राष्ट्र

6 हिन्दू नेताओ ने सरकार से मांगी सुरक्षा

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 18 अक्टूबर को हिंदू समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश तिवारी की हत्या ने तीखे तेवरों के लिए चर्चित अन्य कई हिंदू नेताओं को विचलित कर दिया है। अब वे अपनी सुरक्षा को लेकर खासे चिंतित नजर आ रहे हैं। ऐसे नेता, भाजपा के बड़े नेताओं से संपर्क कर सुरक्षा की सिफारिश कराने के साथ सीधे गृह मंत्री अमित शाह से लेकर राज्य सरकारों को पत्र लिख रहे हैं। भाजपा के सूत्रों ने आईएएनएस से कहा कि अपने बयानों से सुर्खियों में रहने वाले आधे दर्जन नेता सुरक्षा मांग चुके हैं। वहीं कुछ ऐसे भी लोग हैं, जिन्हें न धमकी मिली है और न उन्होंने खुद सुरक्षा मांगी है, बल्कि उनके समर्थक इसके लिए गुहार लगा रहे हैं। सुरक्षा मांगने वाले हिंदू नेताओं में सबसे चर्चित नाम साध्वी प्राची का है। भाजपा अध्यक्ष व गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पत्र लिखकर वह सुरक्षा की गुहार लगा चुकी हैं। उन्होंने कहा है कि पिछले कुछ दिनों से हरिद्वार स्थित उनके आश्रम के आसपास कुछ संदिग्ध लोग टहलते मिले हैं, अनहोनी की आशंका है। साध्वी प्राची ने सीमा पार के आतंकी संगठनों के निशाने पर खुद के होने की बात कही
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अब स्टेशनों पर कुल्हड़ में चाय-लासी

नई दिल्ली। प्लास्टिक से निजात दिलाने और पर्यावरण को अनुकूल बनाने की दिशा में भारतीय रेलवे ने 400 स्टेशनों पर चाय और लस्सी को मिट्टी के कुल्हड़ों में देने का निर्णय किया है। यहाँ यह बात उलेखनीय है कि दो दिन पहले भी रेलवे ने पीने के पानी की बोतलों को स्क्रैप करने के लिए मोबाइल रिचार्ज की सुविधा देने की बात की थी। इसके लिए खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) से बातचीत की गई है। इस कदम से जहां एक तरफ स्थानीय और पर्यावरण अनुकूल उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा, प्लास्टिक के उपयोग पर अंकुश लगेगा वहीं दूसरी तरफ कुम्हारों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। केवीआईसी के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना ने पीटीआई -भाषा से कहा कि रेलवे की इस पहल से उत्साहित आयोग कुम्हारों के बीच 30,000 इलेक्ट्रिक चाक का वितरण करने का फैसला किया है। साथ ही मिट्टी के बने सामानों को पुनर्चक्रमण और नष्ट करने के लिये मशीन (ग्राइंडिंग मशीन) भी उपलब्ध कराएगा। मालूम हो कल प्रधानमंत्री मोदी ने मथुरा में कहा था कि प्लास्टिक के इस्तेमाल को 2 अक्टूबर शून्य पर ला खड़ा कर दिया जाए।
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मुंबई के गणपति पंडाल में किन्नरों के लिए रोज 24 नाटक

मुंबई के अंधेरी इलाके में जेबी नगर के ऋद्धि-सिद्धि गणेश मंडल ने एक नई पहल की है। समानता का अधिकार और मानवता ही सबसे बड़ा धर्म की थीम पर किन्नरों के सम्मानजनक जीवन के लिए रोज 25 बार नाटक प्ले किया जा रहा है। नुक्कड़ की तरह डिजाइन इस 10 से 15 मिनट के नाटक को लगभग 25 हजार लोग रोज देख रहे हैं। ये प्ले गौरी सावंत के जीवन पर आधारित है जो खुद के ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट हैं। मंडल के आयोजक दिनेश चंद्रारकर के मुताबिक हर साल हमारे पंडाल की कोई ऐसी थीम होती है जो किसी ना किसी सोशल इशू पर आधारित होती है। इस बार हमने किन्नरों के बेहतर जीवन और सम्मान को थीम बनाया है। पंडाल में हमने इसके लिए देश के जाने-पहचाने किन्नरों के होर्डिंग्स भी लगाए हैं। हमारी थीम का उद्देश्य किन्नरों को समाज में समान जीवन और सम्मान दिलाने का है। जो प्ले है वो एक बरसात की रात का है जहां एक कपल को बारिश के कारण एक घर में शरण लेनी पड़ती है, जो एक किन्नर का घर है। वहां होने वाली बातचीत और दृश्य से हमने किन्नरों से जुड़ी भ्रांतियों को तोड़ने की कोशिश की है।
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श्राद्ध-तर्पण एक महाअधियात्मिक योग

पुराणों के अनुसार, मृत्यु के बाद भी जीव की पवित्र आत्माएं किसी न किसी रूप में श्राद्ध पक्ष में अपनी परिजनों को आशीर्वाद देने के लिए धरती पर आती हैं। पितरों के परिजन उनका तर्पण कर उन्हें तृप्त करते हैं। विद्वानो अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन माह की अमावस्या तक 16 दिन की विशेष अवधि में श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। श्राद्ध को पितृपक्ष नाम से भी जाना जाता है। इस बार 13 सितंबर से श्राद्ध पक्ष शुरू हो रहे हैं, जो कि 28 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होंगे। तिथि क्षय होने से दो दिन किया जा सकता है द्वितिया का श्राद्ध इस बार पितृपक्ष में तिथि क्षय और तिथि वृद्धि भी हो रही है। इस बार पितृपक्ष में पंचांग में तिथियों की गणना के अनुसार पूर्णिमा का श्राद्ध 13 सितंबर को और प्रतिपदा का श्राद्ध 14 तारीख को किया जाना चाहिए। वहीं द्वितिया तिथि का श्राद्ध दो दिन यानी 15 और 16 तारीख को किया जा सकता है। इसके साथ हीएकादशी और द्वादशी का श्राद्ध एक ही दिन यानी 25 सितंबर को होगा। इसी गणना के अनुसार 26 सितंबर को त्रयोदशी का श्राद्ध करना चाहिए। इसके बाद चतुर्दशी और अमावस्या का श्राद्ध क्रमश: 27 और 28 सितंबर को किया जा सकता है। श्राद्ध किसे कहते हैं? श्राद्ध का अर्थ है, अपने पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट करना। शास्त्रों के अनुसार जिस किसी के परिजन अपने शरीर को छोड़कर चले गए हैं, उनकी तृप्ति और उन्नति के लिए श्रद्धा के साथ जो शुभ संकल्प और तर्पण किया जाता है, उसे श्राद्ध कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि मृत्यु के देवता यमराज श्राद्ध पक्ष में जीव को मुक्त कर देते हैं, ताकि वे स्वजनों के यहां जाकर तर्पण ग्रहण कर सकें। कौन कहलाते हैं पितर जिस किसी के परिजन चाहे वह विवाहित हों या अविवाहित, बच्चा हो या बुजुर्ग, स्त्री हो या पुरुष उनकी मृत्यु हो चुकी है उन्हें पितर कहा जाता है। पितृपक्ष में मृत्युलोक से पितर पृथ्वी पर आते हैं और आशीर्वाद देते हैं। पितृपक्ष में पितरों की आत्मा की शांति के लिए उनको तर्पण किया जाता है। पितरों के प्रसन्न होने पर घर पर सुख शांति आती है। पितृपक्ष में कैसे करें श्राद्ध श्राद्ध वाले दिन अल सुबह उठकर स्नान-ध्यान करने के बाद पितृ स्थान को सबसे पहले शुद्ध कर लें। इसके बाद पंडित जी को बुलाकर पूजा और तर्पण करें। इसके बाद पितरों के लिए बनाए गए भोजन के चार ग्रास निकालें और उसमें से एक हिस्सा गाय, एक कुत्ते, एक कौए और एक अतिथि के लिए रख दें। गाय, कुत्ते और कौए को भोजन देने के बाद ब्राह्मण को भोजन कराएं। भोजन कराने के बाद ब्राह्मण को वस्त्र और दक्षिणा दें। जब याद न हो श्राद्ध की तिथि पितृपक्ष में पूर्वजों का स्मरण और उनकी पूजा करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है। जिस तिथि पर हमारे परिजनों की मृत्यु होती है उसे श्राद्ध की तिथि कहते हैं। बहुत से लोगों को अपने परिजनों की मृत्यु की तिथि याद नहीं रहती ऐसी स्थिति में शास्त्रों में इसका भी निवारण बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार यदि किसी को अपने पितरों के देहावसान की तिथि मालूम नहीं है तो ऐसी स्थिति में आश्विन अमावस्या को तर्पण किया जा सकता है। किस दिन किसका श्राद्ध 1. पंचमी श्राद्ध - जिनकी मृत्यु पंचमी तिथि को हुई हो या जिनकी मृत्यु अविवाहित स्थिति में हुई है उनके लिए पंचमी तिथि का श्राद्ध किया जाता है। 2. नवमी श्राद्ध - इसे मातृनवमी के नाम से भी जाना जाता है। इस तिथि पर श्राद्ध करने से कुल की सभी दिवंगत महिलाओं का श्राद्ध हो जाता है। 3. चतुर्दशी श्राद्ध - इस तिथि उन परिजनों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी अकाल मृत्यु हुई हो जैसे कि दुर्घटना से, हत्या, आत्महत्या, शस्त्र के द्वारा आदि। 4. सर्वपितृ अमावस्या - जिन लोगों के मृत्यु के दिन की सही-सही जानकारी न हो, उनका श्राद्ध आमावस्या को किया जाता है।
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गणेश विसर्जन: महाभारत काल से जुड़ी है ये प्रथा

गणेश चतुर्थी के दिन बप्पा की स्थापना कर उनकी पूजा एक, तीन, पांच या दस दिन तक की जाती है। श्रद्धानुसार लोग अपने अनुसार बप्पा का पूजा के दिन निर्धारित करते हैं, उसके बाद उनका विसर्जन जरूर करते हैं। विर्सजन भी भगवान का उतने ही धूमधाम से किया जाता है जितना की स्थापना के समय उनका स्वागत होता है। मान्यता है कि बिना विसर्जन बप्पा की पूजा पूरी नहीं मानी जाती। इसलिए विसर्जन करना जरूरी होता है लेकिन विसर्जन के पीछे एक महत्वपूर्ण वजह भी है। ऐसे शुरू हुई उत्सव की प्रथा गणेशोत्सव की शुरुआत आजादी से पूर्व ही शुरू हो चुकी थी। अंग्रेजो के खिलाफ देशवासियों को एकजुट करने के लिए श्री बाल गंगाधर तिलक ने गणेशोत्सव का पहली बार आयोजन किया था। धीरे-धीरे ये प्रथा बनी और हर साल पूरे देश में इस उत्सव का आयोनज होना शुरू हो गया। पूजा के बाद विसर्जन करने को लेकर कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर गणपति जी का विसर्जन करना जरूरी क्यों होता है। आइए जानें क्या है इसके पीछे की कहानी। भगवान हैं जल तत्व के अधिपति भगवान गणेश जल तत्व के अधिपति माने गए हैं। मुख्य कारण तो उनके वसर्जन का यही है कि अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान गणपति की पूजा-अर्चना के बाद उन्हें वापस जल में विसर्जित कर दिया जाता है। यानी वह जिसके अधिपति है, वहीं उन्हें पहुंचा दिया जाता है, लेकिन पुराणों में उनके विसर्जन के पीछे कुछ और बातें भी हैं। बढ़ गया था तापमान, इसलिए जल में डाला गया बप्पा को धार्मिक पुराणों में उनके विसर्जन के पीछे मान्यता बिलकुल इतर है। पुराणों के अनुसार श्री वेद व्यास जी गणेश चतुर्थी से महाभारत कथा प्रारंभ की और गणपति जी अक्षरश: लिखते जा रहे थे। व्यास जी आंख बंद कर कथा लगातार दस दिन तक सुनाते रहे और गणपति जी लिखते ही रहे। दस दिन बाद जब व्यास जी ने कथा खत्म कर आंखें खोलीं तो पाया कि गणपति जी के लगातार काम करने से उनके शरीर का तापमान बहुत बढ गया था। व्यास जी ने गणेश जी के शरीर को ठंडक देने के लिए एक सरोवर में ले जा कर खूब डुबकी लगवाई, जिससे उनका तापमान समान्य हो गया। इतना ही नहीं उनके तापमान को कम करने के लिए व्यास जी ने उनके शरीर पर सुगंधित सौंधी माटी का लेप भी किया था और जब वह सूख गई तो उनका शरीर अकड़ने लगा इस कारण भी उन्हें सरोवर में ले जाया गया ताकि माटी शरीर से अलग हो कर उन्हें ठंडक दे सकें। इसके बाद व्यास जी ने 10 दिनों तक गणपति जी को उनके पसंद का भोजन कराया था। इसी मान्यता के अनुसार प्रभु की पूजा के बाद उनका विसर्जन किया जाता है।
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इन उपायों से दूर हो सकती है आर्थिक सुस्ती

रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वी.के. यादव ने कहा है कि स्टेशनों पर बोतलों को नष्ट करने वाली 400 मशीनें लगाई जाएंगी। इसका इस्तेमाल करने वाले यात्रियों को मशीन में अपना मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा और इसके बाद उनका मोबाइल फोन रिचार्ज हो जाएगा। हालांकि, रिचार्ज के विवरण फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 128 स्टेशनों पर बोतल नष्ट करने वाली 160 मशीनें लगाई गई हैं। उन्होंने कहा कि रेलवे कर्मचारियों को स्टेशनों पर इस्तेमाल हो चुकी प्लास्टिक बोतलों को जमा करने और उन्हें रिसाइकल के लिए भेजने का निर्देश दिया है। इससे पहले, मंत्रालय ने सभी विक्रेताओं और कर्मचारियों को प्लास्टिक का इस्तेमाल घटाने के लिए फिर इस्तेमाल होने वाले बैग के प्रयोग का निर्देश दिया था। कुछ अर्थशास्त्री ग्रामीण मांग बढ़ाने और वित्तीय प्रोत्साहन देने का सुझाव दे रहे जबकि कुछ का कहना है कि भारत में वास्तविक ब्याज दर लंबे समय तक ऊंची होने से उपभोग और निवेश की मांग प्रभावित हुई है। आर्थिक सुस्ती गहराने के मूल में हालांकि, सभी का इशारा मांग की कमी होने की तरफ ही रहा है लेकिन मांग पैदा करने और अर्थव्यवस्था में गतिविधियां बढ़ाने के बारे में उनके सुझाव अलग अलग रहे हैं। उल्लेखनीय है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर छह साल के निम्न स्तर, पांच प्रतिशत पर पहुंच गई। रिजर्व बैंक ने अपनी ताजा मौद्रिक समीक्षा में इस वित्त वर्ष की आर्थिक वृद्धि का अनुमान सात प्रतिशत से घटाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया। कुछ वैश्विक एजेंसियों ने इसके 6.5 प्रतिशत या उससे भी कम रहने का अनुमान जताया है। नेशनल इंस्टीट्यूट आफ पब्लिक फाइनेंस एण्ड पालिसी के प्रोफेसर एन आर भानुमूर्ति कहते हैं, ‘इस समय सरकार को सड़क, रेलवे, बिजली, ग्रामीण एवं शहरी आवास क्षेत्र की तमाम बड़ी परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाना होगा ताकि आर्थिक गतिविधियों में तेजी आये।’ उन्होंने कहा, ‘आर्थिक सुस्ती तो काफी पहले शुरू हो गई थी हालांकि, सरकार इसे अब महसूस कर रही है। इसकी वजह चक्रीय और संरचनात्मक दोनों तरह की हैं।’ भानुमूर्ति ने कहा, ‘आपको वित्तीय प्रोत्साहन देने होंगे, मौद्रिक उपाय का फिलहाल असर नहीं होगा। सरकार के वित्तीय प्रोत्साहनों का स्वरूप 2008- 09 की तरह नहीं होना चाहिये। सीधे उपभोक्ता खपत बढ़ाने वाले उपाय यदि होंगे तो मुद्रास्फीति बढ़ सकती है इसलिये इससे बचना होगा। पूर्ववर्ती योजना आयोग में प्रधान आर्थिक सलाहकार रहे प्रणव सेन इस मामले में सीधे मांग की कमी को आर्थिक सुस्ती की वजह बताते हैं। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र में मांग कमजोर बनी हुई है। शहरी गरीब लोगों की आमदनी कम है। इससे जनसंख्या के एक बड़े तबके की मांग कमजोर बनी हुई है। उनका स्पष्ट मानना है कि अर्थव्यवस्था में आपूर्ति की कोई तंगी नहीं है बल्कि मांग की कमी बनी हुई है। उनका सुझाव है कि किसानों को सालाना 6,000 रुपये देने की पीएम किसान योजना पर तेजी से अमल होना चाहिये। ग्रामीण स्तरीय परियोजनाओं जैसे कि ग्रामीण सड़क योजना, लघु सिंचाई योजना, सस्ती आवास योजना पर काम तेज होना चाहिये। इनमें स्थानीय ठेकेदारों और स्थानीय कामगारों को काम दिया जाना चाहिये। वहीं सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट रिसर्च (सीजीडीआर) के निदेशक डा. कन्हैया सिंह ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मुख्यत: आपूर्ति प्रेरित है। देश में मानसून अच्छा रहता है तो बाजार में गर्मी आती है। इस तरह उद्योग धंधे मानसून की चाल पर निर्भर करते हैं। उन्होंने आर्थिक सुस्ती के स्वरूप पर एक अलग नजरिया पेश करते हुए कहा कि अप्रैल- जून 2019 की पहली तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि कम रही है लेकिन बिजली क्षेत्र की वृद्धि 8.62 प्रतिशत पर अच्छी रही है। विनिर्माण क्षेत्र अच्छा नहीं कर रहा है लेकिन अन्य क्षेत्र अपेक्षाकृत ठीक प्रदर्शन कर रहे हैं इसको समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा बिजली क्षेत्र का प्रदर्शन अच्छा है तो इसकी खपत हुई उत्पादन भी हुआ लेकिन बिक्री नहीं हुई। यह पिछले साल के ऊंचे स्तर का भी असर हो सकता है। भानुमूर्ति कहते हैं कि विदेशी जोखिम को कम करने के लिये घरेलू क्षेत्र पर ध्यान देना होगा। घरेलू बचत को बढ़ावा दिया जाना चाहिये। अवसंरचना बॉंड, कर मुक्त सुविधा वाले बॉंड जारी किये जा सकते हैं। प्रणव सेन का कहना है कि समस्या मांग की है जबकि सरकार के उपाय आपूर्ति बढ़ाने की तरफ अधिक हैं। बैंकों में नकदी उपलब्ध है लेकिन मांग नहीं है। कन्हैया सिंह कहते हैं कि भारत जैसे देश में मुद्रास्फीति को लक्षित दायरे में बांधना ठीक नहीं है। पिछले डेढ़ दो साल में मुद्रास्फीति कम रहने के बावजूद रिजर्व बैंक की रेपो दर को ऊंचा रखा गया। इसमें कमी नहीं की गई परिणामस्वरूप वास्तविक ब्याज दर ऊंची बनी रही। इसका निवेश पर असर पड़ता है। सिंह का मामना है कि 2019-20 की जीडीपी वृद्धि सात प्रतिशत के आसपास रहेगी। प्रणव सेन ने कहा वृद्धि 5.5 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी लेकिन भानुमूर्ति का मानना है कि यह 6 से 6.5 प्रतिशत के दायरे में रह सकती है।
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जमीन का जीवन

करीब दो साल पहले आए एक अध्ययन के मुताबिक भारत की लगभग तीस फीसद जमीन खराब या बंजर होने की कगार पर है। पिछले कुछ दशकों के दौरान हमारे देश में खेती के लगातार घाटे का सौदा होने की समस्या पहले ही गंभीर होती गई है। इससे इतर एक बड़ी मुश्किल यह खड़ी हो गई है कि तेजी से शहरीकरण और ग्रामीण इलाकों में भी रिहाइशी इलाकों के विस्तार की वजह से जिस तरह खेती-योग्य जमीन का रकबा सिकुड़ रहा है, उसमें यह चिंता स्वाभाविक है कि आने वाले वक्त में अनाज उत्पादन की स्थिति क्या होगी! हालांकि देश में खेती के लायक जमीन की कमी नहीं है, लेकिन सच यह है कि इसमें एक बड़ा भूभाग बंजर है और उसकी कोई उपयोगिता नहीं है, बल्कि जमीन के बंजर होने का एक गंभीर असर पानी की उपलब्धता और उसके संरक्षण की कोशिशों पर भी पड़ता है। आमतौर पर आर्थिक गतिविधियों की चर्चा और उनके आंकड़ों से विकास की रफ्तार का अंदाजा परोसने के क्रम में भूमि के बंजर होने और उससे पैदा होने वाली समस्याओं का आकलन पीछे छूट जाता है। जबकि अनाज उत्पादन से लेकर पानी और पेड़-पौधों तक का संरक्षण आर्थिक चक्र के साथ अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है। ऐसे में प्रधानमंत्री ने बंजर जमीन की समस्याओं को लेकर चिंता जाहिर की है। गौरतलब है कि सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र के ताजा सम्मेलन (यूएनसीसीडी) की एक सभा में कहा कि 2015 और 2017 के दौरान भारत में पेड़ और जंगल के दायरे में करीब आठ लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है और इससे बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने में बड़ी मदद मिलेगी। इसके अलावा, उन्होंने यह घोषणा भी की कि अब से लेकर सन 2030 तक भारत अपनी जमीन को उपजाऊ बनाने के मकसद से खेती के कुल रकबे का भी विस्तार करेगा और उसे 2.1 करोड़ हेक्टेयर से बढ़ा कर 2.6 करोड़ हेक्टेयर करेगा। जाहिर है, यह न केवल देश में भूमि की उपयोगिता के मद्देनजर बेहद अहम घोषणा है, बल्कि इससे जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता और भूमि क्षरण जैसे मामलों में भी चुनौतियों का सामना करने के लिए एक ठोस भूमिका बनेगी। एक अहम चिंता यह भी है कि पिछले कुछ दशकों में प्लास्टिक के बेतहाशा उपयोग ने सही-सलामत जमीन को भी लगभग बंजर बना दिया है। इसी के मद्देनजर सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने इस पर भी चिंता जताई कि अगर प्लास्टिक के बढ़ते इस्तेमाल को नहीं रोका गया तो भूक्षरण का एक अन्य स्वरूप सामने आएगा और नतीजे में जमीन की उत्पादकता को फिर से हासिल करना संभव नहीं रह पाएगा। करीब दो साल पहले आए एक अध्ययन के मुताबिक भारत की लगभग तीस फीसद जमीन खराब या बंजर होने की कगार पर है। यानी इस दिशा में जताई जाने वाली चिंता से आगे अगर ठोस पहल नहीं की जाती है तो आने वाले वक्त में समूचे देश को एक बड़े संकट से दो-चार होना पड़ सकता है। तकनीक के विकास और विस्तार से बंजर जमीन को खेती योग्य या पेड़-पौधे लगाने के लायक बनाया जा सकता है। मगर दूसरी ओर विकास का हवाला देकर अगर वन क्षेत्र की संरक्षित भूमि की अहमियत को नजरअंदाज किया जाता है और खनन या दूसरी वजहों से पेड़ों को काटने को मंजूरी दी जाती है तो उसके असर का आकलन भी कर लिया जाना चाहिए। यों भी, जब बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने की दिशा में कारगर पहलकदमी होती है तो वह जल संकट को दूर करने में भी मददगार साबित होगी। यह किसी से छिपा नहीं है कि हाल के वर्षों में भारत सहित दुनिया के कई देश जिस तरह पानी की कमी की चपेट में आए हैं, वह भविष्य को लेकर एक गंभीर चेतावनी है।
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इस लिक्विड से आधे मिनट से भी कम समय में ठीक हो जाएगा बाइक-कार का पंक्चर

नई दिल्ली: कार या बाइक चलाते समय बीच रास्ते में पंक्चर हो जाए तो आपको काफी दिक्कत हो सकती है और इसमें आपका काफी समय बर्बाद हो जाता है, लेकिन आज हम आपको ऐसे प्रोडक्ट के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपकी कार और बाइक के टायर को महज आधे मिनट में ठीक कर देता है। तो चलिए आज आप भी जान लीजिए इस ख़ास लिक्विड के बारे में। दरअसल हाल ही में बाइक सील नाम की कंपनी ने एक चमत्कारी लिक्विड लांच किया है जिससे कुछ ही सेकंडों में बाइक के पंक्चर को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। इस प्रोडक्ट की खास बात यह है कि इसे इस्तेमाल करने के लिए आपको किसी मैकेनिक की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। इसे आप खुद ही इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे करते हैं इस प्रोडक्ट का इस्तेमाल यह प्रोडक्ट लिक्विड फॉर्म में आता है इसलिए आप इसे बड़ी आसानी से अपनी बाइक के साथ कैरी कर सकते हैं और बाइक पंक्चर होने के कुछ ही मिनटों में इसे ठीक भी कर सकते हैं। इसके लिए बस आपको अपने टायर में उस जगह पर इस लिक्विड को डालना होता है जहां पर कील या फिर कोई नुकीली चीज से छेद हो गया हो। इसके बाद आपको बस अपने टायर को वैसे ही छोड़ देना है क्योंकि बाकी का काम ये चमत्कारी लिक्विड अपने आप कर देता है और फिर आप अपनी बाइक को ले जा सकते हैं। इतनी है कीमत मार्केट में लॉन्च हो चुके इस प्रोडक्ट को आप ऑनलाइन शॉपिंग साइट पर बड़ी ही आसानी से 2500 रुपये में खरीद सकते हैं। कीमत के हिसाब से यह एक अफोर्डेबल प्रोडक्ट है जो बाइकर्स और कार मालिकों के लिए वरदान है।
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81 साल का बुजुर्ग बन अमेरिका जाने के लिए एयरपोर्ट पहुंचा युवक, एक गलती ने खोली सारी पोल

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे(आईजीआई) से एक 32 साल के युवक की गिरफ्तारी की खबर सामने आई है, जो अपने आप में बेहद हैरान करने वाली है। वैसे तो आईजीआई एयरपोर्ट पर किसी न किसी वजह से लोगों की गिरफ्तारी होती ही रहती है लेकिन इस युवक की गिरफ्तारी का मामला थोड़ा अजीब है। दरअसल यह युवक इसलिए गिरफ्तार हुआ क्योंकि ये एक 81 साल के बुजुर्ग के पासपोर्ट पर अमेरिका जाना चाहता था। सिर्फ यही नहीं इस युवक ने 81 साल का दिखने के लिए उक्त 81 साल के बुजुर्ग के जैसे हुलिया भी बना लिया। युवक ने न सिर्फ बुजुर्ग जैसे बाल और दाढ़ी को सफेद किया बल्कि उसके जैसे कपड़े और चश्मा भी पहन लिया। आगे जानिए फिर ऐसा क्या हुआ जो उस युवक का राज खुल गया।
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करपका विनायक मंदिर, यहां गणेश प्रतिमा की हैं सिर्फ दो भुजाएं

नई दिल्ली। देशभर में भगवान गणेश के कई प्राचीन और खूबसूरत मंदिर हैं। ऐसा ही एक मंदिर तमिलनाडु के तिरुपथुर तालुक में पिल्लरेपट्टी में स्थित है। यह करपका विनायक मंदिर के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि यहां गणेश भगवान की मूर्ति पर की गई नक्‍काशी चौथी शताब्दी के आसपास की गई थी। मंदिर का ध्यान चेट्टियार समुदाय द्वारा रखा जाता है और यह इस समुदाय के नौ सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है। 1091 और 1238 ई. के बीच बना मंदिर करपका विनायक मंदिर भगवान गणेश को समर्पित एक प्राचीन और गुफा मंदिर है। इस मंदिर को पिल्लरेपट्टी पिलर मंदिर के रूप में भी जाना जाता है। यहां एक गुफा है जिसे एक ही पत्थर को काटकर बनाया गया है। ये गुफा भी भगवान गणेश को समर्पित है। गुफा में भगवान शिव और अन्य देवताओं के पत्थर से बनाई गई मूर्तियां हैं। मंदिर की गुफा एक ही पत्थर से काटकर बनाई गई है। मंदिर के गर्भगृह में अंदर पर्याप्त रोशनी के लिए तेल के बड़े-बडे दीपकों का प्रयोग किया जाता है। यहां पाए गए शिलालेखों के अनुसार यह मंदिर 1091 और 1238 ई. के बीच बनाया गया था। पांड्या राजाओं ने करवाया था इसका निर्माण पांड्या राजाओं द्वारा पिल्लरेपट्टी पहाड़ी पर मंदिर का निर्माण किया गया है। मंदिर में अन्य तीर्थस्थान भगवान शिव, देवी कात्यायनी, नागलिंगम और पसुपथिस्वरार को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि देवी कात्यायनी की प्रार्थना करने से कुंवारी लड़कियों का विवाह जल्दी हो जाता है और भगवान नागलिंगम की पूजा करने से संतान की प्राप्ति होती है। वहीं धन प्राप्ति और सुख- समृद्धि के लिए पसुपथिस्वरार की पूजा की जाती है। सोने से मढ़ी हुई है गणेश प्रतिमा यहां गणेशजी की 6 फीट लंबी चट्टान की मूर्ति है। आमतौर पर गणेशजी के हर स्वरूप में चार भुजाएं होती हैं किंतु इस मंदिर में स्थापित मूर्ति में गणेशजी की सिर्फ दो ही भुजाएं हैं। मुख्य प्रतिमा सोने से मढ़ी हुई है। यहां गणेशजी की सूंड दाईं ओर है जिसकी वजह से उन्हें वैलपूरी पिल्लईर भी कहा जाता है। यहां पर सभी देवताओं की मूर्तियों का मुख उत्तरी दिशा की ओर है। गणेशजी का उत्तर की ओर मुख करना और दाईं तरफ सूंड का होना काफी शुभ माना जाता है। यह समृद्धि, धन और ज्ञान का कारक होता है।
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