शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों ने 1 मार्च को ही शांति मार्च निकालने की घोषणा की है. शाहीन बाग मामले में दिल्ली पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर डीसी श्रीवास्तव ने कहा कि एहतियात के तौर पर बड़ी संख्या में पुलिसबल की तैनाती की गई है. पुलिस का मकसद है कि शांति और कानून-व्यवस्था बनी रहे. किसी भी तरह की अप्रत्याशित घटना के लिए पुलिस ने ये तैयारियां की हैं. दरअसल, हिन्‍दू सेना ने 1 मार्च को शाहीन बाग में विरोध-प्रदर्शन का ऐलान किया था. कई और छोटे-मोटे संगठनों ने इसकी घोषणा की थी. पुलिस ने बताया कि इस ऐलान के बाद उन्‍होंने हिन्‍दू सेना समेत अन्‍य संबंधित संगठनों से इस बाबत बातचीत कर उन्‍हें विरोध-प्रदर्शन न करने के लिए मनाया लिया गया. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि उत्‍तर-पूर्वी जिले में भड़की हिंसा को देखते हुए शाहीन बाग में एहतियातन धारा 144 लगा दिया गया है. पुलिस ने बताया कि शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों को इससे कोई दिक्‍कत नहीं है, अन्‍य शख्‍स के यहां आने पर उसे हिरासत में ले लिया जाएगा. शाहीन बाग में दो महीने से भी ज्‍यादा वक्‍त से सीएए-एनआरसी के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन चल रहा है. प्रदर्शनकारी के बीच सड़क पर बैठने से इस मार्ग पर यातायात कई सप्‍ताह से ठप है. यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच चुका है. शीर्ष अदालत ने मामले की समाधान के लिए वार्ताकार भी नियुक्त किया था, जिन्‍होंने अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दी है. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई को 23 मार्च तक के लिए टाल दिया है.
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भव्य राम मंदिर बनाने के लिए ट्रस्ट की पहली बैठक आज, कब से और कैसे बनेगा मंदिर फैसला संभव

अयोध्या/नई दिल्ली 
अयोध्या में राम मंदिर कब और कैसे बनेगा इसपर पहली बैठक आज होने जा रही है। यह मीटिंग सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्र सरकार द्वारा गठित राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की होगी। इसमें मंदिर निर्माण शुरू करने के मुहूर्त समेत कई मुद्दों पर चर्चा होगी। सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट के कई सदस्य सरयू तट तक राम कॉम्प्लेक्स बनाने के पक्ष में हैं। बैठक में इसके लिए और जमीन लेने पर भी चर्चा होगी। 

जनता से पैसा लेंगे या नहीं? इसपर चर्चा 
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली बैठक दिल्ली में ग्रेटर कैलाश-1 स्थित कार्यालय में बुलाई गई है। इस दौरान आम जनता से धन का सहयोग लेने जैसे मुद्दों पर भी फैसला लिया जा सकता है, ताकि भविष्य में किसी तरह का विवाद न हो। ट्रस्ट इस पर भी विचार करेगा कि निर्माण कार्य के दौरान रामलला की मूर्ति कहां रखी जाए। बैठक में अयोध्या के मास्टर प्लान पर भी चर्चा होगी। 
इस मीटिंग के लिए ट्रस्ट के तीन सदस्य महंत दिनेंद्र दास, राजा विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र और डॉ. अनिल मिश्र मंगलवार को अयोध्या से रवाना हो गए थे। ट्रस्ट के सदस्यों से निमंत्रण मिलने पर राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास भी दिल्ली रवाना हुए। नृत्य गोपाल दास के अलावा वीएचपी के चंपत राय भी बैठक में शामिल होंगे। 

2 अप्रैल से मंदिर निर्माण शुरू होगा? 
इस बात की संभावना प्रबल है कि राम नवमी यानी 2 अप्रैल से मंदिर निर्माण शुरू करने की तारीख का ऐलान हो सकता है। महंत नृत्य गोपाल दास को ट्रस्ट में शामिल करने को लेकर भी बैठक में फैसला हो सकता है। केंद्र की मोदी सरकार ने इसी महीने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्यों का ऐलान किया था। 15 सदस्यीय ट्र्स्ट में अभी के परासरन समेत 9 सदस्य हैं। 
भूमि पूजन 25 मार्च से 8 अप्रैल के बीच 
ट्रस्ट सबसे पहले मंदिर निर्माण की तारीख तय करेगा। भूमि पूजन 25 मार्च से 8 अप्रैल के बीच हो जाएगा, लेकिन निर्माण कार्य शुरू करने में अभी वक्त लगेगा। ट्रस्ट मंदिर निर्माण स्थल की मिट्टी की जांच करवाने के लिए भूगर्भ शास्त्रियों और वास्तु शास्त्रियों से राय ले रहा है। मंदिर निर्माण का जिम्मा किस कंपनी को सौंपा जाए, इस मुद्दे पर भी बैठक में फैसला लिया जाएगा। मंदिर को भव्य बनाने पर भी विचार होगा। दावा है कि ट्रस्ट अब चाहता है कि मंदिर भव्य बने और मॉडल को बदलना भी ना पड़े। हालांकि, ट्रस्ट के सदस्य कामेश्वर चौपाल का कहना है कि इतने सारे कामों को एक बैठक में तय नहीं किया जा सकता। 

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भारत दौरे से पहले बोले ट्रंप, मोदी मुझे बहुत पसंद, लेकिन अभी भारत के साथ ट्रेड डील नहीं

नई दिल्ली/वॉशिंगटन 
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर आशंका के बादल मंडरा गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भारत के साथ ट्रेड डील पर आशंका जाहिर की है। ट्रंप ने कहा कि वह भारत के साथ एक बहुत बड़ी ट्रेड डील करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें नहीं मालूम कि यह अमेरिकी चुनाव से पहले हो पाएगाी या फिर नहीं। हालांकि ट्रंप ने पीएम मोदी को लेकर कहा कि वह उन्हें बहुत पसंद करते हैं। भारत और अमेरिकी के व्यापारिक रिश्ते पर ट्रंप ने कहा कि भारत ने हमारे साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया है। लेकिन उन्होंने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें भारत दौरे से काफी उम्मीदें हैं। 

बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप 24 फरवरी को भारत दौरे पर आ रहे हैं। माना जा रहा था कि अमेरिका और भारत के बीच इस दौरान एक बड़े द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। ट्रंप से जब इस बात को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'हम भारत के साथ एक बहुत बड़ी ट्रेड डील करना चाहते हैं। हम यह करेंगे। मुझे नहीं पता कि क्या यह अमेरिकी चुनाव से पहले संभव हो पाएगी। लेकिन हम भारत के साथ एक बड़ी ट्रेड डील करने जा रहे हैं।' सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि रॉबर्ट लाइटहाइजर अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ भारतीय दौरे पर नहीं आ रहे हैं। हालांकि, अधिकारियों ने इसे पूरी तरह खारिज नहीं किया है। 

भारत के साथ ट्रेड संबंधों से असंतोष जाहिर करते हुए उन्होंने कहा, 'भारत ने हमारे साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया है।' हालांकि उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ की और बताया कि वह भारतीय दौरे के लिए उत्सुक हैं। ट्रंप ने कहा, 'मैं पीएम मोदी को बहुत पसंद करता हूं। उन्होंने मुझे बताया कि एयरपोर्ट और कार्यक्रम स्थल के बीच 70 लाख लोग होंगे। स्टेडियम, मुझे पता है कि यह सेमी अंडर कंस्ट्रक्शन है, लेकिन यह दुनिया का सबसे बड़ा स्टेडियम होगा। इसलिए यह बहुत दिलचस्प होगा।....मुझे आशा है आप इसे पसंद करेंगे।' 

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निर्भया का गुनाहगार मुकेश माँ से मिलकर फफक पड़ा

नई दिल्ली. निर्भया गैंगरेप केस के दोषियों को 22 जनवरी को फांसी की सज़ा दी जाएगी. फांसी से पहले दोषियों के परिवारवाले इनसे मिलने के लिए तिहाड़ जेल पहुंच रहे हैं. इसी कड़ी में शनिवार को जेल प्रशासन ने दोषी मुकेश सिंह को परिवारवालों को मिलने की इजाजत दी. अंग्रेजी अखबार के द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, मां से मिलते ही वह भावूक हो गया और फूट-फूटकर रोने लगा. कहा जा रहा है कि मुलाकात के दौरान वो कई बार रोया, लेकिन इस दौरान परिवारवालों ने उसे ये समझाया कि सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पेटिशन डाला गया है और ऐसे में जल्द सब ठीक हो जाएगा. साथ ही उन्होंने दया याचिका के बारे में भी बताया. जेल अधिकारियों के मुताबिक ये फिलहाल आखिरी मुलाकात जैसा नहीं था. नियमों के मुताबिक उन्हें हफ्ते में दो बार परिवार से मिलने की इजाजत दी गई है. बदल गया व्यवहार जैसे-जैसे फांसी की तारीख नज़दीक आ रही है दोषियों का डर बढ़ता जा रहा है. कहा जा रहा है कि निर्भया के चारों दोषियों ने फिलहाल जेल में किसी से भी बातचीत करना बंद कर दिया है. पिछले हफ्ते जेल कर्मी से किसी बात पर बहस के दौरान हाथापाई की नौबत भी आ गई थी. सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका बता दें कि निर्भया केस में दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट से डेथ वारंट जारी होने के बाद दो दोषियों की ओर से क्यूरेटिव याचिका दायर की गई है. सुप्रीम कोर्ट में इस पर 14 जनवरी को सुनवाई होगी. इसी दिन पता चल जाएगा कि निर्भया के दोषियों को 22 जनवरी को फांसी दी जाएगी या फिर अभी दोषियों को कुछ दिन की और मोहलत मिलेगी. याचिका में फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग की गई है. विनय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट सहित सभी अदालतों ने मीडिया और नेताओं के दबाव में आकर उन्हें दोषी ठहराया है. गरीब होने के कारण उसे मौत की सजा सुनाई गई है.
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हमने नागरिकता कानून नागरिकता देने के लिए बनाया, छीनने के लिए नही: मोदी

कोलकाता. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर कोलकाता में हैं. पीएम मोदी ने रविवार सुबह रामकृष्ण मिशन के मुख्यालय बेलूर मठ में ध्यान लगाया. प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को कोलकाता पहुंचे थे और रात उन्होंने मठ में ही बिताई थी. पीएम मोदी की मठ में ठहरने की मुख्य वजह रविवार को स्वामी विवेकानंद जयंती बताई जा रही है. गौरतलब है कि पीएम मोदी शनिवार शाम कोलकाता पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने पोर्ट ट्रस्ट की 150वीं सालगिरह के कार्यक्रम में हिस्सा लिया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा मैं पश्चिम बंगाल सरकार का आभारी हूं, जिन्होंने प्रोटोकॉल तोड़कर बेलूर मठ में रात बिताने का मौका दिया. उन्होंने कहा कि मेरा अतीत बेलूर मठ से जुड़ा है. बेलूर मठ में मुझे सिखाया गया था जनसेवा ही प्रभु सेवा है. पीएम मोदी ने कहा कि बेलूर मठ की धरती पर आना मेरे लिए तीर्थयात्रा करने जैसा है. उन्होंने कहा कि पिछली बार जब यहां आया था तो गुरुजी, स्वामी आत्मआस्थानंद जी के आशीर्वचन लेकर गया था. आज वो शारीरिक रूप से हमारे बीच विद्यमान नहीं हैं. लेकिन उनका काम, उनका दिखाया मार्ग, रामकृष्ण मिशन के रूप में सदा हमारा मार्ग प्रशस्त करता रहेगा. भारत सरकार ने रातों रात कोई कानून नहीं बनाया : पीएम मोदी बेलूर मठ में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा इस देश के युवाओं से भारत को ही नहीं दुनिया को भी बड़ी अपेक्षाएं हैं. नागरिकता कानून पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा, भारत सरकार ने रातों रात कोई कानून नहीं बनाया है. देश में इसको लेकर काफी चर्चा हुई, लेकिन इसको लेकर युवाओं में भ्रम फैलाया गया. इस कानून के मुताबिक किसी भी देश का कोई भी व्यक्ति जो भारत से आस्था रखता है वह भारत की नागरिक हो सकता है. पीएम मोदी ने कहा कि नागरिकता एक्ट किसी भी नागरिकता छीनता नहीं बल्कि नागरिकता देता है. उन्होंने कहा नागरिकता कानून को लेकर कुछ युवा गलतफहमी का शिकार हैं. युवाओं के मन में कुछ लोग भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं. पीएम मोदी ने कहा, हमने नागरिकता कानून का सरल किया. पीए मोदी ने कहा, मैं फिर कहूंगा, सिटिजनशिप एक्ट, नागरिकता लेने का नहीं, नागरिकता देने का कानून है और सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट, उस कानून में सिर्फ एक संशोधन है. उन्होंने कहा, इतनी स्पष्टता के बावजूद, कुछ लोग सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट को लेकर भ्रम फैला रहे हैं. मुझे खुशी है कि आज का युवा ही ऐसे लोगों का भ्रम भी दूर कर रहा है. उन्होंने कहा और तो और, पाकिस्तान में जिस तरह दूसरे धर्म के लोगों पर अत्याचार होता है, उसे लेकर भी दुनिया भर में आवाज हमारा युवा ही उठा रहा है. बेलूर मठ की स्थापना स्वामी विवेकानंद ने 1 मई 1897 में की थी बता दें कि हावड़ा जिले के बेलूर में स्थित इस मठ की स्थापना स्वामी विवेकानंद ने 1 मई 1897 में की थी. इस मठ को बनाने का उद्देश्य उन साधुओं-संन्यासियों को संगठित करना था जो रामकृष्ण परमहंस की शिक्षाओं में गहरी आस्था रखते थे. इन साधुओं और संन्यासियों का काम था कि वह रामकृष्ण परमहंस के उपदेशों को जनसाधारण तक पहुंचाए और गरीब, दुखी और कमजोर लोगों की नि:स्वार्थ भाग से सेवा कर सकें. इस मठ में स्वामी विवेकानंद और उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस की स्मृति संजो कर रखी गई है. प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर जताई थी खुशी गौरतलब है कि बेलूर मठ के स्वामी जी मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा, 'मैं काफी उत्साहित हूं कि आज और कल का दिन मैं बंगाल में बिताऊंगा. मुझे रामकृष्ण मिशन में समय व्यतीत करते हुए खुशी हो रही है वो भी तब जब हम स्वामी विवेकानंद की जयंती मना रहे हैं. बेलूर मठ हमेशा से ही मेरे लिए काफी खास रहा है.'इसके बाद उन्होंने एक और ट्वीट कर रामकृष्ण मिशन के पूर्व अध्यक्ष स्वामी आत्मास्थानंद जी महाराज को याद किया. उन्होंने कहा-एक शून्यता होगी. जिस व्यक्ति ने मुझे 'जन सेवा ही प्रभु सेवा' की सीख दी, वे स्वामी आत्मास्थानंद जी महाराज वहां नहीं होंगे. रामकृष्ण मिशन में उनकी उपस्थिति न होना अकल्पनीय है. आज पूरा देश मना रहा है स्वामी विवेकानंद की जयंती स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 में हुआ था. स्वामी विवेकानन्द वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे. उनका वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था. उन्होंने अमेरिका स्थित शिकागो में सन् 1893 में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था.
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सदी के महानायक को मिला बॉलीवुड का सबसे बड़ा सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार

नई दिल्‍ली. सदी के महानायक अमिताभ बच्‍चन को रविवार को राष्‍ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में दादा साहेब फाल्‍के पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया गया. उन्‍हें यह‍ पुरस्‍कार राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने प्रदान किया. इस पुरस्‍कार से सम्‍मानित होने के बाद उन्‍होंने देश की जनता और समारोह में मौजूद लोगों को धन्‍यवाद दिया. राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद से दादा साहेब फाल्‍के पुरस्‍कार लेने के बाद अमिताभ बच्‍चन ने मजाकिया अंदाज भी दिखाया. उन्‍होंने धन्‍यवाद संबोधन के दौरान कहा 'यह पुरस्‍कार देने की शुरुआत करीब 50 साल पहले हुई. मुझे बॉलीवुड इंडस्‍ट्री में काम करते हुए भी करीब 50 साल हो गए हैं. ऐसे में यह पुरस्‍कार की घोषणा के समय मेरे मन में यह बात आई कि क्‍या यह पुरस्‍कार देकर मुझे यह भी संकेत देना है कि भाई बस कर अब बहुत काम हो गया.' बता दें कि पहले अमिताभ बच्‍चन को दादा साहेब फाल्‍के पुरस्‍कार 23 दिसंबर को राष्‍ट्रीय फिल्‍म पुरस्‍कार समारोह में दिया जाना था. लेकिन उस समय उन्‍हें बुखार होने के कारण वह इसमें शामिल नहीं हो पाए थे. इसकी जानकारी उन्‍होंने ट्विटर पर दी थी. बच्चन ने ट्वीट किया था, ‘‘बुखार है...! यात्रा की इजाजत नहीं है...दिल्ली में कल राष्ट्रीय पुरस्कार में शामिल नहीं हो पाउंगा...बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है...मुझे अफसोस है...।’’ इस पुरस्कार का नाम धुंडीराज गोविंद फाल्के के नाम पर रखा गया है जिन्हें भारतीय सिनेमा का जनक कहा जाता है. यह पुरस्कार 1969 में शुरू हुआ था. इस पुरस्कार के तहत एक स्वर्ण कमल, एक शॉल और 10,00000 रुपये नकद प्रदान किए जाते हैं.
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अखिलेश कोई दस्तावेज नही दिखाएंगे ना हो कोई फॉर्म भरेंगे

अखिलेश यादव ने कहा कि हम सरकार को कोई दस्तावेज नहीं दिखाएंगे। हम इसी देश के नागरिक हैं। भाजपा के लोग बेरोजगारी और अर्थव्यवस्था से लोगों का ध्यान हटाने के लिए ये सब कर रहे हैं। गांवों में लोगों के पास दस्तावेज नहीं हैं वो कैसे प्रमाणित करेंगे कि वो इसी देश के रहने वाले हैं। मैं अपना कोई भी दस्तावेज नहीं दिखाऊंगा। अखिलेश ने कहा कि राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर देश के गरीब, मुसलमान और माइनॉरिटी के खिलाफ है।
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6 हिन्दू नेताओ ने सरकार से मांगी सुरक्षा

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 18 अक्टूबर को हिंदू समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश तिवारी की हत्या ने तीखे तेवरों के लिए चर्चित अन्य कई हिंदू नेताओं को विचलित कर दिया है। अब वे अपनी सुरक्षा को लेकर खासे चिंतित नजर आ रहे हैं। ऐसे नेता, भाजपा के बड़े नेताओं से संपर्क कर सुरक्षा की सिफारिश कराने के साथ सीधे गृह मंत्री अमित शाह से लेकर राज्य सरकारों को पत्र लिख रहे हैं। भाजपा के सूत्रों ने आईएएनएस से कहा कि अपने बयानों से सुर्खियों में रहने वाले आधे दर्जन नेता सुरक्षा मांग चुके हैं। वहीं कुछ ऐसे भी लोग हैं, जिन्हें न धमकी मिली है और न उन्होंने खुद सुरक्षा मांगी है, बल्कि उनके समर्थक इसके लिए गुहार लगा रहे हैं। सुरक्षा मांगने वाले हिंदू नेताओं में सबसे चर्चित नाम साध्वी प्राची का है। भाजपा अध्यक्ष व गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पत्र लिखकर वह सुरक्षा की गुहार लगा चुकी हैं। उन्होंने कहा है कि पिछले कुछ दिनों से हरिद्वार स्थित उनके आश्रम के आसपास कुछ संदिग्ध लोग टहलते मिले हैं, अनहोनी की आशंका है। साध्वी प्राची ने सीमा पार के आतंकी संगठनों के निशाने पर खुद के होने की बात कही
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अब स्टेशनों पर कुल्हड़ में चाय-लासी

नई दिल्ली। प्लास्टिक से निजात दिलाने और पर्यावरण को अनुकूल बनाने की दिशा में भारतीय रेलवे ने 400 स्टेशनों पर चाय और लस्सी को मिट्टी के कुल्हड़ों में देने का निर्णय किया है। यहाँ यह बात उलेखनीय है कि दो दिन पहले भी रेलवे ने पीने के पानी की बोतलों को स्क्रैप करने के लिए मोबाइल रिचार्ज की सुविधा देने की बात की थी। इसके लिए खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) से बातचीत की गई है। इस कदम से जहां एक तरफ स्थानीय और पर्यावरण अनुकूल उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा, प्लास्टिक के उपयोग पर अंकुश लगेगा वहीं दूसरी तरफ कुम्हारों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। केवीआईसी के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना ने पीटीआई -भाषा से कहा कि रेलवे की इस पहल से उत्साहित आयोग कुम्हारों के बीच 30,000 इलेक्ट्रिक चाक का वितरण करने का फैसला किया है। साथ ही मिट्टी के बने सामानों को पुनर्चक्रमण और नष्ट करने के लिये मशीन (ग्राइंडिंग मशीन) भी उपलब्ध कराएगा। मालूम हो कल प्रधानमंत्री मोदी ने मथुरा में कहा था कि प्लास्टिक के इस्तेमाल को 2 अक्टूबर शून्य पर ला खड़ा कर दिया जाए।
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मुंबई के गणपति पंडाल में किन्नरों के लिए रोज 24 नाटक

मुंबई के अंधेरी इलाके में जेबी नगर के ऋद्धि-सिद्धि गणेश मंडल ने एक नई पहल की है। समानता का अधिकार और मानवता ही सबसे बड़ा धर्म की थीम पर किन्नरों के सम्मानजनक जीवन के लिए रोज 25 बार नाटक प्ले किया जा रहा है। नुक्कड़ की तरह डिजाइन इस 10 से 15 मिनट के नाटक को लगभग 25 हजार लोग रोज देख रहे हैं। ये प्ले गौरी सावंत के जीवन पर आधारित है जो खुद के ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट हैं। मंडल के आयोजक दिनेश चंद्रारकर के मुताबिक हर साल हमारे पंडाल की कोई ऐसी थीम होती है जो किसी ना किसी सोशल इशू पर आधारित होती है। इस बार हमने किन्नरों के बेहतर जीवन और सम्मान को थीम बनाया है। पंडाल में हमने इसके लिए देश के जाने-पहचाने किन्नरों के होर्डिंग्स भी लगाए हैं। हमारी थीम का उद्देश्य किन्नरों को समाज में समान जीवन और सम्मान दिलाने का है। जो प्ले है वो एक बरसात की रात का है जहां एक कपल को बारिश के कारण एक घर में शरण लेनी पड़ती है, जो एक किन्नर का घर है। वहां होने वाली बातचीत और दृश्य से हमने किन्नरों से जुड़ी भ्रांतियों को तोड़ने की कोशिश की है।
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